साइबर ठग दरवाज़े से झांक रहे हैं

साइबर ठगी का काला कारोबार दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। चमन लाल (काल्पनिक नाम) सात-आठ महीने पहले जॉब से रिटायर हुए थे। बेटा किस्मत आजमाने घर से बाहर धक्के खा रहा था। एक फोन कॉल आई जिसमें बेटे की आवाज़ सुनाई दी। बेटा किसी संकट में घिरा नज़र आया। सब कुछ मिलाकर ग्यारह लाख की राशि हाथ में थी। मकान का कज़र् अभी बाकी था। दस लाख रुपया पल में छिन गया। साइबर ठगी के ज़रिये जन-साधारण की, खासकर सीनियर सिटीज़न की, पंजाब में लूट की घटनाएं बढ़ती चली जा रही हैं। लाखों-करोड़ों रुपया जिसे एक मध्यमवर्गीय परिवार ने बमुश्किल अर्जित किया होता है, पल में लुट जाने की मनहूस खबरें बहुत अव्यवस्थित करने वाली हैं। पुलिस प्रशासन, सरकार सभी हतप्रभ हैं। हाल ही में ज़िला लुधियाना के एक कारोबारी से ज्यादा लाभ का लालच देकर लगभग बीस करोड़ से अधिक की ठगी कर ली गई। वह व्यवसायी व्यक्ति उम्र भर की कमाई लुटा कर खाली याचक बनकर रह गया। अखबार, फेसबुक, व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी में हर रोज ऐसी घटनाओं के घटने की खबरें आती रहती हैं। सरकारों पर भी नि:संदेह ऐसी घटनाओं के घटने से काफी दबाव रहता है। आम लोगों में इस तरह की धक्का लगने वाली घटनाओं के प्रति  तरफ ध्यान भी दिया जाने लगा है, परन्तु जालसाज ऐसी मानसिक चोट करते हैं कि व्यक्ति उनके झांसे में आकर सब कुछ लुटा बैठता है। वे शातिर लोग आदमी की भावुकता पर चोट करते हैं, जिससे कुछ पलों के लिए दिमाग सन्न हो जाता है। ़खतरनाक इरादों का जायज़ा लेते हुए। उन पलों में साहस और सक्रियता जवाब देने लगती है। कोई अपना पास नज़र नहीं आता। यही तड़पते पल साइबर ठगी के लिए उपजाऊ होते हैं। जब पैरों को ज़मीन भी नहीं मिलती। ऐसी मानसिक चोट सभी कुछ गंवा देने को विवश करती है। ताकि उनका बेटा, या बेटी सही सलामत उन तक पहुंच जाये, जिसे नुकसान पहुंचाने की धमकी वे फोन पर दे चुके होते हैं।
अनपढ़ लोग ही नहीं, पढ़े-लिखे लोग भी इस चक्रव्यूह का सामना नहीं कर पा रहे। उच्चतम न्यायालय से न्यायाधीश सूर्यकांत की सुनें—आश्चर्य होता है जब हम ऐसी सूचनाएं पढ़ते हैं कि पढ़े-लिखे और शिक्षित वर्ग के लोग भी डिजीटली अरेस्ट जैसे मामलों का आसानी से शिकार हो जाते हैं। जल्दी से अधिक पैसे कमा लेने की प्रवृत्ति भी घातक सिद्ध होती है। क्रिप्टो करंसी के नाम पर बहुत से लोग काफी नुकसान उठा चुके हैं। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर और कहीं राजनीतिक स्तर पर भी इसका उपयोग होने लगा है।
माना यह जाता है कि साइबर ठगी करने वाले लोग आम लोगों से काफी चतुर और चालाक होते हैं, लेकिन इसका एक दूसरा पक्ष भी है- वह यह कि ठगी का शिकार होने वाले लोग जब लाखों करोड़ों की राशि कुछ किश्तों में ठगों के खाते में डालते हैं तब एक पल के लिए तो अवश्य सोचना चाहिए।
हद तो यह है कि डिजीटली अरेस्ट जैसी धारा अथवा मामला भारतीय कानून में कहीं नहीं है। लोगों को यह तो समझना ही होगा कि विभिन्न सरकारी योजनाओं से मिलने वाले ब्याज से अगर दुगना या तीन गुना ब्याज मिलने का ऑफर है तो कहीं कुछ दाल में काला होगा ही। बड़ी दिलेरी, बड़ी सूझबूझ से आप इनका सामना कर सकते हैं। 

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