बेहद गम्भीर हैं चुनाव आयोग पर लगे आरोप

तहज़ीब ही बाकी है ना अब शरम-ओ-हया कुछ,
किस दर्जा अब इन्सार ये बे-बाक हुआ है। 
—इकबाल ज़़फर
इस समय पंजाब में सबसे अधिक चर्चित मामला तो बहरीन बाली बीबी द्वारा शिरोमणि कमेटी तथा अकाली नेता पर लगाए गए गम्भीर आरोपों का है, परन्तु इस मामले के इतने कोण सामने आ चुके हैं, इतने स्व-विरोधी बयान हैं कि इसकी पूरी परतों को समझना अभी आसान नहीं। इसलिए इस मामले के सबसे अधिक चर्चित होने के बावजूद इस पर कुछ सटीक लिखने के लिए अभी कुछ और समय की ज़रूरत है। चाहे पहली नज़र में यह मामला साज़िश-दर-साज़िश तथा मानवीय कमज़ोरियों का घालमेल ही प्रतीत होता है। इस समय दूसरा सबसे अधिक चर्चित मामला ‘इंडियन एक्सप्रैस’ में प्रकाशित रितिका चोपड़ा की चुनाव आयोग बारे रिपोर्ट का है। रितिका का दावा है कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने विगत 10 माह में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज करवाई हैं और उन्होंने एस.आई.आर. (विशेष गहन पुनरीक्षण) से जुड़े कई फैसलों को अनाधिकारित और गैर-कानूनी भी कहा है। इन आपत्तियों का विस्तार आज लगभग प्रत्येक समाचार-पत्र तथा टीवी पर प्रसारित हो चुका है। इस मामले के आने वाले समय में और भी गर्माने की सम्भावना है। विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर उतेजित और आंदोलित होती दिखाई देंगी और चुनाव आयोग सहित सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा को घेरेंगी। यदि दो चुनाव आयुक्त स्वयं लिखित रूप में यह कह रहे हैं कि फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए जा रहे हैं तो संवैधानिक संस्था में सर्वसम्मति या बहुमत से फैसले लेने का सिद्धांत कहां खड़ा है? हैरानी है कि सुप्रीम कोर्ट कहां है, क्यों नहीं ऐसे गम्भीर खुलासे का सूहो-मोटो (स्वत: संज्ञान) ले रही। यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं, यह तो देश के लोकतंत्र की जड़ पर हमला प्रतीत होता है। याद रखें जब लोगों का व्यवस्था से विश्वास टूटता है तो लोकतंत्र खत्म होने का खतरा सबसे अधिक हो जाता है। कई बार लोग हताश हो जाते हैं और हताशा कुछ भी करवा सकती है। हमारे पड़ोसी देशों में हताश हुए युवाओं जिन्हें आजकल जैन-ज़ी कहा जाता है, किस सीमा तक चले गए थे, यह सब को पता है। 
एक आंसू भी हकुमत के लिए ़खतरा है,
तुम ने देखा नहीं आखों का समुन्दर होना।
—मुकव्वर राणा
मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी की बात
अगरचे इलम है लेकिन अमल नहीं कोई, 
ड्रामेबाज़ है ज़ाकिर ड्रामेबाज़ी है।
—आऱिफ नज़ीर 
मुख्य चुनाव आयुक्त की कथित मनमानियों के खुलासे के बाद बहुत-सी राजनीतिक पार्टियों के मुखी और वरिष्ठ नेता मुख्य चुनाव आयुक्त को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं। इनमें से ज़्यादातर काफी पढ़े-लिखे भी हैं। इसलिए यह भी नहीं कहा जा सकता कि उन्हें वास्तविकता का इलम नहीं है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी तो बाद की बात है, उन पर कोई एफ.आई.आर. भी इस मामले पर दर्ज नहीं हो सकती। उल्लेखनीय है कि 2023 में पारित किए गए मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तथा सेवा शर्तों संबंधी एक्ट-2023 की धारा 16 में साफ-साफ लिखा है कि कोई भी अदालत मुख्य चुनाव आयुक्त या (किसी) चुनाव आयुक्त ( मौजूदा या पूर्व) के खिलाफ उस कार्य के लिए सिविल या आपराधिक केस नहीं चला सकती, जो उसने अपनी अधिकारित ड्यूटी निभाते हुए किया हो। इसलिए कानून को बदले बिना मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मामला दर्ज करवाना सम्भव ही नहीं प्रतीत होता, गिरफ्तारी तो दूर की बात है। नि:संदेह इसे एक संस्था ‘लोक प्रहरी’ ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी हुई है कि यह धारा चुनाव आयुक्तों को जीवन भर के लिए खुली सुरक्षा (ब्लैंकट इम्यूनिटी) देती है, जो कि उचित नहीं, परन्तु अभी तो यह धारा लागू है। उल्लेखनीय है कि जब सरकार ने यह कानून बनाया था, तो विपक्षी पार्टियों के राज्यसभा तथा लोकसभा के बहुत-से सदस्य मुअत्तल किए हुए थे। यदि चुनाव आयोग पर कोई कार्रवाई करवानी है तो इस पर 2023 के कानून की उस धारा को रद्द करवाना पड़ेगी, जो उन्हें सुरक्षा देती है।  
