पतंगबाज़ी और ज़िम्मेदारी
शीशे के मांझे से सजी घातक सिद्ध होती चाईना डोर के भयानक आकर्षण का जादू अब सिर चढ़ कर बोलने लगा है। पंजाब में इस जादू ने दो दिन में दो और जानें ले ली हैं। समराला में 15 वर्षीय एक युवक के गले में लिपट गई इस डोर ने अन्तत: उस युवक की गर्दन पर गहरा घाव लगा कर उसका प्राणांत कर दिया। दूसरी घटना में मुल्लांपुर दाखा की रायकोट रोड पर खरीददारी करने बाज़ार गई एक महिला के गले पर चाईना डोर ने ऐसा प्रहार किया जिससे मौका पर ही उसकी जीवन लीला समाप्त हो गई। चाईना डोर का यह एक उत्पीड़ाजनक प्रहार है। पिछले वर्ष से लेकर इस वर्ष वसन्त ऋतु के मौसम के आगमन तक पंजाब में इस डोर से छह लोगों की जान जा चुकी है, तथा एक सौ से अधिक लोग घायल हुए हैं। इसके अतिरिक्त अनगिनत पंछी-परिन्दे भी इस डोर से हताहत हुए हैं। समस्या का त्रासद पक्ष यह है कि इसके बावजूद इस डोर का न तो आकर्षण कम हुआ है, न इसके कारोबार पर कोई अंकुश लग सका है। अब तो बस खुदा से यही दुआ है कि कोई करिश्मा हो जाए, और पतंगबाज़ लोग स्वत: इस प्राण-घातक बन गई डोर से तौबा कर लें, ताकि कम से कम भविष्य में इस डोर से प्राणी-परिन्दों के हताहत होने को रोका जा सका।
प्लास्टिक के महीन धागे की कांच का मांझा लगी चाईना डोर मौजूदा वासन्ती मौसम में कहर बरपा देने की नौबत तक पहुंच गई लगती है। वसन्त वाले एक ही दिन में पंजाब भर में लगभग दस हादसे इस चाईना डोर से हुए सामने आये हैं। इस दिन हालांकि प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में दोपहर बाद तक वर्षा होती रही और अनेक जगहों पर आकाश में बादल छाये रहे, किन्तु जितना थोड़ा-सा समय पतंगबाज़ी हेतु मिला, उतने में ही पतंगबाज़ लोगों ने भरपूर आनन्द उठाया किन्तु आनन्द की इस ललक ने पंजाब के कई शहरों में लगभग दस लोगों को चाईना डोर से लहू-लुहान किया। इनमें से कइयों की स्थिति गम्भीर होने तक पहुंची। बठिंडा में चाईना डोर से 23 वर्षीय एक युवक के होंठ कट गये, और उसे गम्भीर अवस्था में एम्स में भर्ती कराना पड़ा। फिरोज़पुर में भी चाईना मांझे वाली डोर से दो लोगों के घायल होने की सूचना मिली है जिनमें से एक की दशा गम्भीर है। इसी तरह अबोहर, सुनाम, ममदोट, संगरूर और खन्ना भी चाईना डोर से आम लोगों पर घातक प्रहार होने से नि:संदेह रूप से कई लोगों और उनके परिवारों को पीड़ा से संतप्त होना पड़ा है। जालन्धर में भी एक ही दिन पूर्व एक युवक चाईना डोर का कट लगने से गम्भीर रूप से घायल हुआ। इससे एक दिन पूर्व जालन्धर के लोहियां में एक युवक बिजली की तारों से चाईना डोर उतारते हुए, करंट आ जाने से बुरी तरह से झुलस गया था। यह सिर्फ एक दिन की बात है हालांकि पूरे वर्ष में जब-जब भी पतंगबाज़ी का मौसम बना है, चाईना मांझे वाली डोर का प्रचलन बड़े ज़ोर-शोर से हुआ है, और इसी क्रम से आम जन में से किसी का गला कटा है, किसी का कान अथवा नाक।
