खेलों में हरियाणा ने देश के बड़े-बड़े राज्यों को भी पीछे छोड़ा
एक बार फिर खेलों के मामले में हरियाणा ने देश के बड़े बड़े राज्यों को बहुत पीछे छोड़ दिया है। एशियन गेम्स व ओलम्पिक के बाद अब कॉमनवैल्थ खेलाें में भी हरियाणा ने पूरे देश व दुनिया को आश्चर्यचकित किया है। देश की आबादी के मामले में हरियाणा मात्र दो फीसदी है, जबकि कॉमनवैल्थ खेलों में भारत को हासिल हुए गोल्ड मैडल में हरियाणा के खिलाड़ियों ने 50 प्रतिशत से ज्यादा मैडल हासिल किए हैं। कॉमनवैल्थ खेलों में भारतीय खिलाड़ियों को कुल 13 गोल्ड मैडल हासिल हुए और इनमें से 7 गोल्ड मैडल हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते। गोल्ड मैडल के अलावा हरियाणा के खिलाड़ियाें ने 2 सिल्वर मैडल और एक कांस्य पदक भी हासिल किए। इससे साफ है कि देश की 98 प्रतिशत आबादी वाले राज्य उतने गोल्ड मैडल नहीं हासिल कर पाए, जितने मात्र दो फीसदी आबादी वाले हरियाणा के खिलाड़ियों ने अर्जित किए। इससे पहले एशियाई और ओलम्पिक खेलों में भी हरियाणा के खिलाड़ी अपनी धाक जमा चुके हैं और भारत का नाम दुनिया में रोशन कर चुके हैं। कुश्ती, डिस्कस थ्रो, भाला फेंक, पैरा-एथलीट महिला शॉटपुट और मुक्केबाजी में हरियाणा के खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा पिछले कई सालों से भारतीय महिला हाकी टीम में भी हरियाणा की लड़कियों विशेषकर शाहाबाद में प्रशिक्षित की गई महिला हॉकी खिलाड़ियों ने देश और दुनिया भर में अपना लोहा मनवाया है।
हरियाणा की खेल नीति को श्रेय : सैनी
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और खेल मंत्री गौरव गौतम खिलाड़ियों के इस शानदार प्रदर्शन का श्रेय हरियाणा की खेल नीति और खिलाड़ियों को प्रदेश सरकार की ओर से दी जा रही खेल व प्रशिक्षण सुविधाओं को देते हैं। उनका कहना है कि अगले ओलम्पिक खेलों के लिए अभी से खिलाड़ियों को तैयार किया जा रहा है, ताकि देश का नाम ऊंचा कर सकें। दूसरी ओर कांग्रेस नेता दावा करते हैं कि हुड्डा सरकार के समय बनाई गई ‘पदक लाओ नौकरी पाओ’ वाली खेल नीति की बदौलत ही हरियाणा में खेलों के स्तर में बहुत भारी सुधार हुआ। दूसरी ओर इनेलो नेता भी हरियाणा में खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार के लिए इनेलो सरकार के समय बनी खेल नीति को श्रेय देते हैं। उनका कहना है कि इनेलो सरकार ने कौन बनेगा करोड़पति की तर्ज पर पहली बार खिलाड़ियों को ओलम्पिक में पदक लाने पर एक करोड़, 50 लाख व 25 लाख रुपए नकद पुरस्कार देने का ऐलान किया था और यमुनानगर की पुत्रवधु कर्णम मलेश्वरी को ओलम्पिक में भारत्तोलन प्रतियोगिता में कांस्य पदक लाने पर 25 लाख रुपए और एक हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण का प्लाट देकर सम्मानित किया गया था। कुल मिलाकर यह तो साफ है कि पिछले कई सालों में हरियाणा की सरकार ने प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए।
हवाई अड्डे पर किया स्वागत
पिछले 12 सालों में भाजपा सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने में बहुत अग्रणीय रही है। कॉमनवैल्थ खेलों में पदक जीतने के बाद हरियाणा के खिलाड़ी ज्यों ही नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे, तो हरियाणा के खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम खुद हवाई अड्डे पर इन खिलाड़ियों का स्वागत करने के लिए आये। हरियाणा के खिलाड़ियों ने कॉमनवैल्थ खेलों में 7 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य पदक सहित कुल 10 पदक हासिल किए।
