21वीं सदी के एआई दौर में अफवाहों पर कुर्बान होता समाज !
एआई, समय को मात देने को बेकरार है। पूरी दुनिया इसके खतरों को भांपकर इससे सर्तक रहने की बात कर रही है। यहां तक इसके माध्यम से इंसान की दुनिया में दखल देने की होड़ इस कदर मची है कि हर देश इसके लिए दीवानगी की हद तक जा रहा है। भारत की दुनिया में, दूसरे देशों से जल्दी ही आगे होने की बात हो रही हैं परमाणु तथा अस्त्र-शस्त्र से लड़ी जाने वाली लड़ाईयां अब रासायनिक वॉर तक आ पहुंची हैं। परखनली से बच्चे हो रहे हैं, चिप शरीर में लगाकर तमाम बातें जानी जा रही हैं और हम है कि अस्सी के दशक में जाने को बेताब हैं। हालत इतनी बिगड़ चुकी है कि हम अपनी आस्था को भी भीड़तंत्र के हाथों गिरवी रखकर उस दौर में जा रहे हैं, जहां पर कहते थे कि पीपल के पेड़ पर भूत है या फिर भारत सांप-सपेरों का देश है। हाल की जयपुर की एक घटना ने हमें अफवाहों की दुनिया का सिरमौर बना दिया है।
हिंदुस्तान में सदियों से अफवाहों ने अपना एक राज कायम कर रखा है। थोड़े -थोड़े अंतराल पर कोई न कोई अफवाह समाज में आ जाती है और लोग उसके लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देते हैं। गणेश चतुर्थी पर जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में मेहंदी लेने वालों की इतनी भीड़ उमड़ी की पूरे शहर की व्यवस्था ही बिगड़ गई। गणेश जी के सिंजारे की मेहंदी लगाने से शादी 6 माह में हो जाने की अफवाह के कारण तकरीबन 18 लाख लोग (स्थानीय मीडिया के अनुसार) पूरे भारत से आ जुटे। इसमें बड़ी संख्या उनकी थी, जो एक दिन पहले ही आकर मंदिर के आसपास जम गए थे। दरअसल रील नामक बीमारी ने यह अफवाह फैला दी थी कि इस मेहंदी को लगाने से शादी हो जाती है। भीड़ को देखकर पूरा कार्यक्रम ही बदलना पड़ा अन्यथा बड़ी घटना की आशंका बन गई थी। यह बात भी कम महत्वपूर्ण नहीं है कि मंदिर के महंत ने अपनी ओर से साफ कर दिया कि शादी वाली बात पूरी तरह से निराधार है।
भीड़ की स्थिति क्या होगी इसे ऐसे समझिए कि सन् 2011 की जनगणना के अनुसार जयपुर शहर की आबादी 33.5 लाख और जयपुर ज़िले की आबादी 66.26 लाख थी। मतलब यह उस आबादी के हिसाब से लगभग आधा जयपुर शहर करीब दस किलोमीटर में उपस्थित था। इस रीली अफवाह के कारण जयपुर ही नहीं राजस्थान के हर गणेश मंदिर में जबरदस्त भीड़ जमा हो गई। आमतौर पर गणेश चतुर्थी पर यहां चार से छह लाख तक की भीड़ होती है। रीली अफवाहें पिछले 6 महीने से धूम मचा रही हैं। अमेरिका तथा ईरान का फरवरी में आरंभ हुए युद्ध के कुछ समय ही बाद गैस तथा पेट्रोलियम पदार्थों की कमी की अफवाह ने पेट्रोल पंप और गैस गोदामों पर लंबी लाईनें लगवा दीं। इस अफवाह पर तो प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि देश में पेट्रोलियम पदार्थों का रिजर्व मौजूद है।
अधिक दूर नहीं जाएं तो गत कई दिनों से उज्जैन के हनुमान जी मूर्ति का प्रसंग तो हर कहीं आस्था का ज्वार लाने को बेताब है। यहां पर यह ध्यान रखें कि गणेश जी को लेकर यह पहली अफवाह नहीं है। इससे पहले सन 1995 में सितंबर माह में ही गणेश जी ने पूरे भारत में दूध पीया था और तब दूध कीमत से बीस गुना अधिक तक महंगा बिका था। गणेश जी ही क्यों दूसरी अफवाहें भी एक नजर में देख ली जाएं? सदी के आरंभ में दिल्ली में मंकी मैन की अफवाह किसने नहीं सुनी। अभिषेक बच्चन की फिल्म दिल्ली-6 इसी पर बनी है। थोड़ा और पीछे जाएं तो सन 1975 के बाद की स्थिति क्या थी? संतोषी माता, लक्ष्मी जी तथा हनुमान जी के नाम के सौ पोस्टकार्ड लिख डालिए, तो आपकी किस्मत खुल जाएगी ने धूम मचा दी थी। उस वक्त जब पोस्टकार्ड घर का महत्वपूर्ण हिस्सा था, तब उसका आना और इस तहर की बातें होने पर उसे किसी धार्मिक आस्था वाले स्थान पर विसर्जित किया जाता था। समाज में शादियों को लेकर आ रही बिखंडनकारी खबरें, नौकरी के नाम पर हो रहा फ्रॉड, धर्म के लिए हर कहीं मिल रही सीख और भविष्य की जिम्मेदारियों को लेकर जो चिंता है, उसके कारण भी इस तरह की खबरों पर लोग अंधाधुंध विश्वास कर रहे हैं। आम आदमी तथ्यात्मक बातों पर कम, सुनी-सुनाई बातों पर अधिक विश्वास कर लेता है। वह एक ही बात को जब बार-बार सुनता है, तो उसे लगता है कि हो सकता है कि ऐसा हो जाए?
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर

