पाक में सक्रिय आतंकवादी संगठन स्वयं उसके लिए बन रहे हैं खतरा


अमृतसर, 5 अप्रैल (सुरिन्दर कोछड़): चरमपंथी व आतंकवादी संगठनों के गढ़ बन चुके पाकिस्तान के राज्य पंजाब व खैबर पख्तूनखवा में लगभग 700 छोटे-बड़े धार्मिक चरमपंथी संगठन मौजूद हैं, जो पाकिस्तान में सक्रिय प्रमुख 37 के लगभग अन्य आतंकवादी संगठनों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करबा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् द्वारा गत दिवस जारी की गई आतंकवादियों की ताज़ा सूची में इन संगठनों में मुम्बई हमलों के साज़िशकर्ता लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख ह़ािफज़ सईद सहित आइमान अल-जवाहरी, जैश-ए-मोहम्मद, अ़फगान स्पोर्ट कमेटी, लश्कर-ए-जांगवी, अल अख्तर ट्रस्ट इंटरनैशनल, हरकुतल ज़हाद इस्लामी, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, जमातुल अहिरार व खातीबा इमाम अल-बुखारी आदि व्यक्तियों व संगठनों के नाम शामिल किए जाने का सार्वजनिक तौर पर खुलासा होने उपरांत पाकिस्तान सरकार की धड़कनें तेज़ हो चुकी हैं। बताया जा रहा है कि उक्त संगठन व व्यक्ति इंटरपोल को बांछित हैं और आतंकवादी गतिविधियों में पूरी तरह से शामिल हैं। उधर पाकिस्तान सरकार का दावा है कि पाक में सक्रिय प्रमुख तीन दर्जन आतंकवादी संगठनों में 14 अगस्त, 2001 को लश्कर-ए-जांगवी व सिपाहे-ए-मोहम्मद पाकिस्तान संगठन पर, 14 जनवरी 2002 को जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा व सिपाहे-सहाबा पाकिस्तान, तहरीक-ए-ऩिफाज़-ए-शरीयत-ए-मोहम्मद, तहरीक-ए-इस्लामी संगठन, 28 जनवरी, 2002 को तहरीक-ए-ज़ाफरिया पाकिस्तान, 17 मार्च 2003 को अल-कायदा संगठन, 15 नवम्बर, 2003 को मिलात-ए-इस्लामिया पाकिस्तान, खुदम-उल-इस्लाम व इस्लामी तहरीक पाकिस्तान, 20 नवम्बर 2003 को जमात-उल-अनसार, जमात-उल-़फुरकान व हिज़्ब-उल-तरीर, 27 अक्तूबर, 2004 को खैर-उन-नास इंटरनैशनल ट्रस्ट, 7 अप्रैल 2006 को बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी, 21 अगस्त 2006 को इस्लामिक स्टूडैंट्स मूवमैंट आ़फ पाकिस्तान, 30 जून 2008 को लश्कर-ए-इस्लाम, अंसार-उल-इस्लाम व हाजी नामदर ग्रुप, 25 अगस्त, 2008 को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, 8 सितम्बर 2010 को बलोचिस्तान रिपब्लिकन आर्मी, बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट,   लश्कर-ए-बलोचिस्तान, बलोचिस्तान लिबरेशन यूनाइटेड फ्रंट व बलोचिस्तान मुसला द़ेफा तनजीम, 10 अक्तूबर, 2011 को शिया तुलबा एक्शन कमेटी गिलगत, मरकज़ सबील आर्गेनाईज़ेशन गिलगत, तनज़ीम नौजवानां-ए-अहले सुंनत व पीपल्ज़ अमन कमेटी (लियारी), 15 फरवरी 2012 को अहलै सुंनत वल जमात और 6 मार्च 2012 को आल हरमन फाऊंडेशन कुल 33 प्रमुख आतंकवादी संगठनों पर पाबंदी लगाई जा चुकी है, जबकि पाक के दावे के विपरीत उक्त में अहलै सुंनत वल जमात, लश्कर-ए-जांगवी, जैश-ए-मोहम्मद व लश्कर-ए-तैयबा द्वारा लगभग हर सप्ताह पाकिस्तान के विभिन्न शहरों, कस्बों में सार्वजनिक रैलियां की जा रही हैं और बकायदा इन कार्रवाईयों की खबरें उपरोक्त संगठनों द्वारा अपनी वैबसाईट और सोशल मीडिया पर भी जारी की जा रही हैं। वर्णनीय है कि पाक सरकार द्वारा पाबंदी लगाए बताए या अहलै सुंनत वल जमात संगठन के प्रमुख नेताओं औरंगज़ेब फारूकी और अता मोहम्मद दशानी द्वारा गत दिवस गांव बत्ताग्राम में सार्वजनिक रैली करके पाकिस्तान पर भारतीय फौज़ों को संयुक्त तौर पर ललकारते हुए पाकिस्तान के कश्मीरी नौजवानों को हथियारों की सिखलाई लेने के लिए प्रेरित किया गया।सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार उपरोक्त संगठनों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर नैशनल लिबरेशन फ्रंट, अल-बदर, अल-शम्स, अल-फुकराह, हरकत-उल-जिहाद, अल-इस्लामी, अल-बदर, जम्मू-कश्मीर, हरकत-उल-मुजाहिद्दीन, हरकत-उल-निसार, अल-फरान, हरकतुल मुजाहिदीन, हज़बुत तहरीर विलाइयाह पाकिस्तान, लश्कर-ए-उमर, अंसार-उल-इस्लाम, शूरा-ए-इत्तेहादुल मुजाहिदीन, अमर बिल मुआफ संगठन के प्रशिक्षण शिविर मौजूदा समय पाकिस्तान के शहरों रावलपिंडी, वज़ीरस्तान, बहावलपुर, इस्लामाबाद, मानसिहरा, डेरा गढ़ी हबीबुल्ला, मुजफराबाद, कोटली, खोसत, खैबर एजेंसी के बाराह इलाके को सहित पूर्वी अफगानिस्तान में कायम हैं। ये संगठन भारत के साथ-साथ पाकिस्तान सहित अन्य देशों के लिए भी बड़ा खतरा बने हुए हैं।