क्या कड़े प्रावधान से डिजिटल धोखाधड़ी पर अंकुश लगेगा ?
भारत में तेज़ी से हो रहे डिजिटल बदलाव ने दूरसंचार उपकरणों, खासतौर से मोबाइल इंसान के लिए रोजमर्रा की जिंदगी, व्यापार और शासन का एक अभिन्न हिस्सा बना दिया है। जैसे-जैसे तकनीकों पर देश की निर्भरता बढ़ती जा रही है, वैसे ही हमारे दूरसंचार नेटवर्क और उपकरणों की सुरक्षा और अखंडता को कायम रखना भी बड़ी चुनौती है, जिसमें साइबर अपराध यानी डिजिटल धोखाधड़ी ने बड़े पैमाने पर पांव पसार रखे हैं। हालांकि भारतीय नागरिकों के लिए भारत सरकार का संचार साथी प्लेटफॉर्म एक शक्तिशाली सुरक्षा कवच के रूप में कार्य कर रहा है लेकिन डिजिटल धोखाधड़ी का दायरा भी कम नहीं हुआ है। शायद इसी चुनौती का मुकाबला करने की दिशा में भारत सरकार ने टेलीकम्युनिकेशन एक्ट के तहत दूरसंचार उपकरणों मोबाइल हैंडसेट और अन्य टेलीकम्युनिकेशन डिवाइस के आईएमईआई नंबर के साथ छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ नियमों को अत्यंत सख्त करते हुए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। अब सवाल यही है कि क्या भारत सरकार द्वारा सख्त किये गये नियमों और प्रावधानों से देश में डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम लग पाएगी?
भारत में आज की दूरसंचार यात्रा शानदार तकनीकी प्रगति और सामूहिक ज़िम्मेदारी, दोनों का एक अनूठा संगम नज़र आता है। दूरसंचार विभाग के जुलाई के आंकडों के मुताबिक देश में सक्रिय वायरलेस मोबाइल सब्सक्राइबरों की संख्या 1,204.01 मिलियन के आंकड़े को पार कर चुकी थी। सब्सक्राइबरों की यह विशाल संख्या भारत के जुड़े हुए डिजिटल इकोसिस्टम के व्यापक दायरे को दर्शाती है। देश में लागू मज़बूत कानूनी प्रावधान, उन्नत सरकारी वेरिफिकेशन टूल्स (जैसे संचार साथी और डिवाइस सेतु) और नागरिकों के बीच बढ़ती हुई तकनीकी जागरूकता मिलकर हमारे डिजिटल नेटवर्क को पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद बनाते हैं। इस डिजिटल भरोसे को बनाए रखने में सरकार, उद्योग जगत और आम उपयोगकर्ता प्रत्येक हितधारक की अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका है। एक जागरूक, सतर्क और हर नियम से वाकिफ नागरिक ही किसी भी प्रकार की डिजिटल धोखाधड़ी और तकनीकी छेड़छाड़ के खिलाफ सबसे मज़बूत सुरक्षा कवच साबित होता है।
देश में तीव्र डिजिटल विस्तार अपने साथ सुरक्षा से जुड़ी कई नई और जटिल चुनौतियां भी लेकर आया है। इनमें से एक सबसे गंभीर चिंता इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी (आईएमईआई) नंबर के गलत इस्तेमाल या उससे छेड़छाड़ से जुड़ी है, जिसकी वजह साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। आईएमईआई नंबर के साथ छेड़छाड़ या उसके अनधिकृत संशोधन के कारण बदली हुई पहचान वाले उपकरणों का इस्तेमाल आसान हो जाता है, जिससे दूरसंचार नेटवर्क पर किसी भी डिवाइस की असली पहचान करना बेहद कठिन हो जाता है। इस तरह की हरकतें कानून लागू करने वाली एजेंसियों, उपभोक्ता सुरक्षा और समग्र राष्ट्रीय नेटवर्क सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा करती हैं। इसलिए एक सुरक्षित, भरोसेमंद और मजबूत दूरसंचार इकोसिस्टम को बनाए रखने के लिए डिवाइस आइडेंटिफायर (पहचानकर्ताओं) की अखंडता को मज़बूत करना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है।
टेलीकॉम नेटवर्क की भाषा आईएमईआई की तकनीकी बनावट और इसकी कार्यप्रणाली को समझना हर जागरूक नागरिक के लिए ज़रूरी है। आईएमईआई एक विशिष्ट 15 अंकों का नंबर होता है जो दुनिया भर के दूरसंचार नेटवर्क पर किसी भी मोबाइल डिवाइस की अनूठी पहचान करता है। आईएमईआई नंबर के शुरुआती आठ अंक ‘टाइप एलोकेशन कोड’ (टीएसी) बनाते हैं जो सीधे तौर पर डिवाइस के मॉडल या उसके विशेष प्रकार की पहचान करते हैं। ‘ग्लोबल सिस्टम फार मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन’ (जीएसएमए) टीएसी के वैश्विक आवंटन (एलोकेशन) की देखरेख करता है। जीएसएमए निर्माताओं और ब्रांड मालिकों को टीएसी जारी करता है जिसके बाद विनिर्माता प्रत्येक डिवाइस को अलग और विशिष्ट आईएमईआई नंबर आवंटित करते हैं। आज के दौर में चलन में मौजूद दो सिम वाले फोन में आमतौर पर दो अलग-अलग आईएमईआई नंबर होते हैं यानी प्रत्येक सिम स्लॉट के लिए एक विशिष्ट पहचान संख्या है।
भारत सरकार ने दूरसंचार इकोसिस्टम की सुरक्षा और अखंडता को बनाए रखने के लिए एक अत्यंत मजबूत कानूनी ढांचा तैयार किया है। टेलीकम्युनिकेशन एक्ट में मोबाइल हैंडसेट और अन्य टेलीकम्युनिकेशन डिवाइस जैसे दूरसंचार उपकरणों के आईएमईआई नंबर के साथ छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ नियमों को सख्त करने के साथ अत्यंत सख्त और कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले दोषियों के लिए तीन साल तक की कैद, 50 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना या फिर ये दोनों सजाएं एक साथ हो सकती हैं। भारत में किसी भी प्रकार के संबंधित दूरसंचार उपकरणों का आयात करने से पहले आयातकों को केंद्र सरकार के पास उनके आईएमईआई नंबर पंजीकृत कराने होंगे। (युवराज)

