चमत्कारी पत्थर
एक बार एक नगर में एक विशाल मेला लगा, जिसमें तरह-तरह की एक से एक अच्छी चीजें बेचने वाले व्यापारी आए थे। उसी मेले में एक किसान ने तरबूज की ठेली लगाई थी। थोड़ी देर में वहां एक सेठ आया और उसने कहा कि मुझे अच्छे मीठे दो तरबूज तोल कर दे दो। किसान बोला भाई दो तरबूज के दाम निकालो, इस पर सेठ ने कहा, ‘भाई मैं जब मेले में आया तो किसी ने मेरे सारे पैसे चोरी कर लिए, अब मेरे पास कुछ नहीं है, पर मैं तुम्हें एक चमत्कारी पत्थर दे सकता हूं, ये लो, ये पत्थर। ये कोई साधारण पत्थर नहीं है इसमें तुम जो भी देखना चाहते हो देख सकते हो।’
किसान बोला, अच्छा तो इसमें मुझे मेरी पुत्री प्रिया दिखाओ। सेठ ने उस पत्थर को तीन बार अपने माथे से लगाया और बोला-हे चमत्कारी पत्थर तुम इस किसान की पुत्री प्रिया इसे दिखाओ। तभी उस पत्थर में प्रिया दिखने लगी। किसान बहुत प्रसन्न हुआ। उसने सेठ के रथ पर सारे तरबूज उपहार स्वरुप रखवा दिए और घर आ गया।
उसने प्रिया को पत्थर के बारे में बतलाया और वो उसे ही भेंट कर दिया। प्रिया बहुत प्रसन्न हुई। वह जब भी चाहती उसमें किसी को भी देख लिया करती थी। एक दिन उसने अपनी सहेलियों को उस चमत्कारी पत्थर के बारे में बताया तो उन्होंने उसे देखने की इच्छा प्रकट की।
प्रिया ने उन्हें पत्थर दिखाया तो उसकी सहेलियां उससे पत्थर मांगने लगीं। प्रिया ने इंकार कर दिया तो उनमें छीना-झपटी होने लगी। इसी झगड़े में प्रिया अचेत हो गई। डर के मारे उसकी सहेलियां भाग गई।
प्रिया के पिता जब घर आए तो उसकी हालत देखकर बहुत घबरा गए। उन्होंने हकीम को बुलवाया पर कोई दवा असर नहीं की। तभी किसान को उस सेठ की याद आई। किसान ने पत्थर से उस सेठ के घर का रास्ता पूछा और वहां गया। उसने सेठ को सारी बात बताई तो सेठ ने कहा कि इसका इलाज तो अब चांदी के पानी से ही हो सकता है। चांदी के पानी के छींटे पड़ते ही चेतन हो जाएगी प्रिया। किसान बोला, चांदी का पानी कहां मिलेगा।
सेठ ने बताया कि नगर के बाहर एक काली पहाड़ी है, जिसके भीतर चांदी के पानी का तालाब है मगर उस तालाब का पहरेदार एक भयानक राक्षस है।
बहुत लोगों ने यह बात सुनी पर कोई आगे नहीं आया। किसान बहुत दु:खी हो गया। कुछ दिन बाद एक साहसी किसान युवक रोहित वहां आया और उसने किसान से कहा कि मैं आपकी सहायता करुंगा। किसान ने वह चमत्कारी पत्थर उसे दे दिया, जिसमें रोहित ने काली पहाड़ी का रास्ता देखा और वहां गया। बहुत मुश्किलों के बाद दो दिन का कठिन सफर तय करके वह वहां पहुंच गया। वहां पहुंचकर उसने देखा कि पहाड़ी के उस पार एक बहुत सुंदर महल बना है, जिसके बाहर एक राक्षस पहरेदार बना खड़ा है। वह युवक राक्षस के सामने जाकर खड़ा हो गया। राक्षस ने पूछा-‘कौन है तू?’
युवक बोला मेरा नाम रोहित है। मैं एक किसान हूं। यहां चांदी का पानी लेने आया हूं।
यह सुनकर राक्षस जोर से हंसते हुए बोला कि तू यहां से जिंदा नहीं जा सकेगा। पहले मेरे साथ युद्ध कर, फिर चांदी का पानी ले जाना। दोनों में युद्ध शुरु हुआ। युवक रोहित राक्षस को नहीं हरा पा रहा था। तभी वहां रखी एक बोतल से आवाज आई कि इसकी जान पहाड़ी पर बैठे तोते में है, तुम उसे मार दो तो ये खुद मर जाएगा।
तब रोहित ने बोतल को देखा तो उसमें एक परी कैद थी। परी ने कहा जल्दी करो। नहीं तो यह तुम्हें मार देगा।
रोहित ने राक्षस के मुंह पर कम्बल डाल दिया और जल्दी से भागकर तोते की गर्दन काट दी। राक्षस वहीं पर खत्म हो गया।
युवक ने उस बोतल का ढक्कन खोला तो उसमें से बहुत सुंदर परी बाहर निकली। परी ने रोहित को धन्यवाद दिया और पूछा कि, ‘तुम यहां किस लिए आए हो?’
रोहित बोला-‘मैं चांदी का पानी लेने आया हूं।’
परी बोली कि, ‘ये महल और चांदी के पानी का तालाब सब मेरे हैं। राक्षस ने मुझे बंदी बना रखा था। तुम जितना मर्जी पानी ले लो।’
रोहित ने थोड़ा-सा पानी लिया और फिर पानी ने उसे प्रिया के घर तक छोड़ दिया। प्रिया पर जब पानी के छींटे डाले तो उसे होश आ गया। प्रिया को होश में आया देखकर सब बहुत प्रसन्न हुए। प्रिया और रोहित का विवाह कर दिया गया।
रोहित ने चमत्कारी पत्थर परी को दे दिया, ताकि कोई उसका गलत उपयोग न करे। (सुमन सागर)



