पुन: दोस्ताना संबंध

भारत के अपने कुछ पड़ोसियों के अतिरिक्त विश्व भर के ज्यादातर देशों के साथ संबंध बेहतर बने रहे हैं। चाहे अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने विश्व भर में टैरिफ के मामले पर और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक नियमों की परवाह न करते हुए एक तरह का बवाल पैदा करके रख दिया है, जिसकी ज़द में ज्यादातर देश आ गए हैं। ईरान के साथ सीधे टकराव का प्रभाव भी भारत सहित विश्व के ज्यादातर देशों पर देखा जा सकता है। अपनी नीतियों से ट्रम्प ने अपने अमरीका के ज्यादातर मित्र देशों को भी उससे दूरी बनाए रखने के लिए विवश कर दिया है। उन्होंने बिना किसी कारण वेनेजुएला पर हमला करके वहां के राष्ट्रपति को गिरफ्तार कर लिया। यूरोप के देशों को भी उन्होंने अपनी अनुचित नीतियों के कारण नाराज़ कर लिया है। ग्रीनलैंड को हथियाने का लालच दिखाने के कारण यूरोपीयन यूनियन के देश भी एक तरह से उनके विरुद्ध खड़े हो गए हैं।
सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि सैकड़ों वर्ष के पड़ोसी देश कनाडा के साथ भी उनके संबंध बुरी तरह बिगड़ चुके हैं। ट्रम्प ने तो यहां तक भी कह दिया था कि वह कनाडा को अपना एक प्रदेश बनाने की इच्छा रखते हैं। दूसरी ओर भारत और कनाडा आपसी संबंध सुधारने के लिए तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत के कनाडा के साथ संबंध बेहद पुराने हैं। बस्तीवाद के समय कनाडा ब्रिटेन के अधीन था। इसलिए उस समय भी भारतीय मूल के लोग वहां बिना किसी रुकावट से जा सकते थे। आज तो भारतीय, विशेष रूप से पंजाबी परिवार बड़ी संख्या में कनाडा में बसे हुए हैं और वहां के नागरिक बने हुए हैं। कनाडा ने भी भारतीयों के लिए अक्सर अपने द्वार खोले रखे हैं। दोनों देशों का व्यापार भी तेज़ी से आगे बढ़ता रहा है परन्तु दोनों देशों के संबंध वर्ष 2023 में उस समय बिगड़ गए जब खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर, जोकि कैनेडियन नागरिक बन चुका था, की कुछ लोगों ने गोलियां मार कर हत्या कर दी थी। उस समय जस्टिन ट्रूडो कनाडा के प्रधानमंत्री थे। निज्जर की हत्या को जस्टिन ट्रूडो की सरकार द्वारा भारतीय खुफियां एजेंसियों के साथ जोड़ा गया था। जिसके बाद दोनों देशों के संबंध इस कद्र बिगड़ गए कि उन्होंने अपने दूतावासों में भी एक तरह से स्टाफ में काफी कटौती कर दी थी और व्यापार के साथ-साथ प्रत्येक तरह का आपसी मेल-मिलाप भी बेहद कम कर लिया था। ट्रूडो के बाद मार्च, 2025 में मार्क कार्नी प्रधानमंत्री बने, जिन्होंने बड़े कदम उठाते हुए भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने को प्राथमिकता दी। इसी वर्ष मार्च के महीने में दोनों देशों का आपसी सहयोग और मेल-मिलाप बढ़ता दिखाई दिया। इसमें कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद की भी अहम भूमिका रही।
विगत दिवस संयुक्त राष्ट्र के चल रहे सम्मेलन में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अनीता आनंद की भेंटवार्ता हुई, जिसमें व्यापारिक, आर्थिक, सुरक्षा और लोगों के स्तर पर पुन: सहयोग को प्राथमिक स्तर पर लाने की योजना बनाई गई। यहां तक कि वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को भी दोगुणा करने का  प्रण किया गया। चाहे अमरीकी प्रशासन ने दोनों देशों के सहयोग संबंधी उंगुलियां ज़रूर उठाई हैं परन्तु भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अमरीका के विरोध में खड़े और दुश्मन देशों के साथ भी निर्धारित नीति के तहत अपने संबंधों को और बढ़ाने को प्राथमिकता दी है। कनाडा के साथ पुन: बन रहे दोस्ताना संबंधों को भारत की अंतर्राष्ट्रीय नीति की एक और बड़ी सफलता माना जा सकता है, जिसका प्रभाव विशेष रूप से पंजाब में भी देखा और महसूस किया जाएगा।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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