झारखंड चुनाव : छोटी जंग, बड़ी रस्साकशी


झारखंड में पांच चरणों में चुनाव हो रहा है और 23 दिसम्बर को नतीजे भी आ जाएंगे। महाराष्ट्र के चुनाव के पश्चात एक बात यह भी सामने आई कि कोई किसी का सगा नहीं है सब अपने-अपने दाव पर लगे हैं। तीन दशकों से पुरानी मित्रता शिव सेना भी निभा न सकी। खैर, अब कुछ  ऐसा ही झारखंड के चुनाव में देखने को मिलने वाला है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार में महत्त्वपूर्ण विभाग के मंत्री राम विलास पासवान को लोक जन-शक्ति पार्टी ने बिहार के पड़ोसी राज्य झारखंड में भाजपा के सामने अपने कुछ प्रत्याशी चुनाव में उतारने की घोषणा कर दी है। कुछ यही हाल बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाईटड के अध्यक्ष ने भी लंगर-लंगोटे कस कर चुनाव में उतरने का ऐलान कर दिया। हम उन लोगों से सहमत नहीं जो यह कहते हैं कि इन दोनों ने कुल्हाड़ी पर पांव मारा। यह तो लोकतंत्र की खूबसूरती है कि हर कोई चुनाव में उतर जाना चाहता है। सारा देश जानता है कि झारखंड अन्य कई राज्यों से अलग है। आदिवासी बहुल क्षेत्र है। इसके साथ नक्सली लोगों से प्रभावित क्षेत्र भी हैं। इसीलिए सुरक्षा को सामने रखकर भी चुनाव आयोग ने एक छोटे राज्य को पांच हिस्सों में बांट कर प्रजातंत्र को कायम करने की योजना बनाई। गरीबी को हिंसा का बहाना बना कर नक्सलवादी आतंकी खून का खेल खेल रहे हैं। नक्सली किसी विचारधारा के पोषक नहीं हैं। हत्यारों और लुटेरों के ये गिरोह जो विचारधारा और आदर्श का मखौटा ओढ़ कर झारखंड के कुछ लोगों को गुमराह करके अपने साथ मिला लेते हैं। विकास के कट्टर विरोधी हैं और शिक्षा को अपनी विचारधारा के विपरीत समझते हैं। नक्सलियों से झारखंड के इस क्षेत्र को मुक्त कराने के कई प्रयास हुए पर उनका प्रचार, गरीबी के खिलाफ इतना ज़ोरदार रहा कि सरकार बहुत कुछ करके भी उतनी सफलता हासिल न कर सकी।यहां हम राजग यानि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की गांठों को ढीला होता देख रहे हैं। उस गठबंधन को जिसे आज हताश, निराश विपक्षी दलों से उलझना पड़ रहा है वहां अपनी राजनीतिक चालों से यह गठबंधन गुज़र रहा है। बिहार में नितीश कुमार ने राजग की चूलें ढीली करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। केन्द्रीय मंत्रिमंडल में जनता दल (यू.) को शामिल नहीं होने दिया और बिहार की सरकार में भाजपा के मुकाबले पर अपने मंत्रियों की संख्या निरंतर बढ़ाते रहे। जो आने वाले दिनों में राजग को एक असुविधाजनक मोड़ पर लाकर खड़ा कर देगी। राम विलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने इधर-उधर की बातें करके चुनावी रस्साकशी में ज़ोर-अजमाइश शुरू कर दी है। झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास निहायत ईमानदार, शरीफ व मेहनती इन्सान हैं। कोयले की खादानों से निकलने वाला काला-सोना झारखंड की सूरत बदलने में सफल हो रहा है। क्या राम विलास पासवान और नितीश बाबू जो सुशासन की दुहाई तो बहुत देते हैं, लेकिन रघुवरदास के सुशासन की तारीफ दबे शब्दों में भी नहीं करेंगे, क्योंकि उनके दल भाजपा के प्रत्याशियों के सामने चुनाव लड़ेंगे। अभी राष्ट्रीय जनता दल भी चुनाव में उतरने के लिए पंख खोल रहा है। ये सब सत्ता के सौदागर हैं। उनमें से एक  ऑल स्टूडैंट यूनियन ने भी भाजपा के लिए परेशानी पैदा करने के प्रयास कर रहा है। अब रही बात भाजपा के सामने मुख्य विपक्षी दल शिब्बू सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा की, राजग के बिखरे सपनों की किरचियां समेटने के लिए योजना बना रही है। झारखंड के 81 सदस्यीय विधान मंडल का चुनाव 30 नवम्बर से लेकर 20 दिसम्बर तक होना है और 23 दिसम्बर को मतगणना होगी। शिब्बू सोरेन जिसे साधारणतया गुरु जी कहते हैं वह सिंहासन पर अपने बेटे को बिठाने के लिए राजनीतिक जुगाड़ में लगे हैं। किसी को भी उनसे कोई शिकायत नहीं। राजनीति का चुनाव महत्त्वपूर्ण अंग है। हालांकि झारखंड के लोग यह भी जानते हैं कि शिब्बू सोरेन पर कभी भ्रष्टाचार का आरोप भी लगा था। लालू यादव जो राष्ट्रीय जनता दल के सर्वेसर्वा हैं वह भ्रष्टाचार के आरोपों में झारखंड की राजधानी रांची में सज़ा काट रहे हैं। हम यहां केवल नितीश बाबू, राम विलास पासवान जिसे लालू यादव मौसम विज्ञानी कहते हैं, उन्हीं दो नेताओं की बात करेंगे क्योंकि ये दोनों नेता एन.डी.ए. के महत्त्वपूर्ण घटक दलों से नीति निर्धारित करने वाले हैं। राम विलास पासवान समीकरण बनाने में माहिर हैं। सन् 2019 में जब संसदीय चुनाव होने वाला था तब उन्होंने अपनी बात मनवाने के लिए कई तरह के पापड़ बेले थे और अपने लिए राज्य सभा की एक सीट लेने में सफल हुए थे। आजकल भाजपा सरकार में मंत्री हैं। अब रही बात नितीश कुमार की जो संसदीय चुनाव में राजग का एक महत्त्वपूर्ण अंग होते हुए भाजपा और लोक जन शक्ति पार्टी से मिलकर सारी लोकसभा की सीटें जीतने में सफल हुए। हालांकि इन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल के साथ मिलकर अपने कुशल नेतृत्व का एहसास करवाया और बिहार में सरकार बनाने में सफल रहे। लेकिन लालू यादव की असलियत से परे और पुराने युमलों पर आधारित राजनीति से उकता गए। जिस नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध टोपी और तिलक की जुमलेबाज़ी किया करते थे, उसी का दामन थाम कर पुन: एन.डी.ए. की सरकार बना ली। लालू यादव ने खीझ कर नितीश को पल्टू राम का नया नाम दे दिया। अब झारखंड में नितीश बाबू भाजपा के प्रत्याशियों के सामने जनता दल (यू) के प्रत्याशी उतार रहे हैं। अब यदि कुछ लोग लालू यादव के कहे अनुसार नितीश को पल्टू राम कहें तो कोई क्या कहे? चुनाव सिर पर है। जनता चुनाव में हर एक पार्टी, हर एक नेता और हर एक उम्मीदवार को उसकी असलियत बता देती है। यदि रघुवर दास ने अपने राज्य झारखंड की उन्नति के लिए कुछ किया होगा तो जनता उन्हें पुन: समर्थन देगी और यह बाधा-दौड़ में उलझे लोग मुंह ताकते रह जाएंगे।