नीट परीक्षा के रद्द होने का संकट
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी एन.टी.ए. द्वारा देश की सर्वाधिक प्रतिष्ठाजनक मैडीकल प्रवेश परीक्षा नीट-यू.जी.सी. को रद्द कर दिये जाने के बाद, एक ओर जहां इस परीक्षा में बैठे लाखों परीक्षार्थियों को परेशानी एवं मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा है, वहीं सरकार की सम्पूर्ण शिक्षा प्रणाली और परीक्षा तंत्र को नियंत्रित करने वाले प्रशासनिक पक्ष के लिए अतीव लज्जाजनक स्थिति बनी है। विगत 3 मई को देश भर के विभिन्न परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित हुई इस परीक्षा को अचानक नौ दिन बाद ही रद्द करने का फैसला इसलिए करना पड़ा कि इस परीक्षा के प्रश्न-पत्र में दर्ज 410 प्रश्नों में से एक तिहाई अर्थात लगभग 140 प्रश्न-पत्र लीक हो गये थे। ये लीक हुए प्रश्न विभिन्न शिक्षण केन्द्रों में हू-ब-हू पहुंच गये थे। बहुत स्वाभाविक है कि इस सम्पूर्ण परीक्षा तंत्र में सेंधमारी हो गई थी, और कि इससे योग्य एवं परिश्रमी विद्यार्थियों के साथ अन्याय होने की सम्भावनाएं बेहद बढ़ गई थीं। यह भी, कि इस लीकेज के कारण अधिकतर ऐसे विद्यार्थी मैडीकल जैसी अतीव अनिवार्य एवं महत्त्वपूर्ण परीक्षा को उत्तीर्ण कर डाक्टर बनने की कतार में खड़े हो जाते जो इसके योग्य नहीं थे।
नि:संदेह यह स्थिति एक ओर जहां देश के लाखों मेधावी एवं परिश्रमी युवा छात्र-छात्राओं की भावी कल्पनाओं के साथ खिलवाड़ जैसी होती, वहीं सरकार और उसके सम्पूर्ण शिक्षा तंत्र की प्रतिष्ठा भी धूल-धूसरित हुई है इसे लेकर जब देश भर में वावेला मचा, तो शिक्षा विभाग को इस सम्पूर्ण परीक्षा को रद्द करना पड़ा। अब एक ओर जहां लगभग 22 लाख विद्यार्थियों को इस सम्पूर्ण अग्नि-परीक्षा से एक बार फिर गुज़रने की पीड़ा को सहन करना होगा, वहीं विद्यार्थियों को आवागमन जैसी कठिनाइयों का एक बार फिर सामना भी करना होगा। बहुत स्वाभाविक है कि यह पूरी साज़िश दो-चार या आठ-दस लोगों के बीच का कार्य नहीं हो सकती। इसके पीछे एक बड़ा व्यापक और विस्तृत संजाल फैला हुआ प्रतीत होता है। मामले की गम्भीरता का अनुमान इसी एक तथ्य से लगाया जा सकता है कि सरकार को इस पूरे मामले को लेकर गम्भीर आलोचनाओं से दो-चार होना पड़ रहा है।
ऐसा नहीं कि यह कोई पहला ऐसा मामला है। इससे पूर्व भी कई बार देश के मेधावी युवा वर्ग को ऐसी अन्धेरी सुरंगों में से गुज़रना पड़ा है। दो वर्ष पूर्व 2024 में भी इसी परीक्षा को लेकर बड़ा हंगामा हुआ था। समय-समय पर कई अन्य अहम् परीक्षाओं को भी ऐसे ही आरोपों के तहत रद्द करना पड़ा। देश के लाखों विद्यार्थी मैडीकल जैसी अह्म परीक्षा को पास करने हेतु वर्षों तलक मेहनत करते हैं, किन्तु बन्द और वातानुकूलित कमरों में बैठे माफिया और गैंग कुछ ही देर में उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। ऐसे गैंग और माफिया अक्सर निजी धरातल पर चलने वाले तैयारी केन्द्रों में सक्रिय रहते हैं। इस तंत्र की भयावहता का अनुमान इस एक तथ्य से भी लगाया जा सकता है कि हर वर्ष दर्जनों विद्यार्थी ऐसे शिक्षण तनाव को सहन न करते हुए आत्महत्या कर लेते हैं। देश का शिक्षा-स़फर विशेषकर मैडीकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं बहुत महंगी हो गई हैं। अनेक विद्यार्थी इसे पूरा न कर पाने पर आत्महत्या कर लेते हैं। इस प्रकार की घटनाएं उनके परीक्षा तनाव को बढ़ाती है। असल में भारी-भरकम राशि खर्च करके प्रश्न-पत्रों को लीक करके उनसे लाखों-करोड़ों रुपये कमाने का यह षड्यंत्र एक प्रकार से एक भूमिगत आपराधिक उद्योग बन गया है। यह भी, कि प्रशासनिक तंत्र का यह एक ऐसा कुरूप चेहरा बन कर उभरा है, जिसे देख कर भय उपजने लगा है।
हम समझते हैं कि आज विज्ञान और इंटरनेट के युग में प्रश्न-पत्रों को पुराने जर्जर ढांचे के ज़रिये हस्त-प्रकाशन की क्या तुक रह गई है, यह समझ नहीं आ रहा। केन्द्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय और इस प्रकार की अहम परीक्षाओं का आयोजन करने वाले तंत्र को इस एक अहम तथ्य को समझना होगा, कि यह कोई मामूली आपराधिक घटना नहीं है। इस आयोजन की विफलता से विदेशों में भी देश की बड़ी फज़ीहत हुई है। प्रत्येक वर्ष विदेशों से भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी मैडीकल जैसी बड़ी परीक्षाओं हेतु पढ़ने के लिए भारत आते हैं। ऐसी परीक्षाओं की विफलता एक ओर देश के लिए जहां आत्म-ग्लानि का कारण बनती है, वहीं विदेशों में देश के राजनीतिक तंत्र की ओर भी संदेह की उंगली उठती है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी को तो अवश्य अपनी गर्दन के नीचे, अपने भीतर झांक कर आत्म-निरीक्षण करना चाहिए। कहीं न कहीं उसके अपने तंत्र की गांठ भी अवश्य ढीली है। अब यह मामला बेशक केन्द्रीय जांच ब्यूरो जैसी एजेंसियों के हवाले कर दिया गया है। कुछ लोगों की गिरफ्तारियां भी हुई हैं, किन्तु यक्ष प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है कि इतने शक्तिशाली राष्ट्र के नीट जैसे तालाबों में ऐसे मगरमच्छ अभी तक सलामत क्यों हैं। हम समझते हैं कि ऐसी प्रतियोगी परीक्षाओं का तंत्र प्रत्येक धरातल पर कठोर एवं पूर्णतया त्रुटि-रहित होना चाहिए। तभी ऐसी राष्ट्रीय परीक्षाएं प्रत्येक कसौटी पर खरा उतरने के सक्षम हो सकती हैं।

