सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला


 कोलंबो, 22 सितंबर (PTI): स्पीकर जगत विक्रमारत्ना ने मंगलवार को संसद में बताया कि श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है कि संविधान में प्रस्तावित 22वें संशोधन के लिए जनमत संग्रह के ज़रिए मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं है।
इस विवादित 22वें संशोधन (22A) का मकसद सुप्रीम कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की उम्र 65 से बढ़ाकर 67 साल और अपील कोर्ट के जजों की उम्र 63 से बढ़ाकर 65 साल करना है। इसमें अपील कोर्ट में जजों की संख्या 20 से बढ़ाकर 25 करने का प्रस्ताव भी है।
22A में हाई कोर्ट, ज़िला अदालतों और मजिस्ट्रेट अदालतों के जजों की रिटायरमेंट की उम्र भी बढ़ाकर 62 साल करने का प्रस्ताव है।
यह संशोधन अगस्त में संसद में पेश किया गया था, जिसके बाद इसकी संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के लिए संविधान के तहत 14 दिन की समय-सीमा शुरू हो गई थी।
इस संशोधन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में 60 से ज़्यादा याचिकाएं दायर की गईं। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह न्यायिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है और इसके लिए जनमत संग्रह के ज़रिए मंज़ूरी की ज़रूरत है।

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