पंजाब के भविष्य के लिए भाजपा का संकल्प—नशा मुक्त पंजाब यात्रा
पंजाब की समस्या सिर्फ नशा की नहीं है, बल्कि यह हर तरह से बर्बाद हो रहे एक राज्य की दर्दनाक दास्तान है। पंजाब में नशे की समस्या को सिर्फ लड़के, लड़कियों, युवाओं या किसी एक समूह की समस्या समझना इस संकट की गंभीरता को कम आंकना होगा क्योंकि यह जंगल की आग की तरह समाज को बुरी तरह अपनी चपेट में ले रहा है। समाज में नशा सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को तोड़ देता है। जब किसी परिवार का बेटा या बेटी नशे के चंगुल में फंस जाता है, तो उसका दर्द सिर्फ उस व्यक्ति तक ही सीमित नहीं रहता। इसकी सबसे ज्यादा पीड़ा मां, पत्नी, बहन और पूरे परिवार को सहन करनी पड़ती है। यह समस्या सामाजिक रूप से परिवारों को बुत्त की तरह जीने के लिए मजबूर कर देती है और अंतरिक कलह से टूटे परिवार अपने उजड़े रहे बाग की चिंता दूसरों के साथ साझा नहीं कर सकते। ऐसे में परिवार अंदर से टूटता जाता है। संकट में घिरे पंजाब को सामाजिक, आर्थिक और भविष्य के संकटों से बचाने के लिए वर्तमान में गम्भीर यत्नों की ज़रूरत है।
पंजाब के शरीर पर नशे के लगे दीमक के कारण सामाजिक और आर्थिक उजाड़ा घर की आय को प्रभावित करता है। बचत के स्थान पर कज़र् का बोझ बढ़ने लगता है और इसके बुरे नतीजे सामने आते हैं। कई परिवार अपनी मेहनत से कमाई ज़मीन-जायदाद बेचने पर मजबूर हो जाते हैं। निश्चित समय के बाद नशे का आदी व्यक्ति नशे के लिए पैसे की ज़रूरत पूरी करने के लिए छोटी-मोटी चोरियां, मोबाइल फोन छीनना, घर का सामान बेचना और दूसरे अपराध करने लगता है, जहां से वापस आना नामुमकिन हो जाता है और कम उम्र में अपनी जवानी बर्बाद कर लेता है। यह व्यक्तिगत नशे की समस्या धीरे-धीरे परिवार के लिए आर्थिक समस्या, फिर सामाजिक समस्या और आखिर में कानून-व्यवस्था की समस्या बन जाती है। नशे के नेटवर्क के साथ-साथ अपराध का नेटवर्क भी बढ़ता है। युवाओं का इस्तेमाल छोटे अपरोधों से लेकर गंभीर आपराधिक गतिविधियों तक के लिए किया जा सकता है।
इसलिए ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ सिर्फ नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान नहीं है। यह पंजाब के सामाजिक, आर्थिक और भविष्य के संकट को समझने और उसका हल ढूंढने के लिए लोगों तक पहुंचने का अभियान है। शानदार इतिहास व विरासत वाला पंजाब आज एक ऐसे संकट का सामना कर रहा है जिसकी कड़ियां आपस में जुड़ी हुई हैं। राज्य में इस समय नशे की वजह से परिवारों का टूटना, आर्थिक संकट, अपराध, कानून-व्यवस्था, उद्योगों का पलायन, शिक्षा, सेहत और रोज़गार का संकट और पंजाब के भविष्य पर सवाल जैसी चुनौतियों दरपेश हैं। लेकिन ड्रग्स की समस्या को 360.डिग्री नज़रिए से समझने की ज़रूरत है।
अगर नशे की समस्या की वजह से राज्य में अपराध और असुरक्षा बढ़ती है, तो इसका सीधा असर निवेश और रोज़गार पर पड़ता है। उद्योगों को सुरक्षित माहौल चाहिए, कारोबार को कानून पर भरोसा, निवेश को स्थिरता चाहिए, अगर पंजाब में उद्योग लगाने या कारोबार करने वाला कोई व्यक्ति सुरक्षा को लेकर चिंतित है, तो निवेश कैसे आएगा? अगर नये उद्योग नहीं आएंगे और मौजूदा उद्योग भी कमज़ोर हो जाएंगे, तो रोज़गार कहां से आएगा? इसलिए पंजाब में नशे के प्रचलन और कानून-व्यवस्था की समस्याओं को आर्थिक विकास से अलग करके नहीं देखा जा सकता। आज पंजाब में माता-पिता को बस एक ही चिंता है कि उनके बच्चे नशे के आदी न हो जाएं। पंजाब में परिवार अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए विदेश भेज रहे हैं जिसकी वजह से स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या कम हो रही है और कई संस्थान बंद हो रहे हैं। सरकार को अपने स्कूल और कॉलेज में दाखिले कम होने की कोई परवाह नहीं है, लेकिन निजी संस्थान ऐसे में अपने संस्थानों चलाने में लाचार हो जाते हैं। बैंक कज़र् से शुरू हुए निजी स्कूल और कॉलेज दिवालिया हो रहे हैं। जब कोई नौजवान पंजाब छोड़कर जाता है, तो सिर्फ एक छात्र ही नहीं जाता, बल्कि पंजाब के भविष्य की प्रतिभा भी बाहर चली जाती है।
देश के अलग-अलग राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने मुश्किल हालात में कानून-व्यवस्था, विकास और शासन में बड़े बदलाव किए हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में कानून-व्यवस्था और विकास में बड़े बदलाव किए गए। असम था उत्तर-पूर्व में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों के बीच विकास और शांति का नया माहौल बनाया गया। जम्मू-कश्मीर में सामान्य हालात, विकास और राष्ट्रीय मुख्यधारा के साथ जुड़ाव को मज़बूत किया गया। देश से नक्सलवाद का खात्मा किया गया।
पंजाब में भाजपा का संकल्प : भारतीय जनता पार्टी आपकी समस्या को अपनी ज़िम्मेदारी समझती है। पार्टी नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ेगी। पीड़ित महिलाओं और परिवारों के दुख को राजनीतिक एजेंडे के केन्द्र में लाया जाएगा। सबसे ज़रूरी बात—पंजाब के लोगों को उनके भविष्य के बारे में भरोसा दिलाने की कोशिश है, उन व्यापारियों और उद्योगपतियों को, जो पंजाब में सुरक्षित माहौल चाहते हैं। यह पंजाब की भावी पीढ़ियों के लिए एक राजनीतिक और सामाजिक संकल्प है।