इनकी मासूमियत पर ना जाना,
इनके धोखे में हरगिज़ ना आना,
लूट लेते हैं ये मुस्करा कर,
इनकी चालों से अल्लाह बचाए। 
राजनीति या भ्रष्टाचार की रोकथाम 
केन्द्र सरकार और पंजाब सरकार यथासंभव अपनी-अपनी ताकत इस्तेमाल करने से गुरेज नहीं करते। जहां ज़ोर चला पंजाब सरकार ने भी विरोधियों को दबाने के लिए विजीलैंस का इस्तेमाल करने में कसर नहीं छोड़ी और भाजपा द्वारा ई.डी. तथा अन्य केन्द्रीय एजेंसियों को विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल करने के कई मामले भी चर्चा में रहे हैं। कई विरोधी तो जब भाजपा में शामिल हो गए, उन्हें क्लीन चिट भी मिल गई थी। 
आज जब ई.डी. के अधिकारी गमाडा के कार्यालय में रिकार्ड की जांच कर रहे थे तो ‘आप’ ने उनके खिलाफ बड़ा प्रदर्शन करके मामले को और भी चर्चा में ला दिया है। हम समझते हैं कि चाहे यह शह-मात का लड़ाई राजनीतिक भी हो, परन्तु बिना आग के धुआं कम ही निकलता है। ई.डी. के ताज़ा छापों में हाईकोर्ट द्वारा छापों पर निगरानी के लिए वारंट अधिकारी नियुक्त कर दिया गया है। एक तरफ ‘आप’ इसे बदलाखोरी की कार्रवाई करार दे रही है और दूसरी तरफ ई.डी. इसे ‘प्रीवैन्शन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट’ के तहत नियमित जांच बता ही है। ताज़ा छापे मुख्य रूप में कृषि ज़मीन को रिहायशी और व्यापारिक इस्तेमाल के लिए तबदील करने (सी.एल.यू.) देने, व्यापक स्तर पर ज़मीनों अधिकृत करने में भ्रष्टाचार, निजी बिल्डरों को विशेष रियायतें देना तथा कथित अतिरिक्त लाभ देने के मामलों से जुड़े हुए हैं। ये छापे मोहाली में लगभग 5000 एकड़ ज़मीन अधिकृत किए जाने से भी संबंधित बताए जा रहे हैं। हम समझते हैं कि राजनीतिक बदलाखोरी के लिए किसी भी सरकार द्वारा की गई कार्रवाइयां रोकना ज़रूरी हैं, परन्तु सच-मुच के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए की गईर् कार्रवाइयों को कोई अदालत भी नहीं रोकेगी। 
उड़ान वालो उड़ानों पे वक्त भारी है,
परों की अब के नहीं हौसलों की बारी है।
—वसीम बरेलवी
पंजाबियों के लिए सोचने का समय 
किसी भी देश या कौम की आबादी स्थिर अर्थात् जितनी आज है, उनती ही लगातार रखनी हो तो उस देश या कौम का टी.एफ.आर. (टोटल फर्टिलिटी रेट) अर्थात् प्रति जोड़ा औसत 2.1 बच्चे पैदा करने ज़रूरी हैं। यदि यह औसत इससे कम होती है तो उस कौम या देश की आबादी भी कम होगी, यदि बढ़ती है तो आबादी भी बढ़ेगी। वास्तव में समूचे पंजाब की टी.एफ.आर. राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय टी.एफ.आर. के मुकाबले बहुत कम हो गई है, जो कि चिन्ता की बात है। देश स्तर पर टी.एफ.आर. इस समय 1.9 है। विश्व स्तर पर हिन्दुओं की टी.एफ.आर. 2.4 है। ईसाइयों की 2.7 टी.एफ.आर. है और मुसलमानों की 3.1 है, परन्तु सिखों की टी.एफ.आर. 1.2 से 1.6 है जो औसत 1.4 है, परन्तु अब 2024 की सरकारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट ने नया खुलासा किया है कि सिखों की ही नहीं, समूचे पंजाब वासियों की टी.एफ.आर. भी 1.4 ही रह गई है जो पंजाबियों के लिए खतरे की घंटी है। पंजाब के दो प्रमुख पड़ोसी राज्यों हरियाणा की जन्म दर 1.9 है तथा राजस्थान की 2.3 है। हां, पड़ोसी हिमाचल की जन्म दर भी 1.5 ही है। यह स्थिति सिखों तथा पंजाबियों दोनों के लिए बेहद सोचने वाली है। 
आज यहां हम हैं कल कोई और यहां होगा मालिक,
सोचो! सोचो!! सोचो!!! कोई खेल तमाशा हो जैसे।
—लाल फिरोज़पुरी 
-1044, गुरु नानक स्ट्रीट, समराला रोड, खन्ना
-मो. 92168-60000

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