भाखड़ा डैम के अस्तित्व, मज़बूती, अवधि और भविष्य का सवाल !
पिछले दिनों नेपाल में आई बाढ़ के बाद उत्तर भारत के सबसे ऊंचे बांध ‘भाखड़ा डैम’ की सुरक्षा और अवधि को लेकर चर्चा ज़ोरों पर रही। दावे किए जा रहे हैं कि अगर डैम की दीवार लगातार झुकती रही और टूटने का खतरा बन गया तो डैम का पानी उत्तर भारत के कई राज्यों में तबाही मचा देगा। कुछ समय पहले यह चर्चा थी कि भाखड़ा डैम की अवधि खत्म होने वाली है। इन सभी चर्चाओं और अफवाहों के कारण भय के बीच लोग भाखड़ा डैम अस्तित्व, मज़बूती, सुरक्षा और अवधि की वास्तविकता जानने के लिए उत्सुकता बढ़ी है।
डैम की योजना : सतलुज नदी पर पानी सम्भालने के लिए भाखड़ा डैम बनाने का विचार आज़ादी से पहले का है। नवम्बर 1944 में ब्रिटिश पंजाब की संघीय सरकार के वरिष्ठ मंत्री सर छोटू राम और बिलासपुर के राजा के बीच इस काम के लिए एक समझौता हुआ था। लेकिन 1948 के बाद इस प्रोजेक्ट को नए भारत की सिंचाई और बिजली की ज़रूरतों के अनुसार व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया गया। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 22 अक्तूबर, 1963 को भाखड़ा डैम देश को समर्पित करते हुए इसे ‘नए भारत का मंदिर’ कहा था। भाखड़ा डैम को बनाने में कुल लागत 245.28 करोड़ रुपये आई थी।
भाखड़ा डैम हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में सतलुज नदी पर शिवालिक पहाड़ियों की एक संकरी घाटी में बना एक कंक्रीट का सीधा ग्रेविटी डैम है, जो अपने वज़न से पानी को रोकता है। इस डैम पर 8 लाख टन सीमेंट, 1 लाख टन सरिया और 55 लाख घन गज़ कंक्रीट लगा है। डैम का प्रबंधन करने वाले भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) के मुताबिक डैम के पीछे पानी इकट्ठा करने के लिए 168.35 वर्ग किलोमीटर में बनी झील को ‘गोबिंद सागर’ कहा जाता है। डैम में ज़्यादा से ज़्यादा 1690 फुट तक पानी का भंडारण किया जा सकता है। डैम में पानी जमा करने की कुल समर्था लगभग 755.1 करोड़ क्यूबिक मीटर और जीवंत (इस्तेमाल करने योग्य) समर्था लगभग 600.7 करोड़ क्यूबिक मीटर बताई गई है। क्या भाखड़ा डैम की कोई निर्धारित ‘अवधि’ है? भाखड़ा डैम के बारे में पूछा जाने वाला यह सबसे गलत सवाल है। एक बड़े कंक्रीट के ग्रेविटी बांध की किसी सामान्य इमारत की तरह कोई 60 साल या 100 साल की अवधि नहीं होती। डैम की उपयोगी आयु इस बात पर निर्भर करती है कि कंक्रीट की ढांचागत हालत, नींव, पानी का रिसाव, ढांचागत विस्थापन, बाढ़-निकासी प्रणाली, गेट, निगरानी उपकरण, पानी जमा करने वाली झील में गाद और समूचे पानी को इकट्ठा करने वाले क्षेत्र की कारगुज़ारी कैसी रहती है।
