प्राकृतिक प्रकाश के स्रोत हैं  जुगनू

अफ्रीका के जंगलों में रहने वाले कुछ आदिवासी समुदाय के लोग रात में अपने घरों को रोशन करने के लिए जुगनुओं का इस्तेमाल करते हैं। वे बहुत सारे जुगनुओं को एकत्रित करके उन्हें एक पिंजरे में बंद कर देते हैं। यह पिंजरा एक लालटेन की तरह रोशनी देता है। वे पिंजरे में इन जुगनुओं को नेकर घने जंगलों में रात के समय शिकार करने निकलते हैं ताकि रास्ता साफ दिखाई दे सके। रात के समय होने वाले विवाह महोत्सव में आदिवासी महिलाएं इन्हें अपने बालों में सजावट के तौर पर इस्तेमाल करती हैं।
जुगनू गोबरेला कीट वर्ग का होता है। अपने शरीर से रोशनी करने वाले चालीस से अधिक जीव पानी में रहते हैं किन्तु जुगनू उड़ने वाला एक कीट है। इसके शरीर से निकलने वाली रोशनी ठंडी होती है। वर्षा ऋतु में दिखाई देने वाले इस कीट का रंग स्लेटी भूरे रंग का होता है। इसकी आंखें बड़ी-बड़ी होती हैं। पंख केवल नर जुगनू के होते हैं।
दक्षिण अमरीका में एक विशेष किस्म का जुगनू पाया जाता है जो सिर से लाल और पूंछ की तरफ से हरी-पीली रोशनी देता है। इसकी सिर के तरफ की रोशनी पहले चमकती है। फिर पूंछ की तरफ की रोशनी चमकती है। पायरो फोरस नाम का जुगनू सबसे तेज रोशनी का स्रोत है। जुगनू रोशनी शरीर के पिछले भाग से देता है। इसका कारण एक रासायनिक तत्व ‘ल्यूसीफेरिन’ है। इस रसायन एवं जुगनू के रक्त के संयोग के कारण चमक पैदा होती है। मादा में यह चमक अधिक होती है। नर इसी चमकीली रोशनी को देखकर मादा के पीछे-पीछे चलता है। नर जुगनू में रोशनी चमकने एवं बंद होने का समय लगभग दो सेकेंड का होता है। यह एक मांसाहारी कीट है। शिकार के लिए अपनी मूंछाें का इस्तेमाल करता है। यह शिकार के शरीर पर मूंछों से जहर छोड़कर उसे बेहोश कर देता है। यह जहर एक रस में बदल जाता है। यह रस जुगनू का भोजन होता है।
जुगनू खुद तो रोशनी देते हैं लेकिन तेज रोशनी इन्हें सहन नहीं होती। तेज रोशनी में ये मर जाते हैं। इनकी मादा घास पर अंडे देती है। अंडों में से 15 दिन में बच्चे निकल आते हैं। जुगनू घास के झुरमुटों, तालाब, नदी के किनारे नमी वाले स्थानों पर रहते हैं। शाम होते ही ये शिकार की खोज में निकल पड़ते हैं। (उर्वशी)

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