गम्भीर बिजली संकट

पिछले कुछ दिनों से पंजाब भर में बिजली की सप्लाई को लेकर बड़ी हलचल मच रही है। धान की फसल के कारण किसान पानी की कमी को लेकर चिंतित हैं। उद्योगपति बड़ी परेशानी में घिरे दिखाई देते रहे हैं। घरों, कार्यालयों और अन्य संस्थानों में भी भीषण गर्मी में अघोषित बड़े-छोटे बिजली कटों से परेशान नज़र आते रहे हैं। कुछ सरकारी और निजी क्षेत्र के बिजली प्लांटों के कई यूनिटों में नुक्स पैदा होने के कारण भी बिजली का उत्पादन कम रहा। इस बार बिजली की मांग बेहद बढ़ जाने के कारण विभाग की चिंता बढ़ गई। अब तक एक बड़ी चिंताजनक बात यह भी रही है कि थर्मल प्लांटों में कोयले के स्टॉक बहुत कम हो गए हैं।
पंजाब सरकार तो यह दावा करती रही है कि उसके प्लांटों में कोयले की कमी नहीं आई, परन्तु निजी प्लांटों संबंधी इस कमी के समाचारों ने चिंता ज़रूर पैदा की है। आम लोग भी इस कमी के कारण परेशान हुए हैं परन्तु किसानों और उद्योगपतियों पर इसका बड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कुछ दिन पहले बिजली निगम के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरैक्टर डा. बसंत गर्ग ने यह दावा किया था कि आए इस बिजली संकट को दूर कर लिया गया है। उन सभी को निर्विघ्न बिजली देने का भी आश्वासन दिलाया था। इसी संबंध में बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध की ओर से भी लगातार स्थिति के सुधरने संबंधी आश्वासन दिलाया जा रहा है। उन्होंने यह बात ज़रूर स्वीकार की कि बिजली की मांग का आंकड़ा बेहद बढ़ जाने के कारण मुश्किलें ज़रूर पेश आईं, परन्तु अब यह हल कर लिया गया है। बिजली विभाग को अपने स्रोतों से 5859 मैगावाट का उत्पादन मिल रहा है। इसके बावजूद निगम को 11000 मैगावाट से अधिक बिजली बाहर से खरीदनी पड़ रही है। बिजली मंत्री ने अब यह दावा किया है कि रिहायशी, व्यापारिक, औद्योगिक और कृषि क्षेत्र को 24 घंटे निर्विघ्न बिजली सप्लाई बहाल रखी गई है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले भी उन्होंने स्पष्ट किया था कि अधिक संकट केन्द्र सरकार द्वारा की गई कोयले की कटौती के कारण और पंजाब का बनता बिजली का हिस्सा न देने के कारण पैदा हुआ था। 
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश द्वारा अब रिकार्ड 17,423 मैगावाट की मांग पूरी की जा रही है। सभी 10 थर्मल यूनिट पूरी समर्था से काम कर रहे हैं। अब यह देखना होगा कि आगामी दिनों में सरकार अपने किए वायदों और प्रकट की गई वचनबद्धता पर कितने समय तक स्थिर रह सकती है। बिजली आज समूचे जीवन का केन्द्र बनी हुई है। इस क्षेत्र में अच्छी उपलब्धि ही जन-जीवन के लिए संतुष्टि का कारण बनती है।  प्रशासन की यह बड़ी ज़िम्मेदारी बन जाती है कि वह अपनी ओर से  प्रत्येक यत्न करके इस अहम क्षेत्र की कारगुज़ारी को सन्तोषजनक बनाने के लिए पूरी तरह यत्नशील रहे।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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