इन खेलों में महिला खिलाड़ियों और पैरा-खिलाड़ियाें का प्रदर्शन भी बेहद शानदार रहा। हरियाणा की पैरा-एथलीट शर्मिला धनखड़ ने महिला शॉटपुट (गोला फैंक) स्पर्धा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए स्वर्ण पदक जीता। मुक्केबाजी में प्रीति पंवार ने महिला 54 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रच दिया, जबकि भिवानी की जैसमीन लांबोरिया ने महिला 57 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। दोनों खिलाड़ी भिवानी की रहने वाली हैं। इसके अलावा साक्षी चौधरी, सचिन सिवाच, प्रिया घनघत व हिसार के बॉक्सर अंकुश ने भी स्वर्ण पदक हासिल किए। जबकि पानीपत के नीरज चोपड़ा ने भाला फैंक (जैवलिन थ्रो) में और हांसी के बॉक्सर नरेंद्र बेरवाल ने सिल्वर मैडल हासिल किया। इसके अलावा सीमा सांगवान ने डिस्क्स थ्रो में कांस्य पदक हासिल किया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों द्वारा खेलों में हासिल की गई सफलता देश व प्रदेश के अन्य लाखों खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
जल्द होंगे सम्मानित
हरियाणा सरकार जल्दी ही एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित करके इन खिलाड़ियों को नकद पुरस्कारों के साथ सम्मानित करेगी। इसके लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। हरियाणा में पदक विजेता खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार देने के साथ-साथ सरकारी नौकरियां देने का भी प्रावधान है। इसी बीच, 2030 में होने वाले कॉमनवैल्थ खेलों का आयोजन हरियाणा में करवाए जाने की मांग निरंतर उठ रही है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा के साथ हिसार के सांसद जय प्रकाश, सोनीपत के सांसद सतपाल ब्रह्मचारी व अम्बाला के सांसद वरुण चौधरी ने तो 2030 के कॉमनवैल्थ खेल हरियाणा में करवाए जाने की मांग को लेकर संसद परिसर में प्रदर्शन भी किया। उनका कहना था कि जब खेलों में हरियाणा के खिलाड़ी पूरे देश के मुकाबले सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, तो हरियाणा के एनसीआर में स्थित जिलों में कॉमनवैल्थ खेल करवाने का निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे हरियाणा जैसे खेल प्रधान राज्य में खेलों के लिए विश्वस्तरीय ढांचा तैयार होगा और देश की झोली में ज्यादा मैडल भी आएंगे। उन्होंने कहा कि 2030 कॉमनवैल्थ खेलों के आयोजन की जिम्मेवारी गुजरात को मिली है, जहां अभी समाप्त हुए कॉमनवैल्थ खेलों में एक भी मैडल नहीं मिला। उन्होंने कहा कि हरियाणा के खिलाड़ियाें ने ओलम्पिक खेलों, एशियाई और कॉमनवैल्थ खेलों में बड़े-बड़े राज्यों को पीछे छोड़ते हुए सबसे ज्यादा मैडल हासिल किए। इसको देखते हुए हरियाणा को गुजरात के साथ सह-आयोजक बनाया जाना चाहिए जिससे हरियाणा के खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को और ज्यादा उत्साहित किया जा सके, जिसका फायदा आने वाले समय में हरियाणा के साथ-साथ पूरे देश को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि पिछले 4 ओलम्पिक खेलों में देश को मिले कुल मैडल में से आधे से ज्यादा मैडल हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते हैं।
कांग्रेस सांसदों ने कहा कि खेलो इंडिया के लिए रखे गए 3500 करोड़ रुपए के बजट में से 600 करोड़ का बजट गुजरात को दिया गया और उसके मुकाबले में सबसे ज्यादा मैडल लाने वाले हरियाणा को सिर्फ 80 करोड़ रुपए ही दिए गए। उन्होंने कहा कि 2030 के कॉमनवैल्थ खेलों की सह-मेजबानी का हरियाणा सबसे प्रमुख दावेदार है और 2036 के ओलम्पिक खेलों का आयोजन भी अगर भारत में होता है, तो उसके लिए भी दिल्ली के साथ लगते हरियाणा के एनसीआर जिलों में सह-मेजबानी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि खेलों का प्रदर्शन देखते हुए हरियाणा को मेजबान प्रदेश बनाने के बारे में केंद्र सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए और हरियाणा सरकार को भी मजबूती से अपना दावा पेश करना चाहिए। -मो.-9855465946



