प्लास्टिक का सामान बांट रहा है भयानक बीमारियां


गुरदासपुर, 7 जून (अ.स.): आधुनिक युग में अभिभावकों द्वारा बच्चों को प्लास्टिक की बोतलों में दूध पिलाने को प्राथमिकता दी जा रही है, क्योंकि इन बोतलों का भार बहुत ही कम होता है तथा यह बोतलें न टूटने वाली होने के कारण सफर में साथ लेकर जानी भी आसान हैं। विभिन्न संस्थाओं के सर्वे अनुसार 2017 के अंत तक 2469.9 मिलियन डॉलर के बराबर प्लास्टिक की बोतलों की खरीद हुई। ऐसा ही हैरान करने वाला खुलासा किया है भारत की टोकसिस लिंक संस्था ने। संस्था अनुसार बच्चों के दूध की बोतलें, प्लास्टिक के पानी पीने वाले कप व भोजन पैक करने वाले प्लास्टिक के बर्तन बनाने में विस्फोनेल-ए नाम का कैमीकल प्रयोग किया जाता है जिससे चमड़ी रोग, कैंसर रोग, बांझपन व दिल के रोगों से संबंधित बीमारियां लगने की आशंका बढ़ जाती है। उपरोक्त उपकरण बनाने के लिए बी.पी.ए. नाम के कैमीकल के प्रयोग से उपरोक्त सभी बीमारियों को जन्म देता है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2014 में पर्यावरण प्रबंधक विभाग द्वारा भारतीय बाज़ार में एकत्र कीं विभिन्न कम्पनियों की बच्चों के दूध पीने वाली बोतलों में पाया गया कि बी.पी.ए. की मात्रा इन बोतलों में ही होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार 4.5 किलो के बच्चे की 700 मिलीलीटर प्रति दूध पीने की समर्था होती है जिसमें उसके हर बार दूध पीने से लगभग 19 मिलीग्राम के लगभग बी.पी.ए. की मात्रा बच्चे के शरीर में जाती है।
प्लास्टिक को दोबारा प्रयोग में लाने के लिए भी प्रयोग किया जाता है ‘बिस्फोनेल-ए’ :
इस कैमीकल की खोज 1890 में एक रूसी रसायनिक वैज्ञानिक द्वारा की गई थी। इस कैमीकल का प्रयोग प्लास्टिक के बनने वाले कई तरह के सामान के अतिरिक्त प्लास्टिक को दोबारा प्रयोग में लाने के लिए भी किया जाता है। यह कैमीकल बहुत शीघ्र पानी में घुलनशील होता है। इस कैमीकल से बने प्लास्टिक का सामान गर्म या ठंडे पदार्थ के सम्पर्क में आने पर भी नहीं टूटता। क्या होने चाहिए प्रयास : टोकसिस लिंक संस्था द्वारा इस कैमीकल को लेकर जो हैरानीजनक खुलासे किए गए हैं तथा इनसे निकलने वाले गंभीर परिणामों से बचने के लिए जो प्रयास करने चाहिएं, उस बारे भी यह संस्था बताती है कि विश्व में विभिन्न देशों द्वारा बच्चों के खाने-पीने के लिए बनने वाले प्लास्टिक के बर्तन व खेलने के लिए प्रयोग किए जाने वाले खिलौने बनाने के लिए पहले से ही पाबंदी लगा दी गई है। यहां तक कि कैनेडा विश्व का पहला देश है, जिसने बी.पी.ए. से संबंधित बच्चों की दूध की बोतलों की बिक्री, निर्यात व यहां तक कि विज्ञापन देने पर पाबंदी लगा दी गई है। इसकी जगह पर बी.पी.ए. मुक्त प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का ही प्रयोग करने की सलाह संस्था द्वारा लोगों को दी गई है। यहां तक कि बाज़ार में बच्चों के लिए तथा घरेलू प्रयोग के लिए खरीदे जाने वाले प्लास्टिक के सामान पर बी.पी.ए. मुक्त लिखा सामान ही खरीदना चाहिए।