अन्तर्राष्ट्रीय बेटी दिवस ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान भी पंजाब में बेटियों की संख्या न बढ़ा सका


लुधियाना, 23 जनवरी (पुनीत बावा) : केन्द्र सरकार द्वारा देश भर में शुरू की गई ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के पंजाब में बहुत अच्छे परिणाम सामने नहीं आये। योजना तहत केन्द्र सरकार ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब बिहार व दिल्ली में लड़कियों को जन्म लेने देने पर उनको पढ़ाने की ओर अधिक ध्यान देने की घोषणा की थी। केन्द्र सरकार द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’  योजना को सरकार ने 22 जनवरी 2015 को शुरू किया था व इसके लिए 100 करोड़ रुपए की राशि भी रखी गई थी। 2001 की जनगणना तहत 0 से 6 वर्ष की उम्र की 1 हज़ार लड़कों के पीछे 927 लड़कियां थीं, जबकि 2012 की जनगणना तहत 0 से 6 वर्ष की उम्र की 1 हज़ार लड़कों के पीछे 918 लड़कियां थीं। 2012 में यूनीसेफ की रिपोर्ट में भारत दुनिया के 195 देशों में से 41 स्थान मिला। 26 अगस्त 2016 को ओलंपिक्स में कांस्य पदक जीतने वाली साक्षी मलिक को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’  अभियान में राजदूत बनाया गया। जून 2015 में हरियाणा के बीरीपुर ज़िला जींद के सरपंच सुनील जगलान ने अपनी बेटी नंदनी के साथ सैलफी करके 9 जून 2015 को तस्वीर फेसबुक पर डाल कर लड़की के साथ सैलफी अभियान शुरू किया। देश के विभिन्न भागों से लड़कियों के साथ अत्याचार होने की घटनाओं में बढ़ौतरी हो रही है। लड़कियों से दुष्कर्म, तेज़ाब डालने सहित कई बड़े व छोटे अपराध हो रहे हैं। पंजाब सरकार के बाल कल्याण विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 2013-14 में 1 हज़ार लड़कों के पीछे 890 लड़कियां, 2014-15 में 892 लड़कियां, 2015-16 में 891 लड़कियां, 2016-17 में 902 लड़कियां, 2017-18 में 907 व 2018-19 में 901 है। 2018-19 में एक हज़ार लड़कों के पीछे सबसे अधिक ज़िला लुधियाना में 931 व सबसे कम ज़िला गुरदासपुर में 1 हज़ार लड़कों के पीछे 843 लड़कियां हैं। ज़िला अमृतसर में 894, बरनाला में 905, बठिंडा में 886, फरीदकोट में 912, फतेहगढ़ साहिब में 915, फाजिल्का में 915, फिरोज़पुर में 881, होशियारपुर में 901, जालंधर में 927, कपूरथला में 866, मानसा में 896, मोगा में 907, मोहाली एस.ए.एस. नगर 894, मुक्,कर में 921, नवांशहर में 898, पठानकोट में 888, रूपनगर में 918, पटियाला में 888, संगरूर में 878 व तरनतारन में 907 लड़कियां हैं। जबकि 2018-19 में एक हड़ार लड़कों के पीछे सबसे अधिक ज़िला बरनाला में 938 व सबसे कम ज़िला नवांशहर में 1 हज़ार लड़कों के पीछे 870 लड़कियां हैं। ज़िला अमृतसर में 889 बठिंडा में 908, फरीदकोट में 908, फतेहगढ़ साहिब में 915, फाजिल्का में 926, फिरोज़पुर में 916, होशियारपुर में 902, जालंधर में 927, कपूरथला में 921, लुधियाना में 929, मानसा में 916, मोगा में 916, मोहाली एस.ए.एस. नगर 933, मुक्तसर में 892, नवांशहर में 870, पठानकोट में 877, रूपनगर में 879, पटियाला में 922, संगरूर में 899, गुरदासपुर में 884 में तरनतारन में 887 लड़कियां हैं।