अक्सर यह डोर बड़ी तेज़ी से तलवार जैसा प्रहार कर जाती है। जिसके गले अथवा शरीर से यह डोर एक बार चिपट जाती है, फिर उसका लहू बहा कर ही अलग होती है। पंजाब में यह डोर प्रतिबंधित है, और प्रदेश की सरकार अथवा प्रशासन की ओर से समय-समय पर इस कारोबार में रत लोगों के विरुद्ध कार्रवाई भी की जाती रहती है। सरकारी प्रचार तंत्र की ओर से इस डोर से होने वाले नुक्सान का चर्चा भी किया जाता रहता है। ऐसा न करने हेतु सरकार और समाज की विभिन्न संस्थाओं की ओर से भावुक अपीलें भी की जाती रहती हैं। पुलिस ऐसी डोर इस्तेमाल करने वालों की धर-पकड़ भी करती है, किन्तु मौका पर कोई प्रमाण न मिलने से कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाती। इस सब कुछ के बावजूद इसकी बिक्री और कारोबार पर कोई प्रभाव पड़ते दिखाई नहीं देता। मौजूदा ऋतु वसन्त मौसम के दौरान भी प्रशासनिक तंत्र ने चाईना मांझे वाली डोर से पतंग उड़ाने वालों के विरुद्ध रोक हेतु व्यापक प्रबन्ध किए हैं। निगरानी के लिए ड्रोन आदि की व्यवस्था की गई है। शहरों के विभिन्न हिस्सों में पुलिस की अतिरिक्त गश्ती टुकड़ियों को तैनात किया गया है। इसके बावजूद यदि एक ही दिन में, और थोड़े समय की पतंगबाज़ी के दौरान इतनी-सारी घटनाएं हो गई हैं, तो स्थितियों की गम्भीरता स्वत: समझ में आने लगती है।
हम समझते हैं कि स्थिति अब पानी के सिर पर से गुज़र जाने जैसी बन गई है। कुछ गिने-चुने लोगों की मानसिक अय्याशी और कुछ अन्य व्यवसायी किस्म के लोगों द्वारा थोड़ा अधिक लाभ अर्जित किये जाने की लालसा के समक्ष निर्दोष लोगों और निरीह परिन्दों की जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता। शहरी आकाश में चाईना डोर के मांझे में फंसे छोटे-बड़े परिन्दे अक्सर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में गिर पड़ते हैं जहां वे देख-भाल और मरहम-पट्टी के अभाव में तड़प-तड़प कर दम तोड़ देते हैं। नि:संदेह इस अवैध और अमानवीय कारोबार के पीछे छद्म व्यापारियों, कुछ प्रशासनिक तत्वों और पुलिसजनों की मिली- भुगत ज़िम्मेदार है। छद्म कारोबारी ऐसी डोर को दो-तीन गुणा मुनाफे पर बेचते हैं। ये कारोबारी इस दौरान समाज-विरोधी कृत्य पर भी उतर आते हैं। वो बच्चों को सौ-दो सौ रुपया कम करके, उन्हें नये-नये ग्राहक लाने का झांसा देकर अपराध में भागी बनाते हैं। हम समझते हैं कि नि:संदेह सरकार तथा स्थानीय प्रशासन अपने भीतर थोड़ी-सी और आर्द्रता जगा कर, और अपनी कार्रवाई को थोड़ा अधिक क्रियाशील बना कर इस असामाजिक कृत्य पर अंकुश लगा सकते हैं। इस अंकुश को जितना अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा, उतना ही अधिक लोगों की जान और उनके शरीर की रक्षा की जा सकेगी। लोकतंत्र में अपने नागरिकों के जान-माल की रक्षा करना सरकार और प्रशासन का मुख्य दायित्व होता है। पतंगबाज़ी के शौकीन लोगों को भी जन-साधारण को हताहत करने वाली इस डोर से स्वत: परहेज़ करना चाहिए। यह समाज आखिर सभी लोगों से मिल कर ही तो बना है न!

