कैसे बनती है रोशनी?


दुनिया का सबसे बड़ा रहस्य है, ‘रोशनी’ यानी लाइट। हमें यह तो पता है कि लाइट एक प्रकार की ऊर्जा है, जैसे हिक हीट, रेडियो तरंगें व एक्स-रे हैं। लाइट की स्पीड, फ्रीक्वेंसी व उसकी तरंगों की लम्बाई को मापा जा सकता है। हमें लाइट की स्पीड भी मालूम है। यह लगभग 1,86,000 मील प्रति सैकंड की रफ्तार से चलती है। इसका अर्थ यह हुआ कि एक वर्ष में लाइट 5,880,000,000,000 मील चलती है। इसी  फासले को खगोल शास्त्री लाइट ईयर कहते हैं। बाहरी स्पेस में दूरी मापने की यह इकाई है। लेकिन लाइट चलती कैसे है? इसके बारे में अनेक सिद्धांत हैं-सत्रहवीं शताब्दी में सर ‘आइज़क न्यूटन’ ने कहाकि ‘लाइट छोटी-छोटी गोलियों से बनी होगी, जो रोशनी के स्रोत से छोड़ी जाती होगी’ लेकिन यह थ्यौरी लाइट से संबंधित अन्य बातों को न बता सकी। ‘क्रिश्चयन ह्मूजेंस’ नामक एक व्यक्ति ने लाइट को वेब थ्योरी विकसित की, उसके अनुसार ‘जिस तरह तालाब में पत्थर मारने पर लहरें बनना शुरू हो जाती हैं, उसी तरह कोई ल्यूमिनस या चमकीला पदार्थ रोशनी की तरंगें शुरू कर देता है।’ लगभग 150 सालों तक यह बहस होती रही कि लाइट छोटी-छोटी गोलियां हैं या लहर। लेकिन जैसे-जैसे लाइट के अन्य प्रभाव सामने आने लगे वैसे-वैसे छोटी-छोटी गोलियों (कोरपसक्लिस) की थ्यौरी पीछे रह गयी। आज वैज्ञानिकों का मानना है कि लाइट दोनों, कण व लहर के रूप में बर्ताव करती है