पुस्तक बोल पड़ी 

पुष्प दसवीं कक्षा में हो गया था। उसे अपने आप से यह शिकायत थी कि वह जितनी मेहनत करता है, उसके कक्षा के टेस्टों और परीक्षाओं में उतने अंक नहीं आते। उसे जब भी कक्षा के टेस्ट तथा परीक्षाओं के पर्चे मिलते तो वह बाकी मेधावी छात्रों के मुकाबले अपने कम अंक आए देखकर अपने मन में सोचने लगता कि वह पढ़ता तो बहुत है परन्तु फिर भी उसके कम अंक क्यों आते हैं? वह जब भी अपने मम्मी-पापा और अध्यापकों को अपने टेस्टों और परीक्षाओं में कम अंक आने के बारे में पूछता तो वे उसे यह कहकर समझाने का प्रयास करते कि सचमुच वह पढ़ता तो बहुत है परन्तु दिल लगाकर नहीं पढ़ता, पढ़ते समय उसका ध्यान इधर उधर की बातों में होता है, इसलिए कक्षा के टेस्टों और परीक्षाओं के पेपरों में उसके अंक कम आते हैं। वह अपने मम्मी-पापा तथा अध्यापकों की नसीहत सुन तो लेता था लेकिन उस पर अमल नहीं करता था। उसकी कक्षा में भूषण नाम का एक नया लड़का आया। उसके पापा ने उनके पड़ोस में ही किराये पर मकान लिया हुआ था। एक ही कक्षा तथा एक ही सैक्शन में होने के कारण उन दोनों में दोस्ती हो गई। उन दोनों का एक-दूसरे के घर आना जाना हो गया। 
वे दोनों इकट्ठे ही स्कूल जाते थे और इकट्ठे ही पढ़ते थे। पुष्प इस बात से बहुत हैरान था कि वह पढ़ता बहुत कम था। वह स्कूल से मिले टेस्ट तथा स्कूल का घर के लिए मिला हुआ काम शीघ्र ही करके पुष्प को कह देता था कि वह अपने घर जा रहा है, उसने खेलने जाना है लेकिन पुष्प के टेस्ट तथा घर का काम अभी दोनों करने को पड़े होते थे। भूषण के टेस्टों के अंक भी कक्षा के सभी बच्चों से ज्यादा आते थे। पुष्प यह सोच कर बहुत हैरान था कि भूषण पढ़ता भी बहुत कम है फिर भी टेस्टों में उसके अंक सबसे ज्यादा कैसे आ जाते हैं? उसके मन में यह विचार भी आ रहा था कि हो सकता है कि वह कापी खोल कर टैस्ट करता हो। उनकी सितंबर महीने की परीक्षा शुरू हुई। उन्होंने इकट्ठे ही पढ़ कर सितंबर महीने की परीक्षा के पर्चे दिए। जब उन्हें परीक्षा के पर्चे मिले तो भूषण सभी सेक्शनों के बच्चों में से पहले स्थान पर आया था। 
उनके कक्षा इंचार्ज अध्यापक ने कक्षा के बच्चों को कहा, बच्चों आप सभी को भूषण से मेहनत करनी सीखनी चाहिए, वह खेलों तथा विद्यालय की सभी गतिविधियों में भाग लेने के साथ-साथ अपनी कक्षा के सभी सेक्शनों में से पहले स्थान पर आया है। पुष्प अपने अध्यापक की बातें सुनकर सोचने लगा कि पढ़ता तो मैं भी बहुत हूं फिर मेरे इतने अंक क्यों नहीं आते? भूषण स्कूल समय के बाद पढ़ने के लिए पुष्प के घर आया। उसके आते ही पुष्प ने उसे प्रश्न किया, यार मुझे भी मेहनत करने का वह ढंग बता दे, जिससे टेस्टों और परीक्षाओं में मेरे भी तुम्हारी तरह अधिक अंक आने लगें। 
भूषण ने कहा, मित्र मैं तो तुझे कहना ही चाहता था परन्तु मैंने सोचा कि तुम मेरे कहने का बुरा ही ना मना लो। पढ़ते समय तुम्हारा ध्यान पढ़ाई में कम इधर-उधर की बातों में ज्यादा होता है। तुम मन से मेहनत नहीं करते, तुम केवल दिखावे के लिए पढ़ते हो। मैं जितना समय भी पढ़ता हूं, दिल से पढ़ता हूं। तुम भी दिल से पढ़ना शुरू कर दो, तुम्हारे भी टेस्टों तथा परीक्षाओं में अधिक अंक आने शुरू हो जायेंगे। भूषण, पुष्प को मेहनत करने का ढंग बता कर अपने घर चला गया। उसके जाने के बाद पुष्प को लगा कि उसकी पुस्तकें बोल पढ़ी हों और वे उसे कह रही हों कि यदि उसने भूषण की तरह अधिक अंक लेने हैं तो उसे दिल लगा कर पढ़ना होगा। 
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