मेले पर विशेष


आकर्षण का केन्द्र बन चुका है बाबा फरीद मेला

बाबा फरीद आगमन पर्व फरीदकोट के सांस्कृतिक कैलेंडर की विशेष तिथियों 21, 22 और 23 सितम्बर का फरीदकोट शहर के लोग उत्सुकता से इंतज़ार करते हैं। यह मेला 12वीं सदी के चिश्ती सूफी फकीर बाबा शेख फरीद जी के फरीदकोट शहर में आने की खुशी में आयोजित होता है, जो 1215 ईस्वी में अपने पीर मुर्शिद ख्वाज़ा काकी जी से मिलने के बाद पाकपटन जा रहे थे। बाबा जी ने हाजी हिसार के रास्ते दिल्ली से पाकपटन जाते समय 40-45 दिन इस शहर में विश्राम किया था। उन दिनों इस शहर का नाम राजपूत मोकल सीह के नाम पर ‘मोकल हर’ था, जो फरीद जी के नाम के साथ जुड़ कर फरीदकोट हो गया। बाबा फरीद जी के पाकपटन जाने के बाद उनकी याद में शाही किले के सामने एक दरगाह बन गई, जहां कोई मुस्लिम श्रद्धालू बैठकर आम लोगों की प्रार्थनाएं सुनता था। 1947 में जब देश आज़ाद हुआ तो शहर के अलग-अलग मोहल्लों में रहने वाली मुस्लिम आबादी पाकिस्तान चली गई और फरीद जी की गद्दी एक सिख स्वरुप वाले महंत ने संभाल ली, जो एक आम दुनियावी इंसान था। उस समय इंदरजीत सिंह खालसा एडवोकेट आगे आए और एक साबत-सूरत गुरसिख का फज़र् निभाते हुए दरगाह की देखभाल की ज़िम्मेदारी संभाली। उन्होंने बाबा फरीद जी से संबंधित गुरुद्वारों और अन्य शिक्षण संस्थाओं का निर्माण करवाया। वह जानते थे कि सूफीवाद और गुरसिखी का मज़बूत रिश्ता है, फरीद जी की बाणी (4 शबद और 112 श्लोक) श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में संकलित हैं। 
बाबा फरीद जी के आगमन को एक पर्व के रूप में पहली बार 21, 22 और 23 सितम्बर को उत्तरी क्षेत्र संस्कृत केन्द्र द्वारा सरकारी स्तर पर मनाया गया था। 1986 के बाद अब तक यह मेला पिछले 40 सालों से लगातार मनाया जा रहा है। बाबा फरीद के आगमन पर्व की इस बार 40वीं वर्षगांठ है। यह मेला पहली बार राज्य स्तर पर पंजाब सरकार ने 1986 में मनाया था। राज्य में शांति कायम करने के लिए पंजाब सरकार ने राज्य के बुद्धिजीवियों, लेखकों एवं कलाकारों को लेकर आपसी प्यार, भाईचारे और शांति के लिए यहां सांस्कृतिक खेल और धार्मिक मेले शुरू करने का फैसला किया। 
पंजाब के तत्कालीन राज्यपाल सिद्धार्थ शंकर राय ने खुद इन मेलों की रूप-रेखा तैयार की। महान सूफी संत बाबा शेख फरीद जी के नाम पर पहला मेला करवाने पर सहमति बनी और फरीदकोट शहर को चुना गया। 
फरीदकोट मालवा की पवित्र धरती है, जिसे बाबा शेख फरीद जी के चरणों का स्पर्श मिला है। बाबा फरीद जी का फरीदकोट आना और कुछ दिन यहां ठहरना इस शहर के लिए वरदान साबित हुआ। इस शहर के राजा मुकल ने शेख फरीद जी की शख्सियत से प्रभावित होकर इस शहर का नाम मोकल हर से बदल कर फरीदकोट रख दिया।
बाबा फरीद जी की इस शहर पर खास कृपा रही है, यहां के लोग हिंदू, सिख, मुस्लिम, ईसाई, सभी इस सूफी फकीर के अनुयायी हैं और प्यार, एकता और सहयोग की एक शानदार तस्वीर पेश करते हैं। पंजाब सरकार ने उनके आगमन के दिन 19 सितम्बर से यह मेला शुरू किया, जो 23 सितम्बर तक चला और धार्मिक समारोह के बाद सम्पन्न हुआ। इससे पहले बाबा फरीद मेला 1969 में शुरू हुआ था, जिसे बाबा फरीद सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष इंदरजीत सिंह सेखों ने एक दिन के लिए मनाया था। 1986 में पंजाब सरकार ने इस मेले का नाम बाबा फरीद आगमन पर्व रखा और मेले की पूरी ज़िम्मेदारी पंजाब के सांस्कृतिक मामले विभाग को दे दी। फरीदकोट प्रशासन ने इस मेले में सहयोग किया और 21 सितम्बर से 23 सितम्बर तक मेला मनाने का फैसला किया। मेले के लिए किला मुबारक फरीदकोट में प्रचान शहर का एक दृश्य तैयार किया गया। यह मेला सरबत दे भले के लिए अरदास से शुरू हुआ और रात में कवि दरबार, नाटक, मुशायरा और गायकों ने खूब समां बांधा। सेमिनार और ग्रमीण खेल भी मेले के मुख्य आकर्षण थे। 
उसके बाद यह मेला राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हो गया, हर साल मेला देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। मेला ज़िला सांस्कृतिक सोसाइटी फरीदकोट के ज़िम्मे आ गया और धार्मिक आयोजनों की ज़िम्मेदारी बाबा फरीद सोसाइटी ने संभाली। मेला 3 दिन से बढ़ाकर 5 दिन का कर दिया गया और 19 से 23 सितम्बर तक प्रशासन और बाबा फरीद सोसाइटी ने लोगों के सहयोग से मनाना शुरू कर दिया। 
इस बार बाबा फरीद धार्मिक और शिक्षण संस्थाओं फरीदकोट द्वारा 15 सितम्बर से धार्मिक कार्यक्रमों शुरू कर दी गई है। आज सुबह सुखमनी साहिब के पाठ के साथ धार्मिक समारोहों की शुरुआत होगी, 19 से 22 सितम्बर तक देश-विदेश के प्रसिद्ध रागी और कथावाचक टिल्ला बाबा फरीद और गुरुद्वारा गोदड़ी साहिब में रोज़ाना सुबह और शाम के दीवानों में कीर्तन और कथा से संगत को निहाल करेंगे। संस्थाओं के चेयरमैन सिमरजीत सिंह सेखों के मुताबिक 23 सितम्बर, 2026 को श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद टिल्ला बाबा फरीद से विशाल नगर कीर्तन आरंभ होगा और गुरुद्वारा गोदड़ी साहिब पहुंचने पर धार्मिक दीवान सजाया जाएगा। 
इस बार भी सोसाइटी की ओर से मानवता की सेवा के लिए भगत पूरन सिंह अवार्ड और स्वर्गीय इन्द्रजीत सिंह खालसा यादगारी अवार्ड खेल, सभ्याचार और शिक्षा में उपलब्धियां हासिल करने वाली शख्सियतों को दिए जाएंगे। आगमन पर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में संगत बाबा जी के दरबार में हाज़िरी लगाकर खुशियां  प्राप्त करेगी।
-मो. 98145-53988

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