सत्र की उपलब्धि
पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र इस कारण भी महत्त्वपूर्ण कहा जा सकता है क्योंकि यह क्रियात्मक रूप में प्रदेश सरकार का अंतिम सत्र हो सकता है। यह सत्र अधिक लम्बा नहीं था परन्तु इसमें कई महत्त्वपूर्ण विधेयक पारित हुए और कई अहम प्रस्ताव भी पारित किए गए। इस विधानसभा में आम आदमी पार्टी के विधायकों की संख्या अधिक है। दूसरी पार्टी कांग्रेस के 16 विधायक हैं। इसके अतिरिक्त अकाली दल और भाजपा के विधायकों की संख्या नाममात्र ही कही जा सकती है। सरकार के कार्यकाल की शुरुआत से ही विधानसभा सत्रों में सरकार का पलड़ा भारी रहा है परन्तु विपक्षी विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा और कांग्रेसी विधायक सुखपाल सिंह खैहरा की कारगुज़ारी भी पूरी तरह खटकती रही है, जिन्होंने अक्सर अलग-अलग मुद्दे उठा कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है, परन्तु सरकार के प्रतिनिधि बहुसंख्या में होने के कारण उसे विधेयक पारित करवाने में ज्यादा मुश्किल पेश नहीं आई। इसलिए भी क्योंकि विपक्षी दलों के विधायक बहस के बाद अक्सर वॉकआऊट ही करते रहे हैं।
इस सत्र के अंतिम दिन जल्दबाज़ी में 9 विधेयक पारित करवाए गए, जिनमें निजी स्कूलों को वर्ष में पांच प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने से रोकने संबंधी विधेयक भी शामिल था और आऊट सोर्स ठेकेदारी कर्मचारियों को सीधा सरकारी ठेकेदारी के तहत लाने संबंधी विधेयक भी शामिल था। इसके अतिरिक्त पेश किए तीन और विधेयकों संबंधी कांग्रेसी विधायकों द्वारा इसलिए कड़ा विरोध किया गया कि इन विधेयकों के विस्तार संबंधी समय पर विधायकों को कई जानकारी नहीं दी गई थी। स. बाजवा और सुखपाल सिंह खैहरा ने इनका इसलिए कड़ा विरोध किया कि जो विधेयक पेश हुए हैं, उनके संबंध में विधायकों को पहले से जानकारी नहीं दी गई, जिस पर औपचारिक रूप से स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने सरकार को यह निर्देश दिया कि विचार-विमर्श से कम से कम 15 दिन पहले विधेयक सदन में पेश किए जाने चाहिएं ताकि सभी सदस्यों द्वारा पूरी जानकारी लेकर बहस की जा सके। अपने-अपने ढंग से सरकारी पक्ष के सदस्यों द्वारा विगत अवधि में सरकार की उपलब्धियों को ऐसे सत्रों में गिनाने का यत्न किया गया। इनमें महिलाओं को दी गई मासिक राशि भी शामिल थी और सरकार द्वारा टेलों तक पानी पहुंचाने के यत्न की प्रशंसा भी की गई। बड़े-छोटे खालों को पुन: शुरू करने से नि:संदेह भूमिगत पानी की बचत हो रही है। विपक्ष ने अमन-कानून की स्थिति और नशे के प्रचलन संबंधी सरकार को बार-बार घेरने का यत्न किया, जिसकी प्रतिक्रिया स्वरूप सरकार ने इन क्षेत्रों में अपने किए कार्यों का विस्तारपूर्वक विवरण दिया और क्रियात्मक रूप में हासिल की अपनी उपलब्धियों को भी गिनाया। चाहे इस सत्र के लोगों के मन में प्रभाव कुछ भी रहे हों परन्तु यह बात दिलचस्पी वाली ज़रूर कही जा सकती है कि इसमें सभी पार्टियों के अधिकतर विधायकों और मंत्रियों ने पूरी दिलचस्पी ज़रूर दिखाई।
हरजोत सिंह बैंस द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में देश का अग्रणी प्रदेश बनने और इसके लिए किए गए कार्यों को सरकार की बड़ी उपलब्धियों के रूप में दर्ज किया गया। आज प्रदेश में बेरोज़गारी की समस्या ज़रूरत दरपेश है जिसके जवाब में सरकार ने यह दावा किया कि पिछले साढ़े 4 वर्ष में उसकी ओर से 68,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दी गई हैं। सरकार की ओर से स्वास्थ्य बीमा योजना को क्रियात्मक रूप देने संबंधी भी इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बताया गया है, आगामी समय में इससे लोगों को कितना लाभ मिलता है, यह ही सरकार की स्थूल उपलब्धि मानी जाएगी। नि:संदेह प्रदेश के समक्ष अभी अनेकानेक और समस्याएं खड़ी दिखाई देती हैं, जिनका समाधान करने के लिए शेष समय में सरकार को बड़े यत्नों की ज़रूरत होगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

