मौका सम्भालने का यत्न

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के दृष्टिगत जहां विनाश के दृश्य दिखाई दे रहे हैं, वहीं ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़ा हड़कम्प मचा हुआ दिखाई देता है। ईरान और खाड़ी देशों में जहां तेल और गैस का बड़ा उत्पादन होता है, वहां जारी युद्ध के कारण इन स्रोतों  के हो रहे विनाश के कारण बड़ी क्षति हुई है। ईरान द्वारा होर्मुज मार्ग को बंद करने से भी विश्व भर में हड़कम्प मच गया है। इन बेहद ज़रूरी स्रोतों के सिकुड़ जाने से इन वस्तुओं की कमी आना स्वाभाविक है। अलग-अलग देशों में जहां तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि होने लगी है, वहीं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर गैस की पूर्ति में भी कमी आई है। ज्यादातर देशों द्वारा इनकी कीमतों में वृद्धि कर दी गई है।
भारत में भी इसके प्रति बड़ी चिंता पाई जाने लगी है। ज्यादातर अफवाहें फैल रही हैं और ये यहां तक भी पहुंच गई हैं कि देश में लॉकडाउन लग सकता है। इन अफवाहों ने पहले ही पैदा हुई चिंताओं में और भी वृद्धि कर दी है। पैट्रोल पम्पों पर भीड़ लगनी शुरू हो गई हैं। एकाएक ही इन वस्तुओं की खरीद में 4 गुना वृद्धि हो गई है। केन्द्र सरकार पिछले बहुत दिनों से इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट कर रही है। एक बार फिर पैट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि देश में तेल और पैट्रोलियम की कोई कमी नहीं है। किसी भी तरह से घबराने की बात नहीं है और फैलाई जाने वाली अ़फवाहों से सुचेत होने और बचने की ज़रूरत है। पैट्रोलियम मंत्रालय ने अब यह भी स्पष्ट किया है कि एल.पी.जी. के घरेलू उत्पादन में 40 प्रतिशत वृद्धि हुई है, जिससे उत्पादन 50,000 टन हो गया है। यह उत्पादन देश की ज़रूरत का 60 प्रतिशत हिस्सा है, जिस कारण इसका आयात ज़रूर कम होकर सिर्फ  30 हज़ार टन रह गया है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि रूस और अन्य देशों से 8 लाख टन एल.पीजी. कार्गो पहले ही सुरक्षित कर लिए गए हैं।
लोगों में एकाएक पैदा हुए हड़कम्प और चिंता के कारण पहले प्रतिदिन सिलेंडरों की मांग 89 लाख तक पहुंच गई थी, जो अब फिर 50 लाख सिलेंडरों पर आ गई है। सरकार ने स्पष्ट रूप में यह भी कहा है कि उसके पास 74 दिनों के कच्चे तेल और पैट्रोलियम पदार्थों के भंडारण की समर्था है। चाहे रुकावटें आ रही हैं परन्तु ज़रूरत के अनुसार आगामी 60 दिनों तक की पूर्ति कर ली गई है। इसके साथ ही केन्द्र ने राज्य सरकारों को यह निर्देश भी दिया है कि वह किसी भी स्थिति में ज़रूरी वस्तुओं की जमाखोरी या कालाबाज़ारी न होने दें और जो भी लोग अफवाह फैलाते हैं, उनके साथ सख्ती से निपटा जाना चाहिए। केन्द्र सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। उसके द्वारा पैट्रोल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी कम की गई है, जबकि डीज़ल पर एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है, इस घोषणा से पैदा हुआ हड़कम्प और घबराहट कम होगी। इस घोषणा के बाद पैट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कमी आएगी, जिसका खाद्य वस्तुओं और अन्य ज़रूरी वस्तुओं की लिफ्टिंग पर भी प्रभाव पड़ेगा। 
चाहे इससे सरकार की आय पर बड़ा प्रभाव पड़ने  की आशंका है परन्तु इससे आम लोगों को प्रत्येक पक्ष से बड़ी राहत मिलने की सम्भावना बन गई है। अब चिंता सिर्फ इस बात की है कि यदि यह युद्ध और लम्बा होता है तो इसका विश्व भर के साथ-साथ भारत पर किस तरह का कितना प्रभाव पड़ेगा, वैसे इसका तो पूरी तरह से बाद में ही पता चल पाएगा, परन्तु इस समय सरकार के अधिक यत्नों और उठाए गए कदमों से स्थिति के संतुलित रहने की सम्भावना बनी दिखाई देती है।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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