JPSC परीक्षा विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट: परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने और CBI जांच की मांग
रांची, 21 अगस्त - झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं की सीबीआई या स्वतंत्र जांच का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंच गया है। इससे जुड़ी जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुप्रीम कोर्ट 24 अगस्त, सोमवार को सुनवाई करेगा।
सामाजिक कार्यकर्ता हरिश्रन देवगन द्वारा अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दायर याचिका में परीक्षा रद्द करने और नई परीक्षा के आयोजन की मांग की गई है, जिसमें परीक्षा के संचालन और मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। याचिका में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा 19 अप्रैल, 2026 को हुई 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष, व्यापक और समयबद्ध जांच की मांग की गई है।
याचिका दो जुलाई को प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद पैदा हुए विवाद के मद्देनजर दायर की गई है। याचिका के अनुसार, एक सफल उम्मीदवार की ओएमआर उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी वायरल हो गई, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर आरोप लगे। इन अनियमितताओं के कारण रांची में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। याचिकाकर्ता का दावा है कि प्रथम पेपर में 100 प्रश्नों में से केवल 48 प्रश्नों का ही उत्तर देने के बावजूद उम्मीदवार को उत्तीर्ण घोषित कर दिया गया।

