वक्फ  बिल पास, अब सरकार विपक्षी आरोपों को निर्मूल सिद्ध करे

लोकसभा में बारह घंटे से ज्यादा की तीखी चर्चा, भारी शोरगुल, बिल की कॉपी फाड़ने की घटना और पक्ष-विपक्ष के आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच जहां बुधवार की देर रात वक्फ संशोधन बिल 232 के मुकाबले 288 मतों से पास हो गया, वहीं राज्यसभा में अगले दिन 3 अप्रैल 2025, की देर रात पक्ष-विपक्ष के बीच करीब 14 घंटों से ज्यादा की मैराथन  बहस के बाद यह बिल 95 के मुकाबले 128 मतों से पास हो गया। लोकसभा में बिल पर तीखी चर्चा के दौरान जहां आल इंडिया मुस्लिम इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तेजना में बिल फाड़ दिया, वहीं राज्यसभा में किसी सांसद ने बिल की कापी तो नहीं फाड़ी लेकिन बोल कईयों के बिगड़े, जिन्हें बाद में सदन की कार्यवाही से निकाल दिया गया। लोकसभा में हुई वोटिंग प्रक्रिया में जहां 520 सांसदों ने भाग लिया, वहीं राज्यसभा में वोटिंग प्रक्रिया में हिसा लेने वाले सांसदों की संख्या 223 रही। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बिल को ‘उम्मीद’ (यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट इम्पावरमेंट, इफिशिएंसी एंड डिवेल्पमेंट) नाम दिया और संसद के दोनों ही सदनों में ‘की नोट एड्रेस’ दिया। वहीं बिल पर हुई चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह का भाषण सबसे महत्वपूर्ण रहा, विशेषकर उनका यह वायदा कि वक्फ में कोई गैर-इस्लामिक नहीं आयेगा। उन्होंने बहस के दौरान विपक्ष पर आरोप लगाया कि वोट बैंक के लिए माइनॉरिटीज को डराया जा रहा है। 
वक्फ  बिल पर सदन में चर्चा के दौरान रिजिजू ने कहा, ‘अगर हमने आज यह संशोधन बिल पेश नहीं किया होता, तो जिस इमारत में बैठे हैं, उस संसद पर भी वक्फ  संपत्ति होने का दावा किया जा सकता था।’ सरकार के पक्ष के लोगों ने जहां संसद में पास हुए इस नए वक्फ  बिल को ऐतिहासिक बताया है, वहीं विपक्ष के मुताबिक यह बिल असंवैधानिक है। सरकार के मुताबिक विधेयक से मुस्लिम समाज की महिलाओं और गरीबों का कल्याण होगा तो विपक्ष ने कहा है कि इस विधेयक से मुसलामानों की सम्पत्ति को लूटना आसान हो जाएगा। संसद में बहस के दौरान जहां सत्ता पक्ष विजयी एहसास से भरा था, वहीं विपक्ष बेचैनी और निराशा से भरा दिखा। सिर्फ संसद में ही यह परिदृश्य नहीं रहा बल्कि दिल्ली से दूर पटना स्थित बिहार विधानसभा में भी ऐसा ही कुछ माहौल रहा। 
लोकसभा में 2 अप्रैल, 2025 को बिल पेश करने के दौरान किरन रिजिजू ने कहा कि आजादी के बाद 1954 में वक्फ एक्ट पहली बार बना था। उसी समय स्टेट वक्फ  बोर्ड का भी प्रावधान किया गया था। तब से हुए कई संशोधनों के बाद 1995 में मौजूदा वक्फ  एक्ट अस्तित्व में आया था। उस वक्त किसी ने भी नहीं कहा था कि ये गैर-संवैधानिक है। लेकिन आज जबकि हम इसे बेहतर सुधारों और पारदर्शिता के साथ लेकर आये हैं, तो कुछ लोग विशेषकर कांग्रेसी कह रहे हैं कि यह गैर-संवैधानिक है। रिजिजू ने  विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह मुस्लिम वोटों के लिए  देश को बरगला रहा है। किरन रिजिजू के मुताबि? 2014 में चुनावों के ऐन पहले तत्कालीन कांग्रेस की सरकार ने 5 मार्च 2014 को 123 प्राइम प्रॉपर्टी दिल्ली वक्फ  बोर्ड को ट्रांसफर कर दीं थीं । जबकि चुनाव के कुछ ही दिन बचे थे, सरकार चाहती तो चुनावों तक इंतजार कर सकती थी। 
इस बहस में गृहमंत्री अमित शाह ने भी तीखे प्रतिवाद के दौरान कहा, ‘वक्फ  बिल चोरी के लिए नहीं, गरीबों की बेहतरी के लिए है। अभी एक सांसद कह रहे थे अल्पसंख्यक स्वीकार नहीं करेंगे, क्या धमकी दे रहे हो भाई। संसद का कानून है, स्वीकार करना पड़ेगा।’ बहस के दौरान समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश किरन रिजिजू को संबोधित करते हुए कहा—मंत्री जी बोल रहे हैं कि डिफेंस और रेलवे की ज़मीन भारत की है। मैं भी यह मानता हूं। मगर क्या डिफेंस और रेलवे की जमीनें नहीं बेची जा रही है? वक्फ की ज़मीन से बड़ा मुद्दा वो ज़मीन है, जिस पर चीन ने अपने गांव बसा लिए हैं। कोई सवाल न करे इसलिए यह बिल लाया जा रहा है। जिस प्रदेश से मंत्री आते हैं कम से कम यह तो बता दें कि चीन ने कितने गांव बसा लिए हैं। सदन की बहस हिस्सेदारी करते हुए भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा—भारत को वक्फ के खौफ से आजादी चाहिए। खाता न बही, जो वक्फ कहे वही सही। आपको तय करना है कि आपको वक्फ  के साथ रहना है या संविधान के साथ रहना है। इसी बहस में कांग्रेस के सांसद केसी वेणुगोपाल बोल— भारत माता को धर्म के नाम पर बांटा जा रहा। आप नॉन मुस्लिम को बोर्ड में ला रहे हैं। 
कुल मिलाकर दो दिनों तक संसद के दोनों सदनों में जो 26 घंटे से ज्यादा लम्बी और तीखी बहस हुई अब उसे याद करने का मतलब सिर्फ  इतना ही है कि भारी रस्साकसी के बीच जिस तरह की आशंकाएं दर्शाई गयी हैं, सरकार अब अपनी कार्यवाहियों से इन सब आशंकाओं को निर्मूल साबित करे।  

-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर

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