दीवार में झुकाव की वास्तविकता : इंजीनियरों के अनुसार कोई भी ग्रेविटी डैम पानी के दबाव की वजह से थोड़ा आगे की ओर झुकता है और पानी का स्तर कम होने पर अपनी सामान्य स्थिति में आ जाता है, जो उसके ढांचे का हिस्सा है। सामान्य दबाव के लिए भाखड़ा डैम की दीवार का सही झुकाव 1.03 इंच है और भूकंप की स्थिति के लिए लगभग 1.53 इंच है। अगस्त 2026 में सोशल मीडिया पर अफवाह फैल गई थी कि डैम की दीवार 1.77 इंच झुक गई है। भारत सरकार की अधिकारित संस्था प्रैस सूचना ब्यूरो की फैक्ट चैक यूनिट ने 28 अगस्त, 2026 को उक्त दावे का खंडन करते हुए स्पष्ट किया था कि 27 अगस्त, 2026 को डैम का असली झुकाव सिर्फ 0.86 इंच था। हालांकि, 19 नवम्बर, 2025 को दीवार का अब तक का सबसे ज़्यादा झुकाव 1.1770 इंच हो गया था, जो जून 2026 में पानी का स्तर कम होने से 0.65 इंच तक आ गया था। भाखड़ा डैम के मुख्य इंजीनियर चरणप्रीत सिंह के अनुसार 9 सितम्बर, 2026 को यह झुकाव 0.89 इंच दर्ज किया गया था। बीबीएमबी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 30 वर्षों में यह हिलजुल 15 बार हुई है और इंजीनियरिंग के नज़रिए से किसी ढांचे में होने वाली हिलजुल ढांचागत विफलता का संकेत नहीं होती।
सुरक्षा प्रणाली की मज़बूती : उल्लेखनीय है कि भाखड़ा डैम की सुरक्षा सिर्फ उसके कंक्रीट ढांचे की मज़बूती पर निर्भर नहीं करती। इसके पीछे एक बहु-स्तरीय निगरानी और सुरक्षा प्रणाली काम करती है, जिसमें वैज्ञानिक निगरानी उपकरण, पानी के रिसाव की निगरानी, ढांचागत विस्थापन पर नज़र, भूकंप निगरानी, बाढ़ की भविष्यवाणी, बाढ़ निकासी प्रणाली का संचालन और आपातकीलन हालात के लिए योजनाबंदी शामिल है। केन्द्रीय जल आयोग और डैम रिहैबिलिटेशन एंड इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (ड्रिप) के तकनीकी दस्तावेज़ों के मुताबिक भाखड़ा के लिए भूकंप स्थिरता का विश्लेषण 1981 में आईआईटी रुड़की द्वारा द्विपक्षीय समीक्षा के ज़रिए किया गया था, जबकि 2016 में तीन-पक्षीय समीक्षा भी की गई थी। भाखड़ा में तेज़ भूकंप गति को दर्ज करने वाले यंत्र स्थापित हैं और भाखड़ा-नांगल प्रोजेक्ट के लिए अग्रिम चेतावनी प्रणाली लगी हुई है। भाखड़ा डैम की गोबिंद सागर झील में 27 अगस्त, 2026 को पानी का स्तर 1634.22 फुट था, जो पूरे जल स्तर से 45.78 फुट नीचे था।
गाद निकालने की ज़रूरत : डैम टूटने के बेवजह डर की बजाय ध्यान देने योग्य पक्ष भाखड़ा डैम की गोबिंद सागर झील में जमा गाद को निकालने के बारे में है।
तत्काल करने वाले कार्य : भारत में अब डैम सुरक्षा कानून और राष्ट्रीय डैम सुरक्षा अथॉरिटी मौजूद हैं। भाखड़ा और पोंग के लिए डैम रिहैबिलिटेशन एंड इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (ड्रिप) के तहत 230 करोड़ रुपये का काम चल रहा है। भाखड़ा डैम के अस्तित्व, सुरक्षा और भविष्य के लिए तीन काम ज़रूरी हैं—पहला, भाखड़ा डैम की गोबिंद सागर झील पिछले एक दशक से अपने न्यूनतम स्तर (लगभग 1462 फुट) तक नहीं पहुंची, यह ज़रूरी है ताकि दीवार पर दबाव थोड़ा कम हो और गाद के कुछ हिस्से तक पहुंचा जा सके। दूसरा, शीघ्रता से सभी आवश्यक कार्रवाइयां करके गाद निकाली जाए। तीसरा, सतलुज नदी के ऊपरी जलाशय क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई, अनावश्यक निर्माण और खुदाई पर रोक लगाई जाए। भाखड़ा ‘नए भारत का मंदिर’ तभी बना रहेगा, जब हम इसे एक स्मारक नहीं बल्कि अपनी जीवंत ज़िम्मेदारी समझेंगे।
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