शिया-सुन्नी एकता : अभी नहीं तो कभी नहीं

ईरान के मुख्य न्यायाधीश अयातुल्लाह गुलाम-हुसैन मोहसिनी-अजेई ने पिछले दिनों भारत का तीन दिवसीय आधिकारिक दौरा किया। वैसे तो उनकी यह यात्रा मुख्य रूप से ब्रिक्स मुख्य न्यायाधीश मंच के नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय न्यायिक शिखर सम्मेलन को लेकर थी, परन्तु इसके अतिरिक्त न्यायाधीश अयातुल्लाह अजेई ने दिल्ली की जामा मस्जिद में शाही इमाम मौलाना सैयद शाबान बुखारी की इमामत में आम नमाज़ियों के साथ जुमे की नमाज़ अदा की। गोया, जामा मस्जिद में शिया सुन्नी की संयुक्त जमाअत का दृश्य देखने को मिला। इस मस्जिद में आम दिनों में या शुक्रवार को भी दुनिया भर से आने वाले शिया पर्यटक, राजनयिक और प्रतिनिधिमंडल बिना किसी रोक-टोक के सुन्नी इमाम के पीछे या उनके साथ नमाज़ अदा करते रहते हैं। सुन्नी मुस्लिमों ने भी कश्मीरी गेट स्थित शिया मस्जिद में आकर शिया इमाम के पीछे नमाज़ अदा की थी। इससे पहले भी भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के विशेष प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही भारत के विभिन्न राज्यों में होने वाले शिया-सुन्नी एकता सम्मेलनों और धार्मिक कार्यक्रमों में ईरान के प्रतिनिधि के रूप में शामिल होते रहे हैं ताकि मुस्लिम समुदायों के बीच भाईचारे को बढ़ावा दिया जा सके। इस दौरान हकीम इलाही ने भी अनेक स्थानों पर शिया-सुन्नी संयुक्त जमाअत में एक साथ नमाज़ अदा की। कहा जा सकता है कि भारत जैसे विश्व की तीसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश में ईरान इस मुस्लिम जगत एकता मुहिम को तेज़ी देकर पूरे विश्व की मुस्लिम एकता का आह्वान कर रहा है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैयद मुज्तबा खामेनेई ने पिछले दिनों पैगम्बर मुहम्मद के जन्मदिन पर तेहरान में हुये एक धार्मिक सम्मेलन में मुस्लिम देशों को एक लिखित संदेश भेजा था। इस संदेश में उन्होंने वैश्विक स्तर पर मुस्लिम एकजुटता की पुरज़ोर वकालत की थी। उन्होंने अपनी इस अपील में पश्चिम एशिया और विशेष रूप से फारस की खाड़ी के मुस्लिम शासकों से सीधा आग्रह किया कि वे अपने ‘असली दुश्मन को पहचानें, उसकी योजनाओं को समझें और मिलकर उसका मुकाबला करें।’ खामेनेई ने अमरीका और इज़राइल को पूरी मुस्लिम उम्माह का ‘पक्का और साझा दुश्मन’ करार दिया। उन्होंने यह भी आगाह किया कि इस्लाम के दुश्मन मुसलमानों की सामूहिक ताकत को कमज़ोर करने के लिए उनके बीच नस्लीय, सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और भौगोलिक अंतरों का फायदा उठाकर फूट डालना चाहते हैं। अपने संदेश में उन्होंने कठोर लहजे में कहा, ‘कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी पद पर हो, यदि वह ऐसा कुछ करता है जिससे मुसलमानों के बीच दरार पैदा हो या इस्लामी समाज में संघर्ष बढ़े—चाहे वह जानबूझकर कर रहा हो या अनजाने में, वह वास्तव में इस्लाम के दुश्मनों के एजेंडे को ही बढ़ावा दे रहा है।’ 
शिया-सुन्नी संयुक्त नमाज़ को लेकर कुछ विश्व स्तरीय जमाअतों का ज़िक्र करना यहां ज़रूरी है। दुनिया भर में शिया और सुन्नी समुदायों के बीच भाईचारा बढ़ाने, सांप्रदायिक सौहार्द स्थापित करने और आतंकवाद व चरमपंथ का विरोध करने के लिए कई देशों में संयुक्त नमाज़ के ऐतिहासिक आयोजन किए जाते हैं व किये गए हैं। इनमें अज़रबाईजान में बाकू स्थित हैदर मस्जिद को दुनिया भर में शिया-सुन्नी एकता के सबसे बड़े प्रतीक के रूप में जाना जाता है। यहां हर शुक्रवार को शिया और सुन्नी मुसलमान एक साथ, एक ही पंक्ति में खड़े होकर नमाज़ अदा करते हैं। यहां एक सप्ताह नमाज़ की इमामत सुन्नी इमाम करते हैं और अगले सप्ताह शिया इमाम। कुवैत में 2015 में एक शिया मस्जिद (इमाम सादिक मस्जिद) पर हुए आत्मघाती आतंकवादी हमले के बाद देश में एकता दिखाने के लिए कुवैत की सबसे बड़ी सुन्नी इबादतगाह ग्रैंड मस्जिद में एक ऐतिहासिक संयुक्त नमाज़ का आयोजन किया गया था। इसी तरह बहरीन में भी आली ग्रैंड मस्जिद और दिराज़ की मस्जिदों में खाड़ी क्षेत्र में तनाव को कम करने के लिए संयुक्त नमाज़ की मुहिम चलाई गई। ईरान के इतने प्रयासों के बाद भी यदि शिया-सुन्नी एकता अभी नहीं हुई तो शायद कभी नहीं होगी।
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