लोकसेवा के 25 वर्ष और पंजाब के नए भविष्य का संकल्प

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 76वां जन्मदिन एक ऐतिहासिक पड़ाव की पूर्व संध्या पर आया है। आगामी 7 अक्तूबर को वे संवैधानिक दायित्व निभाते हुए निरंतर लोकसेवा के 25 वर्ष पूरे करने जा रहे हैं। यह किसी नेता के लंबे कार्यकाल का ब्यौरा नहीं, बल्कि उस शासन एवं दूरदृष्टि को समझने का अवसर है जिसने सरकारी योजनाओं के मायने बदल दिए। योजनाओं को घोषणाओं तक सीमित न रखकर इनके लाभ को अंतिम लाभार्थी तक सुनिश्चित किया है। इन 25 सालों में उनका मूल सिद्धांत बिल्कुल स्पष्ट रहा है कि विकास तभी सार्थक है जब उसका सकारात्मक प्रभाव सामाजिक ढांचे में अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में दिखाई दे। परिणामस्वरुप सुशासन को कागजी कार्रवाई या दफ्तरों की प्रक्रियाओं तक सीमित रखने के बजाय दैनिक जीवन में सुविधा सम्मान और अवसर से जोड़ा गया। बैंक खातों से घरों में नल, धुआं रहित रसोई से अस्पताल में उपचार तक और डिजिटल भुगतान से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण तक इसी सोच ने सरकार और नागरिक के संबंध को मज़बूत किया है।
नीति से नागरिक तक : इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण अगस्त 2014 में शुरू हुई प्रधानमंत्री जन धन योजना है। मई 2026 तक, लगभग 59.21 करोड़ लाभार्थियों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है, जिनमें करीब 3.17 लाख करोड़ रुपये जमा हैं लेकिन इस योजना की असली कामयाबी सिर्फ खातों की संख्या से कहीं ज्यादा है। जन धन, आधार और मोबाइल की (जैम) तिकड़ी (ट्रिनिटी) ने बिचोलियों को हटा सरकारी मदद सीधे सही लाभार्थी के खाते में पहुंचाने की व्यवस्था की। इससे लाभार्थी सरकारी कृपा की प्रतीक्षा करने वाले की बजाय  अपने अधिकार का सीधा भागीदार बना। डिजिटल इंडिया ने इस प्रशासनिक परिवर्तन को मज़बूत किया। यूपीआई लेन-देन 2018-19 में 535 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 18,587 करोड़ तक पहुंचाना तकनीकी सफलता से कहीं अधिक है। यह छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले, किसान, विद्यार्थी और सामान्य परिवारों की आधुनिक अर्थव्यवस्था के भागीदार बनाने की कहानी है। डिजिलॉकर, ऑनलाइन सेवाओं और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण ने समय बचाकर, पारदर्शिता बढ़ाई और सरकार तक पहुंच सरल बनाई।
सुविधा के साथ सम्मान : सुशासन की वास्तविक परीक्षा वहां होती है, जहां परिवारों की अनकही मुश्किलों को समझ नीतियां बनाई जायें। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 12 करोड़ से अधिक घरेलू शौचालयों के निर्माण ने स्वच्छता के साथ महिलाओं की सुरक्षा और आत्मसम्मान को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10.57 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शनों ने करोड़ों महिलाओं को चूल्हों के धुएं से होने वाले स्वास्थ्य खतरों से बचाया। जल जीवन मिशन ने ग्रामीण घरों तक नल से जल पहुंचाकर महिलाओं और बेटियों का वह समय बचाया, जो पहले दूर से पानी लाने में व्यतीत होता था।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना ने सुनिश्चित किया कि किसी गंभीर बीमारी से कोई गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार आर्थिक संकट में न फंसे। फरवरी 2026 तक 43.52 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके थे और 11.69 करोड़ से अधिक अस्पताल-भर्ती अधिकृत हो चुकी थीं। 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक तक योजना का विस्तार कल्याणकारी शासन की संवेदना का प्रतीक है।  
