न्यूज़ीलैंड में प्रकृति का हिस्सा होने का एहसास

अगर आप न्यूज़ीलैंड में हैं तो इस समय इस लेख को पढ़ने की बजाय आप कयाकिंग कर रहे होते या स्विमिंग या राफ्टिंग या सर्फिंग या बोटिंग या स्कूबा डाइविंग या माउंटेन बाइकिंग या रनिंग या .... ओह! न्यूज़ीलैंड ने मेरी आलसी आत्मा को आईना दिखा दिया और छवि ज्यादा अच्छी नहीं थी। मैं हमेशा से यह मानता था कि छुट्टी का अर्थ है देर से सो कर उठाना और पूरा दिन आलस भरे आराम में गुज़ारना, और शाम को डिनर के लिए निकल जाना लेकिन कीवियों के लिए इसका अर्थ है सवेरे जल्दी उठना और अपने मनपसंद स्पोर्ट्स में शामिल हो जाना। हर घर, जो मैंने देखा, में कैंपर वैन थी, और दिन के किसी भी समय लोगों का स्पीड बोट के साथ बीच की तरफ जाना सामान्य बात है। लोगों से मेरा आशय पुरुष, महिला, बच्चे और दादा-दादी व नाना-नानी है- आयु की कोई सीमा नहीं!
उत्तरी द्वीपों की टोपो वाटरफ्रंट झील पर मैं तो किनारे पर पैर लटकाए बैठा था कि मेरी पर्यटक आत्मा को पानी बस स्पर्श कर जाये, लेकिन मेरे पास का कीवी परिवार केवल स्पर्श से संतुष्ट नहीं था। इस परिवार का सिर्फ पांच वर्ष का एक बच्चा ही पानी में नहीं था; क्योंकि वह अपनी लाइफ जैकेट नहीं तलाश पा रहा था। अन्य तीन बच्चे, जिनकी आयु 12 वर्ष से अधिक न थी, स्कूबा डाइविंग, स्विमिंग व कयाकिंग कर रहे थे।  रोटोरुआ में भी एक दस वर्षीय बच्चे ने मुझे प्रवेश-स्तर लउगे कार राइड में पराजित कर दिया। लउगे एक छोटी चपटी नाव-नुमा कार होती है जिसमें न्यूनतम कंट्रोल्स होते हैं और इसे पहाड़ पर बने ट्रैक से नीचे ड्राइव करना होता है। पहाड़ के ऊपर आप केबल कार या गोंडोला से भी पहुंच सकते हैं। मैंने दोनों ऊपर जाने व नीचे आने के लिए गोंडोला का ही प्रयोग किया। अधिकतर कीवी अपनी बाइक्स से ही नीचे आ गये, जिनमें वह दस साल का बच्चा भी शामिल था।
न्यूज़ीलैंड में मुझे एहसास हुआ कि प्रकृति के दूर से दर्शन नहीं करने चाहिएं बल्कि दिल खोलकर उसका हिस्सा बन जाना चाहिए। नतीजतन मैंने भी कुछ आउटडोर करने की ठानी, अपने डर पर काबू पाया और कुईंसटाउन की वकाटिपू झील पर एक घंटे की जेट बोटिंग के लिए चला गया। मौसम शानदार था और पानी गहरा नीला। (बाद में मुझे मालूम हुआ कि पानी 99.99 प्रतिशत शुद्ध था और उसे सीधे झील से पिया जा सकता था)। आधा घंटे की उछाल भरी सेलिंग के बाद मैं 43 किमी की झील के अंत में पहुंच गया, पानी मेरे जिस्म से टपक रहा था। जब थोड़ी देर के लिए मैं रुका था, तो मेरे गाइड ने बताया कि वह वही स्थल था, जहां लोथ्लोरिएन से सेल करते हुए फेलोशिप ऑ़फ द रिंग ने गोंडोर के दो राजाओं की मूर्तियां देखी थीं। पहाड़ों के एक तरफ जंगल हैं, जहां बोरोमीर की हत्या हुई थी। मैंने ठंडी आह भरी। मैं उसी