ट्रम्प की मनमानियां
अमरीका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन की ओर से विगत दिवस नस्ली भेदभाव को प्रकट करता जो पोस्टर जारी किया गया था, उसकी प्रत्येक ओर से कड़ी आलोचना हुई है और अमरीका में भी इस पर बड़ी प्रतिक्रिया हुई है। गृह सुरक्षा विभाग की ओर से जारी इस पोस्टर में एक सिख और एक रक्षा कर्मचारी की तस्वीरें आमने-सामने लगा कर यह लिखा गया था, ‘हमारी सड़कों से दूर हो जाओ, आपको गाड़ी चलानी नहीं आती।’ विगत अवधि में कुछ सिख ड्राइवरों की गाड़ियों से दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें कुछ व्यक्ति मारे गए थे। इनकी व्यापक स्तर पर चर्चा हुई थी और उस समय भी सिख ड्राइवरों को निशाना बनाया गया था। अमरीका में जहां तक ट्रकों और अन्य गाड़ियों से होती दुर्घटनाओं का संबंध है, यह सिर्फ सिखों या पंजाबियों की गाड़ियों से नहीं होतीं, अपितु इससे भी कहीं अधिक वहां ड्राइवरी का काम कर रहे अलग-अलग भाईचारों के लोगों के ट्रकों के कारण भी ऐसा घटित होता रहा है। चाहे वहां सड़क यातायात के लिए कड़े कानून बने हुए हैं परन्तु इसके बावजूद भी अक्सर होती दुर्घटनाओं को रोका नहीं जा सकता।
ऐसे पोस्टर से प्रतीत होता है जैसे इसमें एक समुदाय के लोगों को ही निशाना बनाया गया है। इस समय अमरीका में लगभग 2 लाख भारतीय ड्राइवर हैं। इसके अतिरिक्त अमरीका के ड्राइवरों के साथ-साथ अन्य देशों और समुदायों के ड्राइवर भी वहां लाखों की संख्या में हैं। जारी किए गए पोस्टर को प्रत्येक पक्ष द्वारा की गई कड़ी आलोचना के बाद हटा दिया गया है, परन्तु इससे ट्रम्प प्रशासन की ओर से अपने कामकाज में दिखाई जा रही ़गैर-ज़िम्मेदारी का अहसास ज़रूर होता है। उदाहरण के रूप में अमरीका में अधिक स्रोतों के होते हुए विश्व भर से ज़रूरतमंद लोग किसी न किसी तरह अपना कामकाज करने के लिए वहां दाखिल होते हैं। उनमें बहुत से ़गैर-कानूनी तरीके से ऐसा करते हैं। समय-समय पर अमरीकी प्रशासन द्वारा उन पर कार्रवाई भी की जाती है और उन्हें अपने मूल देशों में वापस भी भेजा जाता रहा है, परन्तु ट्रम्प ने जिस तरह कुर्सी सम्भालते ही अलग-अलग देशों के ़गैर-कानूनी ढंग से दाखिल हुए व्यक्तियों को बेड़ियां लगाकर और सैन्य विमानों में भर-भर कर उनके देशों में वापस भेजा गया, यह उन व्यक्तियों के साथ-साथ संबंधित देशों को भी सरेआम अपमानित करने वाली बात थी। भारत से संबंधित इन ़गैर-कानूनी प्रवासियों को भी बेड़ियों में जकड़ कर सैन्य विमानों में फेंक कर लम्बे सफर के दौरान उनके प्रति अमानवीय व्यवहार अपनाकर जैसे वापस भेजा गया, वह बेहद शर्मनाक था। भारत सरकार ने भी सरेआम किए इस अपमान के प्रति चुप्पी धारण किए रखी और विभिन्न तरीकों से अमरीकी राष्ट्रपति का गुणगान करना जारी रखा।
आज अपनी ऐसी मनमानी की कार्रवाइयों के कारण ट्रम्प विश्व भर की नज़रों में बड़ी आलोचना का केन्द्र बिन्दू बना दिखाई देता है। अमरीका में उनकी मनमानी की कार्रवाइयों के कारण उनकी लोकप्रियता का ग्राफ बुरी तरह नीचे गिर रहा है। आगामी तीन नवम्बर को वहां मध्यकालीन चुनाव होने जा रहे हैं। यह चुनाव वहां की कांग्रेस के दोनों सदनों प्रतिनिधि सभा (हाऊस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव) और सेनेट के लिए हो रहे हैं। चाहे राष्ट्रपति स्वयं इन चुनावों में भाग नहीं ले रहे परन्तु यदि इन दोनों सदनों में उनकी कम होती लोकप्रियता के कारण उनकी रिपब्लिकन पार्टी की हार होती है, तो ट्रम्प की स्थिति पूरी तरह डावांडोल हो जाएगी। आज उनकी नीतियों के कारण अमरीका में महंगाई बढ़ रही है। रोज़गार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं। ईरान के साथ स्वयं शुरू किए युद्ध के कारण उनको निराशा का मुंह देखना पड़ रहा है, उनकी ऐसी मनमानी कार्रवाइयों के कारण उनकी अपनी पार्टी के बहुत से प्रतिनिधि ही उनके खिलाफ हो चुके हैं। अपनी हार को महसूस करते हुए ट्रम्प ने एक नया शिगूफा छोड़ा है। उन्होंने यह घोषणा की है कि यदि मध्यकालीन चुनाव में उनकी रिपब्लिकन पार्टी जीत जाती है तो प्रत्येक मतदाता को 5000 डॉलर, जो भारतीय करंसी में 4.77 लाख रुपये बनते हैं, दिए जाएंगे। उन्होंने इस घोषणा को ‘ट्रम्प डिवीडैंड’ का नाम दिया है। यह पैसा कहां से आएगा, इसका भुगतान कैसे किया जाएगा, इस संबंध में उन्होंने कोई विवरण नहीं दिया परन्तु इस घोषणा से मात्र एक घंटे बाद ही उप-राष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा है कि यह डिवीडैंड अमीर लोगों को नहीं मिलेगा। वेंस ने यह भी कहा कि इसके भुगतान के लिए टैरिफ का इस्तेमाल किया जा सकता है। अमरीका में इस समय 23 करोड़ मतदाता हैं। इस तरह यह राशि 112 लाख करोड़ डॉलर बनती है। यह राशि विश्व के पौने दो सौ देशों की आर्थिकता से भी अधिक है और इसके लिए संसद से आर्थिक (फाइनांस) बिल भी पारित करवाना पड़ेगा।
ऐसे बयान से स्पष्ट ज़ाहिर होता है कि ट्रम्प बुरी तरह से बौखला गए हैं। अमरीका जैसे विश्व के शक्तिशाली देश के लिए निश्चय ही पैदा हुए ये हालात निराशाजनक कहे जा सकते हैं। आज ट्रम्प की नीतियों के कारण विश्व के अन्य छोटे-बड़े देशों को भी अपनी-अपनी नई आर्थिक नीतियां बनाने के लिए विवश होना पड़ रहा है। इसी कारण विभिन्न देशों की ओर से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अमरीकी डॉलर का कोई दूसरा विकल्प ढूंढने के लिए भी गहन-गम्भीर विचार-विमर्श किया जा रहा है, जो आगामी समय में अमरीका के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

