हम तो डूबे सनम तुम्हें भी ले डूबेंगे!
तो बात रनियापुर में बिजली की कटौती को लेकर हो रही थी। रनियापुर में सप्ताह भर से बिजली नहीं है। लिहाजा रनियापुर के लोगों को धनियापुर के लोगों का सुख देखा नहीं जा रहा था। रनियापुर वाले अंधेरे में मरें। और धनियापुर वाले रौशनी में रहें। पंखा-कूलर, ए.सी. चलाएं! लिहाजा रनियापुर वालों के कहने पर धनियापुर की बिजली काट दी गई।
अब रनियापुर वालों की खुशी का ठिकाना ना रहा। तुम भी पसीने में सनम हम भी पसीने में।
उसी समय की बात है। हमारे यहां एक टुच्चे किस्म के नेता जी थे। नाम था उनका टुच्चे लाल जी। बिजली समस्या से परेशान नेताजी बमक गए। कारण की रनियापुर में बिजली नहीं है। वो भी सप्ताह भर से। लिहाजा धनियापुर में बिजली कैसे हो सकती है। प्रभाव जमाने के लिए उन्होंने धनियापुर की बिजली भी कटवा दी। इसको कहते हैं, नेतागिरी। इसको कहते हैं पहुंच। इसको कहते हैं, ताकत। यही असली नेताजी की पहचान है। पानी में रहकर मगर से बैर। जिस तरह से एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं। जिस तरह से जंगल का राजा शेर ही हो सकता है। उसी प्रकार रनियापुर में एक ही नेताजी हो सकतें हैं। हमारे टुच्चे लाल जी। लिहाजा नेताजी को अपनी राजनीति चमकाने का ये बड़ा ही सुयोग्य अवसर मिला था। और वो अपनी राजनीति को चमका-चमका कर पैना करने लगे। प्रांत में स्थितियां प्रतिकूल हैं। ये जो छुटभैया नेताजी हैं। प्रांत में इनकी ही सरकार है। तो ये जो नेताजी हैं। इनकी अपनी परेशानी है। नेताजी होने के बावजूद बिजली विभाग के अधिकारी नेताजी की नहीं सुन रहें हैं। तब सोचिए भला प्रजा का क्या हाल होता होगा। जहां प्रांत में नेताजी जी और बिजली विभाग मस्त हैं। वहीं जनता पस्त है। जनता अंधेरे से लड़ रही है। और राज्य के अधिकारी कर्मचारी नीरो की तरह वंशी बजा रहे हैं। तो बात नेताजी के स्वभाव की हो रही है। वैसे तो नेताजी छुटभैया किस्म के नेताजी हैं लेकिन उन्हें हम लोग प्यार से टुच्चेलाल जी भी कहते हैं।
तमाम तरह की कमियों के बावजूद भी नेताजी, नेताजी हैं। उनकी सरकार है। लेकिन प्रांत के कस्बे में अंधेरा है और टुच्चे लाल अपनी पीठ ठोंकने में लगे हैं। नियम से अगर देखा जाए तो टुच्चे लाल जी को डूब कर मर जाना चाहिए। खासकर तब जब उनकी ही सरकार है। और उनके ही बिजली विभाग में भ्रष्टाचार है। कोई ऐरा-गैरा नत्थू-खैरा सरकार के प्रतिनिधि की बात नहीं सुन रहा है।
टुच्चे लाल जी को अपनी नेतागिरी चमकानी है। कल को कोई वार्ड-मुखिया का कहीं चुनाव हो। तो सबसे पहले उनको ही उस क्षेत्र से टिकट मिलेगा। ऐसा नेताजी को पूर्ण विश्वास है। अब नेताजी हैं टुच्चे लाल तो उनको अपना गली-मोहल्ला, गांव सब देखना है। पहले वो गांव-गली मोहल्ले के हैं। फिर वो इस राज्य के हैं। पहले वो अपने कुनबे को देखेंगे। फिर सरकार को देखेंगे। तमाम कमियों के बावजूद वो अपनी और बिजली महकमे की पीठ थपथपाते हैं। अब वो साफ-साफ कह भी तो नहीं सकते कि बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उनकी नहीं सुनते। सरकार और कर्मचारियों में रार है!
-मेघदूत मार्केट फुसरो,
बोकारो झारखंड, पिन-829144



