राहुल द्रविड़ को ‘द वाल’ क्यों कहते हैं ?
‘दीदी, भारतीय क्रिकेट में एक से बढ़कर एक महान क्रिकेटर आये हैं, आगे भी आते रहेंगे, तो फिर राहुल द्रविड़ को ही ‘द वाल’ का नाम क्यों दिया गया?’
‘चूंकि जितनी देर तक वह पिच पर दीवार बनकर खड़े रहे, विशेषकर टेस्ट क्रिकेट में, उतनी देर तक कोई भी भारत या किसी अन्य देश का खिलाड़ी पिच पर नहीं रुका है।’
‘सचिन तेंदुलकर भी नहीं? उन्होंने तो राहुल द्रविड़ से अधिक टेस्ट खेले हैं।’
‘जी। सचिन तेंदुलकर भी नहीं, हालांकि उन्होंने 200 और राहुल द्रविड़ ने 164 टेस्ट खेले।’
‘यह कैसे हो सकता है?’
‘दरअसल, राहुल द्रविड़ ने टेस्ट क्रिकेट में अपनी 286 पारियों में पिच पर रिकॉर्ड 44,152 मिनट गुज़ारे, जबकि तेंदुलकर ने अपनी 329 पारियों में 41,304 मिनट पिच पर बिताये।’
‘इससे तो यह संकेत भी मिलता है कि राहुल ने शतकीय साझेदारी भी अधिक की होंगी।’
‘तुम्हारा अंदाज़ा एक दम सही है। राहुल की अपने पार्टनरों के साथ 100 या उससे अधिक रनों की साझेदारी रिकॉर्ड 88 हैं, जबकि तेंदुलकर की 86 हैं। दिलचस्प बात यह है कि एक जोड़ी के रूप में द्रविड़ व तेंदुलकर की 20 शतकीय साझेदारी हैं, जोकि किसी भी जोड़ी के लिए सर्वाधिक हैं।’
‘कोई और रिकॉर्ड जिसमें द्रविड़ का प्रदर्शन तेंदुलकर से बेहतर हो?’
‘फिलहाल, एक रिकॉर्ड और याद आ रहा है।’
‘वह क्या है?’
‘टेस्ट क्रिकेट में जितनी गेंदों का सामना द्रविड़ ने किया है उतना किसी अन्य बैटर ने नहीं किया। द्रविड़ ने 31,258 गेंदों का सामना किया और उनके बाद तेंदुलकर आते हैं जिन्होंने 29,437 गेंदों का सामना किया।’
‘वैसे द्रविड़ का टेस्ट डाटा क्या है?’
‘उन्होंने 164 टेस्ट खेले। 52.31 की औसत से 13,288 रन बनाये, जिनमें 36 शतक और 63 अर्धशतक हैं। उनका सर्वाधिक स्कोर 270 रन रहा।’
‘द्रविड़ का ओडीआई डाटा क्या है?’
‘344 ओडीआई में 39.16 की औसत से 10,889 रन, जिनमें 12 शतक व 83 अर्धशतक और 153 रन सर्वश्रेष्ठ स्कोर रहा है।’ -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर

