ताजे पानी की शानदार रंग बिरंगी गौरामी मछली
गौरामी ताजे पानी की शानदार रंग बिरंगी मछली है। इसे एक्वेरियम की अत्यंत लोकप्रिय मछली माना जाता है। गौरामी एक मानवीय गुण के कारण विश्वविख्यात मछली बना है। गौरामी की अनेक जातियां है। इसकी अधिकांश जातियां बड़ी सुंदर और मनमोहक होती हैं। इन्हें एक्वेरियम में रखा जाता है, कुछ जातियों को भोजन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इनके शरीर की लंबाई 15 सेंटीमीटर से लेकर 25 सेंटीमीटर तक होती है। कभी-कभी 40 सेंटीमीटर तक लंबी गौरामी मछलियां भी देखने को मिल जाती हैं। प्राकृतिक अवस्था में गौरामी का विकास तेजी से होता है तथा यह सरलता से 25 सेंटीमीटर तक लंबी हो जाती है। गौरामी का शारीरिक संरचना की महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसका शरीर अंडाकार होता है एवं यह अगल-बगल से चपटी होता है। इसका सिर नुकीला होता है एवं सिर के सिरे पर काफी बड़ा मुंह होता है। गौरामी के हाेंठ बहुत मोटे होते हैं, अत: यह बड़ी विचित्र भी दिखाई देते हैं। गौरामी की पीठ और शरीर के ऊपर के भाग का रंग हरापन लिये हुए रूपहला होता है। इसके अलावा पेट और शरीर के नीचे के भाग हल्के रंग के होते हैं। गौरामी के शरीर के मांसल भागाें पर गहरी धारियां होती हैं। इन धारियों का रंग प्राय: गुलाबी के साथ-साथ सफेद होता हैं। कुछ गौरामी मछलियों में मांसल भागों की धारियां रंग बिरंगी होती हैं। गौरामी के शरीर के मीनपंख भी बड़े सुंदर और रंग बिरंगे होते हैं। इसकी पीठ और नितम्ब में मीनपंख काफी लंबे होते हैं। इनका रंग हरे से लेकर ग्रे पीला होता है।
गौरामी का भोजन और भोजन करने का ढंग बड़ा सामान्य होता है। यह हमेशा पानी की सतह पर भोजन करती है। गौरामी एक सर्वभक्षी मछली है। इसका प्रमुख भोजन नदियों और तालाबों की सतह पर पाए जाने वाले ताजे पानी के छोटे-छोटे कीड़े-मकोड़े हैं। साथ ही यह जलीय पौधे भी खाती हैं। बहरहाल गौरामी का समागम और प्रजनन रोचक के साथ साथ आकर्षक और दर्शनीय भी होता है। इसमें बाह्य निषेचन पाया जाता हैं। नर और मादा गौरामी इस प्रकार जोड़ा बनाती हैं कि आंतरिक समागम का भ्रम होता है। गौरामी सीमा क्षेत्र बनाने वाली मछली है। प्रजनन काल में सर्वप्रथम नर एक छोटा सा सीमा क्षेत्र बनाता है और इसकी सुरक्षा करता है। प्रजनन काल में इसके सीमा क्षेत्र में यदि इसी की जाति का कोई दूसरा नर आता है तो यह उसे डरा धमकाकर अथवा लड़कर भगा देता है।
सीमा क्षेत्र का पूरी तरह निर्धारण हो जाने के बाद मादाओं का आगमन आरंभ होता है। इनमें नर गौरामी अपनी ही जाति के अन्य नरों से तो लड़ाई करता है, लेकिन मादा के आगमन पर उसका स्वागत करता है। प्रजनन काल में सीमा क्षेत्र वाले नर प्राय: बड़े उग्र और आक्रामक स्वभाव के हो जाते हैं तथा मादा के आने पर भी उग्र रूप धारण कर लेते हैं। ऐसी स्थिति में मादा गौरामी अंडों से भरा अपना पेट नर के सामने कर देती है, जिससे नर शांत हो जाता है और मादा गौरामी को अपने क्षेत्र में आने की अनुमति दे देता है। इसके बाद नर-मादा दोनों साथ-साथ तैरना आरंभ कर देते हैं। ऐसी ही अनेक क्रीडाएं करते हैं। सीमा क्षेत्र बनाने वाली अन्य मछलियों के विपरीत नर और मादा गौरामी अपने अंडों की न तो सुरक्षा करते हैं और न ही इन पर ध्यान देते हैं। ये प्रजनन के बाद एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और अंडों के पास से हट जाते हैं। गौरामी की कुछ जातियां पानी के तल पर अंडे न देकर जलीय पौधों के मध्य अंडे देती हैं। यह ऐसे स्थानों पर प्रजनन करना पसंद करती है जहां पानी का बहाव बहुत कम हो।
मादा गौरामी एक बार में 400 से लेकर 2000 तक अंडे देती है। इसके अंडे 24 घंटों में ही परिपक्व होकर फूटते हैं तथा इनसे छोटी-छोटी मछलियां निकल आती हैं। नवजात गौरामी एक सप्ताह तक ताजे पानी के अत्यंत छोटे-छोटे जीव, विशेष रूप से सीलिया वाले प्रोटोजोन्स खाती है और अपना शारीरिक विकास करती है। इसके बाद यह पानी के पिस्सू खाना आरंभ कर देती है। नवजात गौरामी जैसे-जैसे बड़ी होती हैं, इसके भोजन में विविधता आती जाती हैं तथा यह पानी के छोटे-छोटे जीव-जन्तुओं के साथ ही जलीय पौधे भी खाना आरंभ कर देती हैं। 7 सेंटीमीटर से 12 सेंटीमीटर तक हो जाने पर यह वयस्क अर्थात प्रजनन योग्य हो जाती है। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



