देश का सबसे तेज़ फर्राटा धावक बना गुरिन्दरवीर सिंह
बुलंद हौंसले, विश्वास और दृढ़ता की इससे बड़ी उदाहरण और क्या हो सकती है कि एक एथलीट 100 मीटर के फाइनल मुकाबले हेतु ट्रैक पर उतरने से पहले ही अपनी बिब में एक पर्ची लिख कर डाल ले कि मुकाबला भी जीतना है और वह भी 10:10 सैकेंड के कम समय में। इस तरह के धाकड़ एथलीट विलक्षण ही मिलते हैं। कुछ इसी तरह का दृश्य 29वें सीनियर नैशनल फैडरेशन कप में 100 मीटर स्प्रिंट के फाइनल मुकाबले में देखने को मिला। पंजाबी शेर ने फिनिश लाइन पार करने के बाद अपनी बिब उतार कर उसका पिछला हिस्सा दिखाया, उस पर एक सीधा और स्पष्ट संदेश लिखा हुआ था, ‘काम अभी पूरा नहीं हुआ’ मैं 10:10 सैकेंड पर रुकने वाला नहीं, इंतज़ार करो, मैं अभी हूं।’
झारखंड के शहर रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में हुए 29वें सीनियर नैशनल फैडरेशन कप में गुरिन्दरवीर सिंह ने 10:09 सैकेंड में नया राष्ट्रीय रिकार्ड स्थापित करते हुए 100 मीटर फर्राटा दौड़ में चैम्पियन बन कर भारतीय एथलैटिक्स के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगाई है। वह 10:10 सैकेंड का बैरियर तोड़ने वाले भारत के पहले सबसे तेज़ धावक बन गए हैं।
गुरिन्दरवीर सिंह का जन्म 24 दिसम्बर, 2000 को जालन्धर ज़िले के कस्बा भोगपुर के गांव पटियाल में पिता कमलजीत सिंह और माता रुपिन्दर कौर के घर हुआ। पंजाब पुलिस से सेवानिवृत्त हुए उनके पिता स्वयं भी वालीबॉल के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे हैं। उनके दादा जी भी भारतीय सेना में सेवाएं निभा चुके हैं। घर में अनुशासन और खेलों वाला माहौल होने के कारण गुरिन्दरवीर को भी बचपन से ही खेलने की ललक जाग गई। इस ललक का ही परिणाम है कि उन्होंने एक छोटे से गांव पटियाल से उठ कर राष्ट्रीय स्तर का रिकार्ड अपने नाम दर्ज करवाया है।
लगभग 10 वर्ष की उम्र में गुरिन्दरवीर सिंह ने अपने पिता की ट्रेनिंग में दौड़ना शुरू कर दिया था और दो वर्ष के भीतर ही वह अपने पिता से तेज़ दौड़ने लग पड़े थे। उनकी ट्रैक पर दौड़ने की लगन उन्हें भोगपुर में एथलैटिक्स कोच सरवण सिंह के पास खींच लाई। तब वह छठी कक्षा में ही पढ़ते थे, जब कोच सरवण सिंह ने यह भविष्यवाणी कर दी थी कि यह लड़का उच्च स्तर का एथलीट बनेगा।
गुरिन्दरवीर सिंह ने अपनी पढ़ाई गुरु नानक मिशन स्कूल डल्ला और कैम्ब्रिज स्कूल जालन्धर से की। उन्होंने जालन्धर के लायलपुर खालसा कालेज से बी.ए. और पी.जी.डी.सी.ए. की पढ़ाई पूरी की। उनके खेल को निखारने में स्पोर्ट्स कालेज जालन्धर के कोच सरबजीत सिंह हैप्पी का भी अहम योगदान है, जिन्होंने गुरिन्दरवीर को अच्छी कोचिंग देकर बड़े मुकाबलों के लिए तैयार किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एथलैटिक्स में अपनी अच्छी पहचान बनाई।
2017 में बैंकॉक (थाइलैंड) में हुए एशियन अंडर 18 एथलैटिक्स चैम्पियनशिप में 10.77 सैकेंड में 100 मीटर दौड़ पूरी करके गोल्ड मैडल हासिल किया। 2017 में ही नैरोबी (कीनिया) में विश्व अंडर-18 चैम्पियनशिप में भाग लिया। 2018 में गिफू (जापान) में हुई एशियन जूनियनर चैम्पियनशिप में 4म100 मीटर रिले रेस में तीसरा स्थान हासिल करके कांस्य पदक अपने नाम किया। यहां उन्होंने 100 मीटर दौड़ में भी भाग लिया था। 2019 में कज़ाकिस्तान के अलमाटी में हुए यूरेशियन एथलैटिक्स अंडर-20 मुकाबले में 10:42 सैकेंड में दौड़ पूरी कर पहला स्थान प्राप्त किया। 2025 में इंडियन ग्रैंड प्रिक्स-1 में गुरिन्दरवीर सिंह ने 10:20 सैकेंड में दौड़ जीत कर राष्ट्रीय रिकार्ड अपने नाम किया। जबकि 2021 में उन्होंने अपनी दौड़ सबसे बेहतर समय 10:27 सैकेंड में पूरी की थी। इसके अतिरिक्त उन्होंने और भी कई अन्तर्राष्ट्रीय मुकाबलों में भाग लिया।
