राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस में मचा घमासान
कांग्रेस विधायकों द्वारा राज्यसभा चुनाव में की गई क्रॉस वोटिंग पर पार्टी में घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस की अनुशासन समिति के अध्यक्ष धर्मपाल मलिक ने 5 कांग्रेस विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। इन विधायकों में नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी, सढौरा की विधायक रेणु बाला, पुन्हाना से विधायक मोहम्मद इलियास और हथीन से मोहम्मद इसराइल के अलावा रतिया के विधायक जरनैल सिंह को भी कारण बताओ नोटिस दिया गया है। इन विधायकों पर कांग्रेस के उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध की बजाय भाजपा समर्थित उम्मीदवार सतीश नांदल को वोट देने का आरोप है। विधायक शैली चौधरी के पति व पूर्व मुख्य संसदीय सचिव और कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रामकिशन गुर्जर ने राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग का मुद्दा उठते ही कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। एक तरफ जहां कांग्रेस ने पार्टी के 5 विधायकों को नोटिस जारी कर दिए हैं, वहीं कांग्रेस पार्टी अभी तक उन 4 में से 3 विधायकों के नाम जाहिर नहीं कर रही जिनके वोट रद्द हुए हैं और न ही उनसे जवाबतलबी की गई है।
बाकियों के नाम उजागर करने की मांग
टोहाना के विधायक परमवीर सिंह जिनका वोट रद्द हुआ है, का नाम जरूर उजागर हुआ है और उन पर वोट की गोपनीयता भंग करने का आरोप लगा है और इसी आरोप में उनका वोट रद्द हुआ है। बाकी जिन 3 कांग्रेसी विधायकों के वोट रद्द हुए हैं, कांग्रेस उनके नाम उजागर नहीं कर रही और न ही उन्हें कोई नोटिस दिया गया है। कांग्रेस पार्टी की ओर से राज्यसभा चुनाव के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और बीके हरिप्रसाद को पार्टी एजेंट नियुक्त किया गया था। राज्यसभा चुनाव का यह नियम है कि पार्टी के विधायक राज्यसभा उम्मीदवार के लिए अपना वोट डालने से पहले पार्टी के एजेंट को अपना वोट दिखाएंगे कि उन्होंने अपना वोट किसको दिया है। जाहिर है कि कांग्रेस के जिन 5 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, उन्होंने खुलेआम भाजपा समर्थित उम्मीदवार को वोट डालने से पहले भूपेंद्र हुड्डा और बीके हरिप्रसाद को अपने वोट दिखाए थे। इसके अलावा कांग्रेस के जिन बाकी विधायकों के वोट रद्द हुए हैं, उन पर आरोप है कि उन्होंने मतपत्रों पर पेन से निशानी लगा दी थी और इसी के चलते उनके वोट रद्द हो गए। जिस तरह से कांग्रेस उम्मीदवारों के मतपत्रों पर लगाए गए निशान से उनके वोट रद्द हुए, ऐसा ही निशान एक भाजपा विधायक के मत-पत्र पर लगा होने के कारण उसका वोट भी रद्द हो गया और भाजपा समर्थित उम्मीदवार सतीश नांदल चुनाव जीतते-जीतते हार गया। कांग्रेस उम्मीदवार की जीत और भाजपा समर्थित सतीश नांदल की हार के दो अन्य कारण भी रहे। एक कारण तो यह था कि भाजपा एजेंट ने ऐलनाबाद के कांग्रेस विधायक भरत सिंह बेनीवाल के वोट पर ऐतराज जताया था और उसका वोट रद्द करने की मांग की थी। यह मामला चुनाव आयोग के पास भेजा गया और चुनाव आयोग ने भरत सिंह बेनीवाल का वोट सही माना और इसका फायदा कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध को मिला।
इनेलो ने चुनाव में नहीं लिया हिस्सा
दूसरा सबसे बड़ा कारण यह रहा कि मतदान के दिन आखिरी समय पर इनेलो प्रमुख अभय चौटाला ने ऐलान कर दिया कि उनकी पार्टी के दोनों विधायक मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे। जैसे ही इनेलो ने यह घोषणा की तो बाजी पूरी तरह से पलट गई। शुरू से ही यह बात मानी जा रही थी कि इनेलो विधायक कांग्रेस और भाजपा उम्मीदवारों को वोट नहीं डालेंगे लेकिन वे निश्चित तौर पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे भाजपा समर्थित सतीश नांदल के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। सतीश नांदल भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। इनेलो के विरोधी बार-बार उन पर