प्रत्येक वर्ष लाखों मौतों का कारण बन रहा सीसा
स्वास्थ्य की सम्भाल ज़रूरी है। रसोई के चमचमाते बर्तन देखकर या बच्चों को रंगे-बिरंगे खिलौने देकर खुश मत हों। घर की खूबसूरती बढ़ाने वाले रंगों की रंगत और मसाले का स्वाद भी आपकी सेहत के लिए बड़ा खतरा हैं। कारण है सीसा (लेड), क्योंकि इनके निर्माण में सीसे का इस्तेमाल होता है। सीसा दैनिक उपयोग चीजों के ज़रिए शरीर में पहुंच कर सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बताया है कि दुनिया भर में हर साल 35 लाख से अधिक लोगों की मौत के पीछे कहीं न कहीं सीसा ही ज़िम्मेवार है। बच्चों के लिए यह ज्यादा खतरनाक है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सभी देशों से सीसे के स्रोतों को खत्म करने, नियमों को सख्ती से लागू करने और निगरानी व्यवस्था मज़बूत करने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि सीसे के ज़हरीले प्रभावों से लोगों को बचाने और इसके संपर्क से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सीसा विषाक्तता रोकथाम सप्ताह मनाया जा रहा है जिसका थीम है ‘पता लगाने से रोकथाम तक’।
सेहत पर प्रभाव
यह एक न्यूरोटॉक्सिन है जो बच्चों के मस्तिष्क के विकास को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकता है और सीखने की क्षमता, ध्यान और व्यवहार को प्रभावित करता है। वयस्कों में यह सिरदर्द, याददाश्त में कमी और तंत्रिका विकारों का कारण बनता है। सीसा शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को रोकता है जिससे खून की कमी हो सकती है। यह रक्तचाप को बढ़ाता है और हृदय रोगों का खतरा पैदा करता है। लंबे समय तक संपर्क में रहने से किडनी की कार्यक्षमता को नुकसान पहुंचता है। यह पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है, हार्मोनल असंतुलन और गर्भस्थ शिशु के विकास में बाधा का कारण बन सकता है। सीसा शरीर में जाने के बाद हड्डियों और दांतों में कैल्शियम की जगह जमा होने लगता है और समय के साथ बढ़ता रहता है।
प्रदूषण के स्रोत
सीसा आधारित उत्पादों की गलाई, शोधन, खनन और विनिर्माण वायुमंडल में सीसा छोड़ते हैं। बैटरी, रंग, सिरेमिक और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग सबसे बड़े योगदानकर्ता हैं। ऐतिहासिक रूप से सीसायुक्त पेट्रोल सीसे के उत्सर्जन का एक प्रमुख वैश्विक स्रोत था। भारत ने 2000 में सीसायुक्त पेट्रोल चरणबद्ध तरीके से बंद किया, लेकिन पुराने वाहन, रेडिएटर में सीसा सोल्डर और उच्च यातायात क्षेत्रों में ब्रेक की धूल अभी भी योगदान देती है। सीसा आधारित रंग भारत में तब तक व्यापक रूप से उपयोग किए जाते थे। कारों, इनवर्टर और टेलीकॉम टावरों में लेड एसिड बैटरी अनुचित तरीके से पुनर्चक्रित सीसे का प्रमुख स्रोत है।
पर्यावरण को नुकसान
सीसा एक ऐसी विषैली धातु है जिसका संपर्क कई रोज़मर्रा की वस्तुओं और पर्यावरणीय स्रोतों के ज़रिए हो सकता है। इसकी थोड़ी-सी मात्रा भी शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकती है। डब्ल्यूएचओ के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन हेल्थ विभाग के कार्यवाहक निदेशक ब्रूस गॉर्डन का कहना है कि सीसे के संपर्क में आने के कई प्रमुख स्रोतों की पहचान हो चुकी है और इससे बचाव के प्रभावी तरीके भी मौजूद हैं। सीसे से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए डब्ल्यूएचओ वैश्विक स्तर पर प्रयास तेज़ करने की तैयारी कर रहा है। सदस्य देशों ने सीसे के संपर्क को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता मानते हुए संगठन को इसके दुष्प्रभावों में कमी लाने के लिए एक वैश्विक कार्ययोजना तैयार करने की अपील की है। इस योजना को 2027 में विश्व स्वास्थ्य सभा के सामने पेश किया जाएगा।
इसके अलावा डब्ल्यूएचओ ने सीसा विषाक्तता की रोकथाम के लिए 2027 में एक ‘तकनीकी पैकेज’ भी जारी करने की बात कही है। इसके ज़रिए देशों को यह पहचानने में मदद मिलेगी कि सीसे के संपर्क के सबसे बड़े स्रोत कौन-से हैं, किन उपायों से सबसे अधिक लाभ मिल सकता है और नियमों को प्रभावी ढंग से कैसे लागू किया जाए। (एजेंसी)



