नशे के विरुद्ध युद्ध

पंजाब में नशे का प्रचलन नया नहीं है। पिछले कुछ दशकों से फैलते आ रहे नशे और तरह-तरह के गैंगस्टरों के संगठनों ने प्रदेश को एक तरह से जकड़ रखा है। समय की सरकारों के लिए ये दोनों मुद्दे चुनौती बने रहे हैं। पिछले दशकों में दो बार कांग्रेस की सरकार बनी और तीन बार अकाली-भाजपा की सरकार सत्ता में आई। इन सरकारों के प्रमुखों ने सत्ता सम्भालते ही नशे के प्रचलन का पूरी तरह सफाया करने का वायदा किया परन्तु यह बड़ी सीमा तक अपने यत्नों में सफल नहीं हो सके। आम आदमी पार्टी की सरकार ने भी इस प्रचलन को मुख्य मुद्दा बनाए रखा। इस दिशा में बहुत से बड़े-छोटे कदम भी उठाए गए। मुख्यमंत्री ने पंजाब को नशा मुक्त करने तक चैन से न बैठने के वायदे भी किए। ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ चलाए गए सख्त अभियान की समय-समय पर समीक्षा भी की जाती रही और जिन स्थानों पर नशे का अधिक प्रभाव था, वहां भी लगातार पुलिस और प्रशासनिक दबाव बनाए रखा। प्रतिदिन सीमा के निकट करोड़ों रुपये की हेरोइन और तस्करों को गिरफ्तार करने के समाचार प्राप्त होते रहे। नि:संदेह सीमा पार से ड्रोन द्वारा नशीले पदार्थों को रोकने के लिए बड़े यत्न किए गए। सरकार द्वारा आज भी नशे की तस्करी रोकने के लिए सक्रियता जारी है। 
विगत दिवस मुख्यमंत्री और पुलिस प्रमुख ने एक प्रैस कान्फ्रैंस में यह बताया था कि गत अवधि में नशा तस्करों और गैंगस्टरों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाइयां की गई हैं। अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर पंजाब पुलिस और सीमा सुरक्षा बल लगातार नज़र रख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की सीमा से ड्रोन द्वारा पैकेटों में नशा आ रहा है, परन्तु इसके साथ ही उन्होंने गुजरात की बंदरगाह द्वारा देश के राज्यों तक पहुंच रही नशे की खेप को न रोक पाने के लिए केन्द्र सरकार को भी ज़िम्मेदार ठहराया। विगत दिवस गुलज़ार सिंह की मौत को लेकर विपक्षी पार्टियों ने ‘आप’ सरकार पर निशाना साधा है और सरकार के दावों को खोखला करार दिया है। इस संबंध में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने गुजरात और राजस्थान से आती खेप का भी ज़िक्र किया है और यह भी कहा है कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच पंजाब में अकाली-भाजपा सरकार के समय प्रदेश में नशे का व्यापक स्तर पर प्रसार हुआ था, जबकि अब सरकार तस्करों के विरुद्ध कड़ी और बड़ी कार्रवाइयां कर रही है। ड्रोन द्वारा नशे की तस्करी को रोकने के लिए सीमा पर एंटी ड्रोन सिस्टम भी स्थापित किए गए हैं। जहां सरकार द्वारा ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान चलाया जा रहा है, वहीं भाजपा ने यह आरोप लगाते हुए कि वह नशे की तस्करी और बिक्री रोकने में असफल रही है, सरकार के विरुद्ध जगह-जगह पर रोष प्रदर्शन करने शुरू कर दिए हैं।
पार्टी की ओर से इस संबंध में आगामी दिनों में बड़ी यात्राएं भी की जा रही हैं, जिसके जवाब में विगत दिवस ‘आप’ के संयोजक अरविन्द केजरीवाल ने यह कहा है कि भाजपा शासित राज्यों में यह प्रचलन अधिक फैला हुआ है। उन्होंने यह दावा भी किया कि पंजाब में ‘आप’ सरकार द्वारा एंटी ड्रोन प्रणाली लगा कर नशे की सीमांत सप्लाई को बड़ी सीमा तक रोका गया है। इस संबंध में अब केन्द्र सरकार के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने पंजाब में नशे के संबंध में कुछ गम्भीर पहलुओं की ओर इशारा किया है, जिनका मुकाबला पुख्ता योजनाबंदी से ही किया जा सकता है। इस संबंध में पेश किए गए पत्र में ब्यूरो के अधिकारियों ने कहा कि तस्करी का स्रोत, वित्तीय प्रबंध, आवागमन और फंड के नैटवर्क को तोड़ना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने यह दावा किया कि आगामी तीन वर्षों में इस प्रचलन पर बड़ी सीमा तक काबू पा लिया जाएगा। उन्होंने इसके विस्तार में जाते हुए कहा कि तस्करी की रोकथाम, युवाओं को नशे से दूर रखना और केन्द्र एवं प्रदेश एजेंसियों के बीच तालमेल बनाना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि 100 अंतर्राष्ट्रीय और अंतर्राज्यीय ड्रग नैटवर्कों  को जड़ से खत्म किया जाएगा। 100 भगौड़े अपराधियों को विदेशों से भारत लाने के लिए पूरा ज़ोर लगाया जाएगा। सरकारी सुरक्षा एजेंसियों और भारतीय तटरक्षक बलों में तालमेल बिठाया जाएगा। इसके साथ-साथ ऑनलाइन तस्करी और सिथैंटिक नशे के प्रचलन पर पूरी नज़र रखी जाएगी तथा ज़रूरी नशा विरोधी जागरुकता, उपचार और पुनर्वास संबंधी कड़े कदम उठाए जाएंगे। 
हम महसूस करते हैं कि इस गम्भीर समस्या पर किसी भी तरह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए, अपितु सरकारों सहित संबंधित पक्षों को आपसी सहयोग से इस बेहद जानलेवा और नकारात्मक प्रचलन को रोकने के लिए अपनी पूरी समर्था के साथ इसके खात्मे के लिए यत्नशील होने की ज़रूरत होगी। ऐसे क्रियान्वयन और भावनाओं से ही देश का और देश के युवाओं का भविष्य उज्ज्वल हो सकेगा।
 

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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