चालक, कंडक्टर सहित सभी आरोपी बरी


मोगा, 17 जुलाई (गुरतेज सिंह/अशोक बांसल)-उस समय की मौजूदा अकाली सरकार के गले की हड्डी बने चर्चित मोगा ऑर्बिट बस कांड में शामिल सबूतों की कमी के चलते आज मोगा अदालत की तरफ से सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। थाना बाघा पुराना में उस समय दर्ज की एफ.आई.आर. के अनुसार 29 अप्रैल 2015 को मोगा से बाघा पुराना जा रही ऑर्बिट बस में दलित परिवार के साथ सबंधित शिन्दर कौर पत्नी सुखदेव सिंह निवासी लंढेके जो कि अपनी 13 वर्षीय बच्ची अरशदीप कौर और बेटे अकाशदीप के साथ बाघा पुराना जा रही थी। जब बस मोगा-बाघा पुराना के बीच गिल गांव के पास पहुंची तो बस के कंडक्टर समेत हैल्परों ने शिन्दर कौर और उसकी बेटी के साथ अश्लील हरकतें करने के बाद बस में से धक्का दे दिया था जिस दौरान अरशदीप कौर की बस में से गिरने से मौके पर मौत हो गई थी जब कि मां शिन्दर कौर गंभीर रूप में घायल हो गई थी। इस सबंधित थाना बाघा पुराना में बस का चालक रणजीत सिंह पुत्र प्यारा सिंह निवासी चक्क राम सिंह वाला (बठिंडा), कंडक्टर सुखविन्दर सिंह उर्फ पंमा पुत्र इकबाल सिंह निवासी बहावल (अबोहर), हैल्पर गुरदीप सिंह उर्फ जिम्मी पुत्र सुरिन्दर सिंह निवासी दश्मेश नगर मोगा और एक ओर हैलपर अमर राम उर्फ रामा पुत्र नूरा राम निवासी चक्क बखतू (बठिंडा) को शामिल करके  उन पर मामला दर्ज किया था। इस मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब घटना की पीड़ित मुख्य मुदैयी शिन्दर कौर 9 फरवरी 2016 को अपने बयानों से यह कह कर मुकर गई कि वह उस समय बेहोश थी और उस की बेटी की मौत कैसे हुई, उसे पता नहीं। उसने अदालत में यह भी बताया था कि बस कंडक्टर के साथ सिर्फ पांच रुपए के लेने-देने में झगड़ा हुआ था जब कि किसी ने भी उनके साथ अश्लील हरकतें नहीं की थीं। उस से पहला शिन्दर कौर के पति सुखदेव सिंह ने 11 दिसंबर 2015 को अदालत में दिए बयान में कहा था कि उसे किसी बात का पता नहीं था और न ही किसी पारिवारिक मैंबर ने उसे बताया था, उसे तो उस समय पता लगा जब वह अस्पताल पहुंचा। अदालती प्रक्रिया में चलता यह केस उस समय कमजोर हो गया, जब मुख्य मुदैयी अपने पहले दिए बयानों से मुकर गए। 2 साल 6 महीने के करीब चले बहुचर्चित मोगा ऑर्बिट बस कांड के आज फैसले दौरान बचाव पक्ष के वकील रमनदीप सिंह औलख और अनूप इन्द्र सिंह सेखो द्वारा दी दलीलों और सबूतों की कमी के चलते माननीय अदालत ने इस मामले में शामिल चारों दोषियों को बरी करने के आदेश के दिए।