आरोप लगाते रहे हैं कि इनेलो भाजपा की बी-टीम है और हर चुनाव में पिछले दरवाजे से भाजपा को फायदा पहुंचाने का काम करती है। इस बार चुनाव से दूरी बनाकर इनेलो ने वह दाग धोने का काम किया और इनेलो का यही दाव भाजपा समर्थित नांदल को महंगा पड़ा और वह एक वोट से हार गए। अगर इनेलो के दो वोट नांदल को मिल जाते तो नांदल आराम से राज्यसभा पहुंच सकते थे। सतीश नांदल पहले इनेलो में रह चुके हैं और इनेलो टिकट पर किलोई से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के मुकाबले विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। उसके बाद वह इनेलो छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए और भाजपा की टिकट पर किलोई से चुनाव लड़े लेकिन दोबारा फिर चुनाव हार गए।
दल-बदल के कारण बदनाम रहा है हरियाणा
हरियाणा में दल-बदल व खरीदो-फरोख्त का चलन कोई नया नहीं है। हरियाणा वैसे भी दल-बदल और आया-राम, गया-राम के नाम से बदनाम रहा है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद हुए दो सीटों के राज्यसभा चुनाव में भाजपा एक सीट जीतने की स्थिति में थी और दूसरी तरफ कांग्रेस व इनेलो ने विपक्ष में होते हुए संयुक्त उम्मीदवार के रूप में सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट आरके आनंद को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतारा था। आनंद के मुकाबले भाजपा ने राज्यसभा की दूसरी सीट के लिए सुभाष चंद्रा को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतार दिया था। उस चुनाव में पेन व स्याही बदलने के चलते कांग्रेस विधायकों के वोट थोक में रद्द हो गए और भाजपा समर्थित उम्मीदवार सुभाष चंद्रा चुनाव जीत गए और बहुमत होते हुए भी आरके आनंद चुनाव हार गए। आरके आनंद की गिनती इनेलो नेता अभय चौटाला के करीबियों में होती थी और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट के विधायकों पर अपने वोट पेन व स्याही बदलने से रद्द करवाने का आरोप लगता रहा। इसके बाद दो सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव में फिर कांग्रेस के पास अपने 31 विधायक थे और 2 में से 1 सीट कांग्रेस आराम से जीतने की स्थिति में थी। कांग्रेस ने पार्टी के बड़े नेता अजय माकन को चुनाव मैदान में उतारा और दूसरी तरफ कार्तिकेय शर्मा को भाजपा ने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतार दिया और कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग के चलते कांगे्रस उम्मीदवार अजय माकन चुनाव हार गए और भाजपा समर्थित कार्तिकेय शर्मा चुनाव जीत गए।
किस्मत के धनी हैं कर्मवीर
इस बार भी भाजपा ने कुछ ऐसा ही खेल खेला था और कांग्रेस पार्टी के जहां अपने 37 विधायक थे, वहीं कांग्रेस उम्मीदवार को मात्र 28 वोट मिले और इनेलो के गैर हाजिर रहने व 1 भाजपा विधायक का वोट रद्द होने से कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध मात्र 1 वोट से चुनाव जीत गए। इससे 1 सीट भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया के हिस्से आई और दूसरी सीट कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध जीतने में सफल रहे। कर्मवीर बौद्ध को वैसे भी किस्मत का धनी माना जा रहा है। उन्होंने हरियाणा सचिवालय में तीसरा दर्जा कर्मचारी के तौर पर अपनी नौकरी शुरू की थी और कुछ समय पहले ही नौकरी से रिटायर होकर वह कांग्रेस से जुड़े थे। जब उनको कांग्रेस आलाकमान ने उम्मीदवार घोषित किया तो उस समय तक हरियाणा कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता उनके बारे में कुछ नहीं जानता था और कई नेता एक-दूसरे से यह पूछते हुए पाए गए कि ये कर्मवीर बौद्ध कौन है, जिसे कांग्रेस आलाकमान ने राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। कर्मवीर के बारे में कहा जाता है कि उनका संबंध हरियाणा कांग्रेस के किसी भी गुट से नहीं है। जिस तरह से कर्मवीर अचानक टिकट पाने में सफल रहे, वैसे ही उनकी जीत भी अप्रत्याशित रही और इसी के चलते हर कोई कहने लगा कि कर्मवीर सच में किस्मत के धनी हैं।
-मो.-9855465946



