आज समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है विश्व शांति
आज विश्व शांति दिवस पर विशेष
आज विश्व भर में चल रहे युद्धों, आतंकवादी गतिविधियों और हिंसक संघर्षों ने मानव जीवन तथा अर्थ-व्यवस्था को जिस तरह भारी नुकसान पहुंचाया है, वह अत्यंत चिंताजनक और निंदनीय है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में होने वाली जातीय अथवा नस्लीय हिंसा की घटनाओं में बेगुनाह लोगों का मारा जाना भी अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। बड़े और भयावह संकटों से गुज़र रही इस दुनिया को आज शांति की बेहद आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 21 सितम्बर को ‘विश्व शांति दिवस’ मनाया जाता है। विश्व शांति दिवस का मूल उद्देश्य युद्धों, आतंकवाद, हिंसा और संघर्षों से ग्रस्त दुनिया में शांति की स्थापना के लिए आवाज़ बुलंद करना तथा इसके लिए प्रयासों को तेज़ करना है। विश्व शांति दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 1981 में हुई थी। हालांकि वर्ष 2001 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया कि यह दिवस पूरी तरह अहिंसा और युद्धविराम के लिए समर्पित होगा। विश्व में शांति स्थापित करने के प्रतीक के रूप में संयुक्त राष्ट्र ने घोषणा की कि इस दिन कम से कम 24 घंटे तक दुनिया के किसी भी हिस्से में युद्ध अथवा हिंसा से संबंधित कोई गतिविधि नहीं होनी चाहिए और संपूर्ण विश्व में शांति बनाए रखने का प्रयास किया जाना चाहिए।
विश्व शांति के समर्थकों का मानना है कि शांति स्थापित करने का अर्थ केवल कुछ समय के लिए हथियार डाल देना नहीं है। वास्तविक शांति तभी संभव है जब दुनिया के प्रत्येक नागरिक के मन में शांति की भावना का दीप प्रज्वलित हो। ऐसी सोच विकसित करनी होगी कि विश्व शांति ही वह आधार है जो विभिन्न समाजों, देशों, संस्कृतियों और सभ्यताओं को एक-दूसरे के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का अवसर प्रदान करती है। इसके साथ ही हमें ऐसे विश्व के निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा जिसमें रंग, नस्ल, जाति, धर्म अथवा सीमाओं के आधार पर नफरत और हिंसा के लिए कोई स्थान न हो। यह अत्यंत दुखद है कि आज भी दुनिया में जारी युद्धों और सशस्त्र संघर्षों के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही है। रूस-यूक्रेन तथा ईरान-अमरीका के बीच युद्ध के साथ-साथ दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के कई देशों में हिंसक संघर्ष जारी रहे हैं। इन संघर्षों का सबसे अधिक खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है।
संयुक्त राष्ट्र के उच्च अधिकारी आंद्रे अज़ूले के अनुसार आज के समय में नफरत, ईर्ष्या, पक्षपात और तनाव से भरी इस दुनिया में एकजुट होकर रहना पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है। संयुक्त राष्ट्र और यूनेस्को विश्व में शांति स्थापित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि वे केवल शांति स्थापित करने की बात नहीं करते, बल्कि इस दिशा में निरन्तर प्रयास भी कर रहे हैं ताकि दुनिया का कल्याण और विकास सुनिश्चित हो सके। शांति के पक्षधर लोग किसी भी प्रकार के नस्लीय भाषण और हिंसात्मक गतिविधियों का कड़ा विरोध करते हैं तथा लोगों को हिंसा, नफरत और ईर्ष्या से मुक्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1982 में दुनिया के 97 देशों में विश्व शांति दिवस से संबंधित 478 बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को विश्व शांति तथा उससे मिलने वाले लाभों के प्रति जागरूक किया गया था। विश्व शांति दिवस की शुरुआत हर वर्ष संयुक्त राष्ट्र के न्यूयॉर्क स्थित मुख्यालय में स्थापित ‘शांति घंटी’ बजाकर की जाती है। यह भी एक रोचक तथ्य है कि इस विशाल घंटी को छोड़कर विश्व के अन्य देशों के बच्चों द्वारा दान किए गए सिक्कों को पिघलाकर तैयार किया गया था। जापान ने इसे उपहार के रूप में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय को भेंट किया था। इस घंटी पर अंकित संदेश है— ‘विश्व शांति की जय हो।’
संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2026 में मनाए जा रहे विश्व शांति दिवस की निर्धारित थीम है—‘हर दिन, हर जगह और हर व्यक्ति के लिए शांति में निवेश करें।’ यह थीम इस बात की ओर संकेत करती है कि यदि दुनिया के सभी लोग एक-दूसरे के धर्मों, नस्लों, जातियों, भाषाओं और संस्कृतियों की विविधता का सम्मान करते हुए सहिष्णु बनें तथा एक-दूसरे की प्रशंसा करना सीखें, तो दुनिया में शांति, प्रेम और एकता की स्थापना सहज रूप से हो सकती है। इस महान उद्देश्य के लिए संयुक्त राष्ट्र दुनिया भर के राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक, सेवाभाव वाले तथा शांति-समर्थक नेताओं से आगे आकर अपना योगदान देने की अपील करता है। विश्व शांति केवल सरकारों अथवा अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की ज़िम्मेदारी नहीं है, प्रत्येक नागरिक को भी इस दिशा में अपनी भूमिका निभानी होगी।
आइए, विश्व शांति दिवस के अवसर पर यह संकल्प लें कि अपने आसपास नफरत के बजाय प्रेम, हिंसा के बजाय संवाद और विभाजन के बजाय एकता को बढ़ावा देंगे।
-मो. 97816-46008



