डिस्कस थ्रो के अंतर्राष्ट्रीय पैरा खिलाड़ी हैं रोहित हुड्डा


कहने को तो रोहित हुड्डा हरियाणा प्रांत के खिलाड़ी हैं, लेकिन वह समूचे भारत का गौरव हैं, जिनको अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का गौरव प्राप्त है। इस गौरवशाली खिलाड़ी का जन्म ज़िला रोहतक के गांव कलोई खास में पिता दिलावर सिंह के घर माता सुनीता देवी की कोख से 5 अगस्त, 1992 को हुआ। रोहित हुड्डा ने अभी बचपन में पांव ही रखा था कि उसे तेज बुखार हो गया और माता-पिता इलाज करवाने के लिए डाक्टर के पास ले गए। अब इसको डाक्टर की लापरवाही कहें या फिर रोहित की किस्मत कि डाक्टर द्वारा लगाए गए गलत टीके ने उनकों दाएं हाथ से विकलांग कर दिया और बाद में उनका हाथ काटना पड़ा। रोहित चाहे मजबूर था लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, बल्कि वह अपने जीवन में आगे बढ़ा और अपनी शुरुआती शिक्षा को हासिल किया। उन्होंने गांव के ही कलोई खास सीनियर सैकेंडरी स्कूल से बारहवीं की पढ़ाई की और ग्रजुऐशन एम.बी. यूनिवर्सिटी रोहतक से की।
रोहित को पढ़ाई के साथ-साथ खेलों का शौक पैदा हुआ और वह एथलैटिक के कोच राजेश कुमार के सम्पर्क में आए और उनसे एथलैटिक की ट्रेनिंग लेनी शुरू की। फिर वह डिस्कस थ्रो के अच्छे खिलाड़ी साबित हुए और वह पैरा खिलाड़ी के तौर पर खेलने लगे। सन् 2014 में उन्होंने पहली बार हरियाणा में हुए नैशनल स्पोर्ट एचीवमैंट खेलों में भाग लिया। वर्ष 2015 में 15वीं सीनियर नैशनल पैरा एथलैटिक चैम्पियनशिप जोकि गाज़ियाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुई, उसमें उन्होंने डिस्कस थ्रो और शॉटपुट में खेल कर दो स्वर्ण पदक अपने नाम करके हरियाणा राज्य का गौरव बढ़ाया। सन् 2016 में सीनियर पैरा एथलैटिक चैम्पियनशिप पंचकूला में भाग लिया, जिसमें उन्होंने डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक, जैवलिन थ्रो में रजत पदक और शॉटपुट में कांस्य पदक जीता। सन् 2017 में जयपुर में हुई 17वीं सीनियर पैरा एथलैटिक चैम्पियनशिप में रोहित ने डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक और शॉटपुट में रजत पदक फिर अपने नाम किया।
सन् 2017 में लंदन में हुई पैरा विश्व चैम्पियनशिप में रोहित ने डिस्कस थ्रो में रजत पदक हासिल ही नहीं किया, अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना चौथा स्थान हासिल करने में कामयाब हुए। आजकल रोहित कुमार अपने कोच राजेश कुमार रोहतक से कोचिंग लेकर आने वाले एशियाई खेलों की तैयारी कर  रहे हैं। रोहित हुड्डा ने बताया कि वह हर रोज अपने गांव कलोई खास से अपनी प्रैक्टिस के लिए बस से सफर करके आते हैं और वह लगातार मेहनत कर रहे हैं। उनको पूरा विश्वास है कि वह एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करके डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीतकर भारत माता की झोली में अवश्य डालेगा। रोहित ने यह भी बताया कि वह अब खेल विभाग भारत सरकार की ओर खेल रहा है और उसका खर्च भी खेल मंत्रालय ही कर रहा है, लेकिन अभी भी सरकार को खास करके पैरा खिलाड़ियों के लिए और प्रयास करने की ज़रूरत है ताकि देश के पैरा-खिलाड़ी मायूस न हो कर देश केलिए बड़ी उपलब्धियां को हासिल करें।