स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें काफी समय तक ट्रैक से दूर रहना पड़ा, परन्तु उन्होंने बीमारी को एक चुनौती के रूप में लिया और प्रत्येक पक्ष से स्वस्थ होकर पुन: ट्रैक पर धमाकेदार वापसी करके अपने इरादे जाहिर कर दिए। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण लेने के लिए गुरिन्दरवीर ने रिलायंस फाऊंडेशन उड़ीसा एथलेटिक्स हाई परफॉर्मेंस सैंटर में एथलेटिक्स कोच जेम्स हिलीयर के नेतृत्व में खूब पसीना बहाया और अपनी दौड़ में और सुधार किया।
गुरिन्दरवीर सिंह की उपलब्धियों के दृष्टिगत भारतीय वायु सेना में उन्हें बतौर पेटी ऑफिसर भर्ती कर लिया गया। अपने आलोचकों से बहस करने के स्थान पर उन्होंने स्वयं को मानसिक रूप से मज़बूत करते हुए अपने खेल में और सुधार किया और आलोचकों को ट्रैक में अपनी प्रतिभा दिखाकर जवाब देना उचित समझा। उन्होंने उन लोगों को भी कड़ा जवाब दिया है जो कहते थे कि भारतीय खिलाड़ियों के जींस 100 मीटर फर्राटा दौड़ जीतने के लिए बने ही नहीं ।
गुरिन्दरवीर सिंह के एथलैटिक्स सफर की शुरुआत से लेकर राष्ट्रीय रिकार्ड तोड़ने तक का रास्ता कोई आसान नहीं है। इसके पीछे जहां उन्होंने अपना पसीना बहाया है, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार की वर्षों की तपस्या भी कोई कम महत्त्वपूर्ण नहीं है। उनके पिता कमलजीत सिंह ने आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के बावजूद भी अपने बेटे को अच्छा प्रशिक्षण दिलाया। उनके लिए अच्छे खाने का प्रबंध किया। उनके पिता मिल्खा सिंह से बहुत प्रभावित थे और अपने बेटे को भी वह मिल्खा सिंह की तरह एक उच्च कोटि के एथलीट के रूप में देखना चाहते थे। जब वह अपने बेटे को उसेन बोल्ट की उपलब्धियों संबंधी बताते तो गुरिन्दरवीर भी उन्हें उसेन बोल्ट की तरह तेज़ धावक की उपलब्धियां प्राप्त करने की बात करते।
22 मई, 2026 को रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में हुए सैमीफाइनल मुकाबले में गुरिन्दरवीर सिंह ने पहले सैमीफाइनल में 10:17 सैकेंड मेें दौड़ पूरी करके अनिमेश कुजूर का 100 मीटर फर्राटा दौड़ का रिकार्ड तोड़ दिया था, परन्तु अगले पांच मिनट बाद ही दूसरे सैमीफाइनल में अनिमेश ने 10:15 सैकेंड में नया राष्ट्रीय रिकार्ड बनाकर अपना ताज वापस ले लिया।
अगले दिन 23 मई को जब फाइनल दौड़ की घोषणा हुई तो सभी दर्शकों ने अपने दिमाग में इस दौड़ का परिणाम पहले ही तय कर लिया था और अनिमेश को विजेता माना जा रहा था, परन्तु गुरिन्दरवीर सिंह के मन में कुछ और ही चल रहा था। उन्होंने अपने मन में नया राष्ट्रीय रिकार्ड बना लिया था। जैसे ही दौड़ शुरू हुई गुरिन्दरवीर दौड़ते जा रहे थे, महाभारत के अर्जुन की भांति उनका ध्यान मछली की आंख (रिकार्ड) पर था। उन्होंने जैसे ही दौड़ समाप्त की पूरा स्टेडियम खड़ा होकर उनका स्वागत कर रहा था। उन्होंने दूसरे दिन ही पलटवार करते हुए 100 मीटर फर्राटा दौड़ 10:09 सैकेंड में पूरी कर राष्ट्रीय रिकार्ड अपने नाम कर लिया। इस तरह वह 100 मीटर दौड़ में 10:10 सैकेंड का बैरियर तोड़ने वाले पहले खिलाड़ी बनें। अब वह दिन भी दूर नहीं जब 9 सैकेंड वाली पंक्ति में उनका नाम गूंजेगा।
भारत का यह जूनियर फ्लाइंग सिख इसी तरह रिकार्ड तोड़ता जाए और अपनी उपलब्धियों से ओलम्पिक खेलों में भी भारतीय तिरंगे को बुलंद करके भारतीय एथलैटिक्स को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाए, जिससे अन्य उभरते खिलाड़ी प्रेरणा लेकर बुलंदियां हासिल करें।
-डी.पी.ई. सरकारी हाई स्कूल बदला (बरनाला)
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