अन्न दाता से उद्यमी तक : भारत की विकास-यात्रा तभी संपूर्ण हो सकती है, जब खेत में अन्न उपजाने वाले किसान, पीढ़ियों से कौशल सहेजने वाले कारीगर और अपने परिश्रम से रोज़गार पैदा करने वाले छोटे उद्यमी सशक्त हों। पीएम-किसान की 23 किस्तों के माध्यम से 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के खातों में पहुंच चुकी है और 23वीं किस्त का लाभ 9.49 करोड़ से अधिक किसानों को मिला है। यह सहायता समय पर उपलब्ध बीज, खाद और अन्य कृषि आवश्यकताओं का विश्वसनीय आधार बनी है।
मुद्रा योजना ने बिना बड़ी गारंटी के छोटे व्यवसायों के लिए संस्थागत ऋण का रास्ता खोला। पीएम विश्वकर्मा योजना ने पारम्परिक कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, ऋण और बाजार से जोड़कर उनके कौशल को नई आर्थिक शक्ति दी। नौकरी ढूंढने वालों की बजाय युवाओं को रोज़गार सृजित करने वाला उद्यमी बनने का अवसर दिया।  
विकास की गति और आत्मविश्वास : सड़कों, रेलवे, माल ढुलाई गलियारों, हवाई अड्डों और मेट्रो नेटवर्क का तेज़ विस्तार कंक्रीट और स्टील निर्माण से कहीं अधिक किसानों की उपज को मंडी, बंदरगाह, युवा को रोज़गार और छोटे शहर को बड़े आर्थिक अवसरों से जोड़ने की कड़ी है। आधुनिक आधारभूत संरचना के साथ भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन जैसी पहलों के माध्यम से विश्व मंच पर भी जिम्मेदार और समाधान-केंद्रित नेतृत्व प्रस्तुत किया है।
इस पच्चीस वर्षीय यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक भारत द्वारा अपनी क्षमताओं पर विश्वास करना है। ‘विकसित भारत 2047’ अब केवल सरकारी लक्ष्य नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी सामर्थ्य देश की प्रगति से जोड़ने का आह्वान है। अगले चरण में रोज़गार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, क्षेत्रीय संतुलन, पर्यावरणीय स्थिरता और जवाबदेही को और मजबूत करना इसी की स्वाभाविक प्राथमिकताएं हैं।
अब पंजाब के लिए अवसर : पंजाब के लिए इस 25 वर्षीय शासन-यात्रा का और भी महत्व है। पंजाब की धरती ने देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया, सीमाओं की रक्षा के लिए असाधारण बलिदान दिए और अपने परिश्रम तथा उद्यमशीलता से विश्व भर में पहचान बनाई। किन्तु आज पंजाब कृषि आय में ठहराव, भूजल संकट, नशे, बेरोज़गारी और युवाओं के बढ़ते पलायन जैसी गंभीर चुनौतियों से भी जूझ रहा है। इनका समाधान केवल नारों या अल्पकालिक घोषणाओं में नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सोच, ईमानदार क्रियान्वयन और केन्द्र व राज्य के सार्थक समन्वय में है। पंजाब को अपनी कृषि को केवल अनाज उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय फसल विविधीकरण, कृषि-प्रसंस्करण, खाद्य प्रौद्योगिकी और वैश्विक बाज़ार से जोड़ना होगा। हमारे औद्योगिक शहरों को आधुनिक लॉजिस्टिक्स, अनुसंधान और नई तकनीक की आवश्यकता है। युवाओं के लिए कौशल, स्टार्टअप, खेल और स्थानीय रोज़गार के ऐसे अवसर तैयार करने होंगे कि उन्हें अपना भविष्य केवल पंजाब से बाहर ही दिखाई न दे। इसी प्रकार पानी की हर बूंद बचाने के संकल्प को सरकारी कार्यक्रम से ऊपर उठाकर पंजाब का साझा जन-आंदोलन बनाना होगा।
पंजाब के लोगों के बीच निरंतर रहते हुए मैं अनुभव करता हूं कि हमारे लोग बदलाव के लिए तैयार हैं। उन्हें एक विश्वसनीय दिशा, ईमानदार नेतृत्व और परिणाम देने वाली कार्य-संस्कृति की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकसेवा के 25 वर्ष यह भरोसा देते हैं कि बड़ी चुनौतियों का सामना स्पष्ट नीयत, सही नीति और निरंतर क्रियान्वयन से किया जा सकता है। पंजाब अपनी विरासत की शक्ति, युवाओं की ऊर्जा और उद्यमशील स्वभाव के बल पर विकसित भारत का नेतृत्व करने की पूरी क्षमता रखता है। अब आवश्यकता इस क्षमता को संकल्प, सहयोग और सुशासन के माध्यम से परिणामों में बदलने की है।

-सांसद राज्यसभा

-satnam.sandhu@sansad.nic.in

 

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