चिंताजनक है मिलावटखोरी का बढ़ना

पंजाब में मिलावटखोरी की समस्या एक बार फिर उग्र होकर दरपेश हुई है। यह कोई नई समस्या नहीं है। विशेषकर खाद्यान्न पदार्थों की मिलावट सदैव से सरकार और समाज के लिए सिरदर्द बनी रही है। दूध, दुग्ध-पदार्थ, खोया-पनीर, देसी घी आदि में मिलावट की खबरें चिरकाल से आती रही हैं हालांकि इन दिनों ऐसे समाचारों की भरमार ़खतरनाक ढंग से बढ़ी है।  दालों में चक-मक पत्थर और हल्दी-मसालों में घोड़े की लीद की मिलावट के समाचार सच में चिन्तातुर करते हैं। नकली दूध में सोडा कास्टिक और मिलावटी घी में जानवरों की चर्बी मिलाये जाने के समाचार भी आम जन-साधारण की परेशानी में इज़ाफा करने के लिए काफी हैं। यहां तक कि अब तो खाद भी बहुतायत में नकली हो गई है। इस कारण पशु-चारा, गेहूं, धान और दालें आदि में विषाक्त तत्व पाये जाने के समाचार मिले हैं। पशु-चारे के विषाक्त होने से असली दूध भी शुद्ध रूप से उपलब्ध नहीं होता। इन दिनों खाद के जितने भी नमूने भरे गये हैं, उनमें से अधिकतर फेल सिद्ध हुए हैं। इस कारण मिट्टी की गुणवत्ता भी कम हो रही है।  समस्या का एक बड़ा गम्भीर पक्ष यह भी है कि उत्सव-त्योहारों के मौसम में ऐसे मिलावटी, विषाक्त पदार्थों की मांग और खपत बहुत बढ़ जाती है। इस कारण सरकारी प्रशासन की ज़िम्मेदारी बढ़ती है तो कार्य-निष्पादन में कोताही की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे माहौल में मिलावट करने वाले तत्व अक्सर बच निकलते हैं। वैसे भी मिलावटखोरी एवं प्रशासनिक तत्वों के बीच सांठ-गांठ के बिना इतने बड़े स्तर पर खाद्य पदार्थों अथवा दुग्ध पदार्थों में मिलावट संभव हो ही नहीं सकती। 
देश में इन दिनों दीपावली से पूर्व दशहरा, भैया दूज सहित पर्वोत्सव का मौसम चल रहा है। पंजाब में इस मौसम में मिठाइयां आदि बड़े व्यापक स्तर पर लेने-देने की परम्परा है, किन्तु इन्हीं दिनों में प्रदेश में व्यापक स्तर पर नकली और विषाक्त खोया-पनीर का कारोबार चरम पर है। पंजाब में इन दिनों एक ओर बड़े स्तर पर, प्रतिदिन नकली पनीर बरामद किया जा रहा है। वहीं बरामद पानी के जितने भी नमूने भरे गये हैं, उनमें से 42 प्रतिशत प्रयोगशाला में फेल साबित हुए हैं। इसमें से 20 प्रतिशत पनीर मनुष्य के खाने योग्य नहीं पाया गया। यह पनीर बाज़ार भाव से सस्ता होने के कारण इसकी बिक्री बड़े स्तर पर होने लगती है। विक्रेताओं के लिए यह दोहरे लाभ का सौदा बन जाता है। ऐसे मिलावटी दूध, खोया और पनीर को बनाने के लिए यूरिया खाद, कास्टिक सोडा और तेज़ाब जैसे ़खतरनाक रासायनिक तत्वों का प्रयोग किया जाता है। एक ओर यह पनीर जहां हृदय रोग, फेफड़ों आदि को नुक्सान पहुंचाता है, वहीं इससे कैंसर जैसे रोग के विषाणु भी मनुष्य के शरीर में पैदा होने लगते हैं। सरकार ने बेशक ऐसे नकली खोया-पनीर को बनाने, इसके परिशोधन और इसके भण्डारण एवं इसकी बिक्री पर रोक लगा रखी है, किन्तु प्रशासनिक तत्वों की मिलीभुगत से यह अवैध और असामाजिक कारोबार निरन्तर फल-फूल रहा है।
प्रदेश में दीपावली से पूर्व के त्योहारी दिनों में प्रशासन भी जैसे इन असामाजिक तत्वों के पीछे हाथ धोकर पड़ा है। उत्तर प्रदेश से लाये गये 22 हज़ार किलो देशी घी में से भरे गये प्राय: सभी नमूने फेल सिद्ध हुए हैं। इस संबंध में कोटकपूरा की कई फर्मों के विरुद्ध मामले भी दर्ज किए गए हैं। पंजाब के विरासती शहर जालन्धर में भी एक मास में तीसरी बार प्रशासन ने बड़ी मात्रा में मिलावटी पनीर बरामद किया है। जालन्धर में विगत 2 सितम्बर को भी दो बड़ी कार्रवाइयों में 425 किलो नकली पनीर ज़ब्त किया गया था।  प्रदेश के सम्बद्ध विभागों ने इस संबंध में कई चेतावनियां जारी की हैं। पंजाब के बरनाला में भी 600 किलो जाली पनीर बरामद हुआ है। सी.आई.ए. और खाद्य-आपूर्ति विभाग की संयुक्त कार्रवाई के अन्तर्गत यद्यपि कोई बड़ी मछली नहीं फंसी किन्तु इस सामान को ले जा रही वैन के चालक को हिरासत में लिया गया है। इस पनीर के नमूने खरड़ प्रयोगशाला में भेजे गये हैं।
हम समझते हैं कि मानवता के विरुद्ध इस असामाजिक एवं ़गैर-कानूनी कारोबार पर सख्ती से अंकुश लगाया जाना चाहिए। यह कारोबार बड़े व्यापक स्तर पर बड़े लोगों द्वारा किया जा रहा है। समाज में इस कारण एक ओर जहां कैंसर जैसे रोग का विस्तार हो रहा है, वहीं इससे मानवीय अंगों में निष्क्रियता बढ़ती है, जिससे हृदय-रोग और अपंगता आदि का खतरा पैदा होता है। मिलावट का यह कारोबार अब राष्ट्र और समाज-विरोधी तत्वों के हाथों में चला गया है। इससे राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता भी प्रभावित होती है। प्रदेश सरकार ने बेशक इस अवैध धंधे के विरुद्ध अनेक पग उठाये हैं, किन्तु अभी भी यह धंधा अगर निर्विरोध जारी है, तो नि:संदेह पृष्ठभूमि में कोई गड़बड़-झाला है। प्रदेश में आने वाले दिनों में त्योहारी मौसम के साथ चुनावी मौसम भी उतरने वाला है। सरकार को चाहिए कि वह मानवता के हित में और प्रशासनिक पक्ष में मिलावट के इस अवैध कारोबार पर कड़े एवं मज़बूत हाथों से अंकुश लगाये।

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