स्थल पर था जहां मेरे प्रिय अरगोर्न ने नदी पर सवारी की थी। जेट बोट पर जोशो उत्साह के बाद मैंने नदी के निकट पार्क में आलस भरी दोपहर गुज़ारी। गर्मियों में सूरज बहुत गर्म हो जाता है, लेकिन मैं धूप का आनंद लेते हुए पैराग्लाइडिंग उत्साहियों, साइकिल सवारों और पर्यटकों को जाते हुए देख रहा था। अगर आप गर्मियों में यात्रा कर रहे हैं तो सनस्क्रीन का फैमिली पैक बहुत ज़रूरी है, मुझे इसका एहसास अपने चेहरे पर सनबर्न के बाद हुआ। हालांकि दिन काफी गर्म था, लेकिन कीवी बियर ने मुझे कूल रखा।
अगले दिन क्राइस्ट चर्च में मेरा स्वागत जादुई मौसम ने नहीं किया, मेरे पहुंचते ही वहां बारिश शुरू हो गयी। मेरा बी एंड बी सिटी सेंटर से काफी दूर था, कार मेरे पास नहीं थी, इसलिए मैंने घर पर ही शांत दिन गुज़ारा। पांच वर्ष से क्राइस्ट चर्च में रह रहे मेरे एक दोस्त ने अगले दिन फेसबुक के ज़रिये सम्पर्क किया। मैं उसका बहुत शुक्रगुजार हैं- स्थानीय ज्ञान के कारण मुझे क्राइस्ट चर्च को नयी रोशनी में देखने का अवसर मिला। 2011 के भयंकर भूकम्प के बाद से यह शहर अब भी निर्माण के दौर से ही गुज़र रहा है। शहर का सबसे पुराना व सबसे बड़ा क्राइस्ट चर्च कैथेड्रल ऐसी बुरी तरह से नष्ट हुआ था कि मुरम्मत भी संभव न थी। क्राइस्टचर्च कलाकारों की नगरी है। यह पुनर्जन्म का हर दृष्टिकोण से प्रतीक है। हर दीवार कैनवास है और हर जगह कलाकृतियां हैं। एक पूरा शॉपिंग मॉल बेकार हो चुके शिपिंग कंटेनरों से बना है। इसका निर्माण खर्च न के बराबर है और भूकम्प का इस पर कोई असर नहीं हो सकता। एक भूकम्प-प्रूफ कोर्ट काम्प्लेक्स का भी निर्माण किया गया है, जिसमें आपदा के समय तीन दिन तक लोगों को ठहराया व भोजन कराया जा सकता है। 
शहर के बोटैनिकल गार्डन में मैंने एवन नदी में नौकायन किया और उसके विख्यात रेस्टोरेंट टुक-टुक में स्वादिष्ट थाई फूड का आनंद लिया। इस यात्रा के लिए मैंने नेपियर को अपना बेस कैंप बनाया था। जब मैं क्राइस्ट चर्च से नेपियर लौटा तो मैं वेलिंगटन के टे पापा म्यूजियम में गल्लिपोली प्रदर्शनी देखने गया, जहां विश्व युद्ध के जनरलों, सैनिकों व नर्सों की मूर्तियां हैं, लाइफ साइज़ से 24 गुना बड़ी। मैंने अपनी यात्रा का अंत होब्बिट गांव के मूवी सेट या ‘शिरे’ के टूर से किया। यह मेरा मक्का था, जिसके बिना न्यूज़ीलैंड का तीर्थ सफल नहीं हो सकता था। यह सेट माता माता, उत्तरी द्वीप, पर स्थित है। फिर कुछ दिनों तक हर प्रकार की पिनोट नोयर का स्वाद लेने के बाद मैंने न्यूज़ीलैंड को इस आशा के साथ अलविदा कहा कि इस सुंदर व एडवेंचर भरे देश में मैं फिर वापस आऊंगा।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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