चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर में बनाएं कॅरियर

कभी देश की ताकत का पैमाना उसकी सेना और औद्योगिक उत्पादन को माना जाता था, लेकिन आज यह तस्वीर बदल चुकी है। आपकी जेब में रखा स्मार्टफोन हो या आप जिस कार को ड्राइव करते हैं अथवा दुश्मन पर निशाना साधने वाली मिसाइल ही क्यों न हो, यहां तक कि उपग्रह और अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक मशीनों में भी एक छोटी सी ऐसी चीज, इन दिनों इस्तेमाल होती है, जिसके बिना आधुनिक तकनीक की कल्पना करना ही मुश्किल है- जी हां, यह सेमीकंडक्टर चिप है। चिप आकार में छोटा ज़रूर होता है, लेकिन आज की प्रौद्योगिकी में उसकी अहमियत किसी विशाल कारखाने से कम नहीं है। जिस देश के पास चिप डिजाइन और निर्माण की मजबूत क्षमता होती है, वह इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, ऑटोमोबाइल, रक्षा, अंतरिक्ष और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर ही नहीं, एक बड़ी औद्योगिक ताकत समझा जाता है। यही कारण है कि भारत में भी सेमीकंडक्टर उद्योग को लेकर बड़े निवेश की बड़ी परियोजनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर निर्माण व माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स युवाओं के लिए सिर्फ शानदार तकनीकी कॅरियर ही नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सीधे योगदान देने का बड़ा अवसर भी है। इसलिए इस क्षेत्र के युवाओं को सही मायने में मेक इन इंडिया के असली सिपाही कहा जा सकता है। 
सेमीकंडक्टर आखिर है क्या? : सेमीकंडक्टर ऐसी सामग्री है जिसकी विद्युत चालकता, चालक और कुचालक के बीच होती है। सिलिकॉन इसका सबसे प्रमुख उदाहरण है। इसी से बने माइक्रो चिप में करोड़ों, अरबों ट्राजिस्टर लगाये जा सकते हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के भीतर गणना, नियंत्रण और डेटा प्रोसेसिंग करते हैं। चिप का निर्माण एक अत्यंत जटिल प्रकिरया है, इसमें डिजाइन से लेकर वेफर निर्माण, फोटोमिथोग्राफी, डोपिंग, पैकेजिंग और परीक्षण तक कई चरण शामिल होते हैं। इसलिए यह उद्योग केवल इंजीनियरों का नहीं बल्कि भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर विज्ञान और सामग्री विज्ञान के विशेषज्ञों का क्षेत्र भी है। 
कौन-कौन से हैं कॅरियर विकल्प : सेमीकंडक्टर उद्योग में नौकरी का अर्थ केवल चिप बनाना नहीं है यहां विशेषज्ञता के कई रास्ते हैं जैसे- चिप डिजाइन इंजीनियर, वीएलएसआई डिजाइन इंजीनियर, सेमीकंडक्टर प्रोसेसिंग इंजीनियर, वेफर फैब्रिकेशन विशेषज्ञ, टेस्ट इंजीनियर, पैकेजिंग विशेषज्ञ, उपकरण एवं मशीन इंजीनियर, सेमीकंडक्टर मटीरियल विशेषज्ञ है
चिप डिजाइन इंजीनियर इलेक्ट्रॉनिक चिप का सर्किट और ऑर्किटेक्चर डिजाइन करता है, जबकि वेरी लाज़र्र स्केल इंटीग्रेशन यानी वीएलएसआई डिजाइन इंजीनियर इलेक्ट्रॉनिक घटकों को डिजाइन और एकीकृत करता है। इसी क्रम में सेमीकंडक्टर प्रोसेसिंग इंजीनियर सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र में चिप बनाने की विभिन्न प्रक्रियाओं को नियंत्रित और बेहतर करता है। जबकि वेफर फैब्रिकेशन विशेषज्ञ सिलिकॉन वेफर पर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट तैयार करता है। टेस्ट इंजीनियर तैयार चिपों की गुणवत्ता व विश्वसनीयता की जांच करता है, पैकेजिंग विशेषज्ञ चिप के लिए सुरक्षित पैकेज तैयार करता है ताकि वह वास्तविक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में इस्तेमाल की जा सके। जबकि उपकरण एवं मशीन इंजीनियर सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक मशीनों की स्थापना, संचालन और रख-रखाव की जिम्मेदारी निभाता है और चिप निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री तथा रसायनों की गुणवत्ता का व्योहारिक अध्ययन सेमीकंडक्टर मटीरियल विशेषज्ञ करता है। 
क्या पढ़ाई करनी होगी : यदि आप स्कूल में हैं, तो गणित और विज्ञान पर मजबूत पकड़ बनाना पहला कदम है ताकि 12वीं के बाद इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश पा सके- बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, बीटेक कम्प्यूटर साइंस, बीटेक माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स, बीटेक सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, बीएससी फिजिक्स, बीएससी कैमिस्ट्री, मटीरियल साइंस। इसके बाद वीएलएसआई, माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी या चिप डिजाइन में विशेषज्ञता हासिल की जा सकती है। यदि विद्यार्थी कॉलेज के दौरान प्रोजेक्ट, इंटर्नशिप और वास्तविक चिप डिजाइन टूल पर काम करने का अनुभव हासिल कर लेते हैं, तो उनके लिए रोजगार की संभावनाएं काफी बेहतर हो जाती हैं। इस क्षेत्र में कौशल आधारित वेतन विशेष महत्व रखता है। इसलिए डिग्री हासिल करने की बजाय डिजाइन टूल, प्रोग्रामिंग और वास्तविक परियोजनाओं पर पकड़ बनाना ज्यादा उपयोगी होता है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

#चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर में बनाएं कॅरियर