अनियंत्रित होती अवैध खनन की समस्या
पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा पंजाब के ज़िला होशियारपुर में बड़े स्तर पर हो रहे अवैध खनन की समस्या को केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंप देने का फैसला एक ओर जहां प्रदेश में इस समस्या की गम्भीरता को प्रकट करता है, वहीं इससे यह भी पता चलता है कि एक नहीं, अपितु एकाधिक माफिया प्रदेश की धरती का सीना छलनी करने हेतु तुले हुए हैं। पंजाब में रेत, बजरी और मिट्टी की अवैध खुदाई की समस्या न तो कोई नई बात है, न पहली बार इस समस्या की गम्भीरता का पता चला है। विगत लगभग तीन साढ़े तीन दशक पूर्व इस समस्या ने एकाकी तौर पर सिर उठाया था जब रेत और बजरी के दाम एकाएक बढ़ने शुरू हुए थे, किन्तु देखते ही देखते इस समस्या ने कुकुरमुत्तों की तरह पूरे प्रदेश को अपने अजगर-पाश में ले लिया। आज समस्या यह हो गई है कि इस अवैध खनन के कारण न केवल कृषि भूमि एवं सम्पूर्ण पर्यावरण को खतरा उत्पन्न हुआ है, अपितु इस अवैध कृत्य ने देश की सीमाओं तक को खतरे में डाल दिया है। इसका संकेत भारतीय सीमा सुरक्षा बल ने तो कई बार दिया है, अब सैनिक धरातल पर इसे लेकर चिंता व्यक्त की गई है। इस अवैध खनन के कारण पेड़-पौधों की भी बड़ी हानि होती है। इसी कारण इस समस्या को लेकर न्यायिक धरातल पर भी हलचल हुई, तथा पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी समस्या की गम्भीरता के धरातल को छूते हुए अन्तत: इसे केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने का फैसला किया है।
पंजाब में जब तक रेत-बजरी-मिट्टी की खुदाई सरकार और प्रशासन के नियंत्रण में रही, तब तक इन पदार्थों के दाम भी काबू में रहे, किन्तु जैसे-जैसे अवैध खनन बढ़ता गया, इनकी कीमतें आकाश छूने लगीं। अवैध खनन का कार्य बेशक कुछ दबंगों के अधिकार क्षेत्र में रहा हो, किन्तु इस कार्य को सत्ता का संरक्षण और राजनीतिज्ञों की मिलीभुगत हासिल हो जाने से अवैध खनन माफिया के लोग अनियंत्रित और ब़ेखौफ होते चले गये। इसका परिणाम यह निकला कि अवैध खनन रोकने की कोशिश करने वाले कई प्रशासनिक अधिकारियों की हत्या तक कर दी गई। कई अन्यों को अवैध खुदाई का सामान लेकर जाने वाले वाहनों के नीचे कुचल कर मार दिया गया। उन पर हमले किये गये जिससे भय और तनाव का वातावरण बनना शुरू हुआ।
अवैध खनन माफिया कालान्तर में इतना शक्तिशाली होते चला गया कि प्रदेश मेें गठित होने वाली प्रत्येक सरकार इसके समक्ष असहाय सिद्ध होते चली गई। इसका परिणाम यह निकला कि भिन्न-भिन्न राजनीतिक दलों की सरकारें आती-जाती रहीं किन्तु अवैध खनन माफिया का अजगर-पाश निरन्तर बढ़ता चला गया। यही कारण है कि आज प्रदेश के ज़िला होशियारपुर में स्थिति यह हो गई कि प्रशासनिक तंत्र की सम्पूर्ण विफलता के दृष्टिगत, अदालत को इस ज़िला के अवैध खनन की पूरी समस्या केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंपना पड़ी है। इस हेतु बड़ा कारण प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल किया गया शपथ पत्र बना बताया जाता है जिसमें सरकार ने दावा किया था कि जिला भर के 31 स्टोन-क्रशर स्थलों में से कोई भी चालू नहीं है, किन्तु अदालती जांच-पड़ताल में पाया गया कि 26 केन्द्र चालू स्थिति में थे। सम्भवत: इसी आधार पर उच्च अदालत ने सम्बद्ध ज़िम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए केन्द्रीय जांच ब्यूरो को अधिकार दिया है। इस हेतु सम्पूर्ण सम्भावित खर्च की ज़िम्मेदारी भी सरकार पर आयद की गई है। अवैध खनन से बढ़ते खतरों का अनुमान इस एक तथ्य से भी लगाया जा सकता है कि अधिकतर खेतों में से 20 फुट से लेकर 60,90 और कहीं-कहीं 110 फुट तक खुदाई कर दी गई है। इससे जहां भूमि के कटाव का खतरा बढ़ा है, वहीं कानून-व्यवस्था का संकट पैदा होने का भी पता चला है।
कई गांवों में लोग अवैध खनन माफिया के विरुद्ध खड़ा होने लगे हैं। पठानकोट के कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने अवैध खनन करने वालों को घेरा तो वे अपना सामान छोड़ कर भाग खड़े हुए। अदालत के ऐसी स्थितियों का पता चलने पर उसने हवाई सर्वेक्षण की भी इजाज़त दी है। अवैध खनन से उपजी समस्या यूं तो पूरे प्रदेश में है, किन्तु प्रदेश में नदियों का उद्गम-स्रोत होने के कारण होशियारपुर और पठानकोट वर्तमान में समस्या के मुख्य केन्द्र बन कर उभरे हैं। हम समझते हैं कि होशियारपुर ज़िला में इस समस्या की ज़िम्मेदारी अदालत द्वारा सी.बी.आई. को सौंपे जाने के बाद अब कोई निर्णायक पथ तलाश किये जाने की सम्भावनाएं बढ़ गई हैं। सरकार को चाहिए कि वह अपनी पूरी ताकत के साथ इस अवैध खनन माफिया पर अंकुश लगाये, और फिर इसके सबूत केन्द्रीय जांच ब्यूरो के जांच दल के समक्ष सौंपे।
नि:संदेह सरकार को इस हेतु प्रशासनिक अधिकारियों की ज़िम्मेदारी और जवाबदेही निर्धारित करनी चाहिए। अवैध खनन माफिया को यदि अब भी नहीं रोका गया तो स्थितियों के वश के बाहर हो जाने का भी बड़ा खतरा है। हम समझते हैं कि इस प्रकार के सतत् और सम्पूर्ण इच्छा-शक्ति के साथ उठाये गये कठोर पगों से ही इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है।

