हम चुप रहेंगे तो साइबर ठग बढ़ेंगे

अपने वर्तमान समाज को देखते हुए एक बात कही जा सकती है कि हमारा समाज आधी नींद आधी जागृत अवस्था में है। जब जाग रहा होता है तब भी सचेत होने के बावजूद सक्रिय नहीं होता। सोच यह बनती चली जा रही है कि इससे क्या होगा। वह नुकसान उठा रहा है लेकिन भाग्य का सहारा लेकर चुप बैठ जाता है, जिसने उसको चोट पहुंचाई है, नुकसान किया है उसको गले से पकड़ने पकड़वाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा। जी हां, हम साइबर ठगों की बात कर रहे हैं। हज़ारों लोग परेशान हैं। प्रतिदिन हज़ारों साइबर ठगों के सन्देहास्पद फोन कॉल आते हैं या फिर संदेश या व्हाट्सएप लिंक भेजे जाते हैं। इनमें कुछ लोग तो कॉल कर देते हैं। संदेश छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं और ठगी से अपने आप को बचा लेते हैं। कुछ लोग फंस जाते हैं और कॉल या संदेश को वास्तविक मानकर डिटेल उपलब्ध करवा कर नुकसान उठा बैठते हैं, परन्तु एक अनुमान के तहत पांच प्रतिशत से भी कम लोग ठगी की टेढ़ी चाल की शिकायत दर्ज करवा पाते हैं। कारण एक तो सोचा जाता है कि किसके पास इतना समय है कि शिकायत करवाने जाए। दूसरे संस्थाओं पर इतना भरोसा नहीं है कि शिकायत पर कोई सुनवाई होगी या नहीं। नौकरशाही की सुस्ती, बेपरवाही, उदासीनता या अधिकारियों का शिकायकर्ता के साथ रौब वाला रवैया और इसके प्रचलित किस्से शिकायतकर्ता के पैरों को आगे बढ़ने से रोक देते हैं। जिसका नतीजा पूरे समाज को भुगतना पड़ता है। साइबर ठगों के हौसले बुलंद होते रहते हैं और वे अगला शिकार खोजने में जुट जाते हैं। नए-नए शिकार बनते रहते हैं।
अपराधी पकड़े न जाने पर उत्साहित रहते हैं। नागरिकों का चुप रह जाना उन्हें उत्साहित करता है और पता तब चलता है जब आप ही का भाई, भतीजा, मित्र या चाचा-ताया साइबर ठग का शिकार बन गया। अगर अधिक लोगों ने शिकायत दर्ज करवाई होती तो साइबर ठगों का जाल पहले ही कमज़ोर किया जा सकता था। एक तो जांच अधिकारियों पर  दबाव बढ़ता, दूसरे साइबर ठग के कदम मज़बूत न रहते।
वे भोले मित्र जी यह समझते हैं कि साइबर ठग की शिकायत दर्ज करवाने के लिए थाने के चक्कर लगाने पड़ेंगे तो किसी भ्रम में हैं। दूरसंचार विभाग (डी.ओ.टी.) ने एक सरल विकसित एप जारी की है जिसे ‘संचार साथी’ नाम दिया गया है। इस एप्लिकेशन द्वारा ‘संचार साथी’ के ज़रिये कोई भी नागरिक घर बैठे किसी संदिग्ध मोबाइल नम्बर की शिकायत दर्ज करवा सकता है। कुछ ही मिनटों में यह प्रक्रिया साइबर ठग के सिम कार्ड और ज़रूरी लगने पर उसके मोबाइल हैंडसैट को भी ब्लाक कर सकती है। ऐसे में हम अपना नागरिक कर्त्तव्य का ठीक से पालन कर सकते हैं और बिना कोई ज्यादा कष्ट उठाये, प्रतिदिन समाचार पत्रों में चुपचाप ठगे जाने के जो समाचार मिलते रहते हैं उन पर रोक लग सकती है। साइबर ठग आवाज़ बदल कर आपके बेटे, भाई को कष्ट में फंसा दिखाकर मनमानी राशि ऐंठ लेते हैं। मर्म पर चोट जब पहुंचती है  तो हमारा दिमाग एकतरफा सोचने लगता है और बड़ी से बड़ी राशि देने को तैयार हो जाता है। जो हमने कई बरसों की मेहनत से जमा की होती है। 

#हम चुप रहेंगे तो साइबर ठग बढ़ेंगे