आधुनिक भवन निर्माण कला की विरासत की जीवन्त गाथा चंडीगढ़ की पहली इमारत  पियरे जैनरेट म्यूज़ियम

पियरे जैनरेट म्यूज़ियम आधुनिक भवन निर्माण कला की विरासत की जीवन्त निशानी, चंडीगढ़ विषय पर आधारित इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य चंडीगढ़ के पहले बने घर, सैक्टर-5 स्थित मकान नम्बर 57, जो चंडीगढ़ के पहले मुख्य वास्तुकार पियरे जैनरेट का निवास स्थान था और आज एक विलक्षण म्यूज़ियम के रूप में स्थापित है, को विशेष तौर पर उजागर करना है। चंडीगढ़ के शांतमयी वातावरण में स्थित यह म्यूज़ियम 1954 से 1965 तक स्विस वास्तुकार और ली. कार्बूजिए के चचेरे भाई पियरे जैनरेट का निजी निवास रहा।
पंजाब राज्य के सूचना कमिश्नर श्री हरप्रीत संधू द्वारा तैयार की गई यह चित्रात्मक पुस्तक पियरे जैनरेट म्यूज़ियम को भवन निर्माण कला की महानता, कलात्मक दृष्टि और सभ्याचारक संभाल के अद्वितीय प्रतीक के तौर पर दर्शाती है। यह म्यूज़ियम उस महान स्विस वास्तुकार और डिज़ाइनर पियरे जैनरेट की याद को संभालता है, जिसने चंडीगढ़ के पहले घर की रचना की और आज़ादी के बाद भारत के पहले योजनाबद्ध आधुनिक शहर चंडीगढ़ की निर्माण यात्रा में अहम भूमिका निभाई।
पंजाब राज्य के सूचना कमिश्नर श्री हरप्रीत संधू द्वारा लिखी गई पियरे जैनरेट म्यूज़ियम आधुनिक भवन निर्माण कला विरासत की जीवंत निशानी, चंडीगढ़ नामक यह चित्रात्मक पुस्तक हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय म्यूज़ियम दिवस के मौके पर सरकारी म्यूज़ियम और आर्ट गैलरी, चंडीगढ़ में आयोजित समारोह दौरान माननीय राज्यपाल पंजाब द्वारा लोकार्पण की गई। यह पुस्तक सार्वजनिक इमारतों, शिक्षक संस्थाओं, रिहाइशी इलाकों और विश्व प्रसिद्ध फर्नीचर डिज़ाइनों की दूरदर्शी योजना को जीवंत ढंग से दर्शाती है, जो आज चंडीगढ़ की सुंदरता और विलक्षण पहचान का आधार है। यह सभी नक्शे और डिज़ाइन पियरे जैनरेट द्वारा तैयार किए गये थे, जो ली. कार्बूजिए के करीबी सहयोगी और चचेरे भाई थे। यह प्रकाशन आने वाले समय में पर्यटकों, भवन निर्माण कला और डिज़ाइन के विद्यार्थियों, अनुसंधानकर्ताओं और विरासत प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज और प्रेरणास्रोत साबित होगा, जिसके द्वारा वे चंडीगढ़ को विश्व स्तर पर प्रसिद्ध भवन निर्माण कला भाव वास्तुक नगरी बनाने वाली कलात्मक विरासत, योजनाबद्ध सोच और आधुनिक दृष्टिकोण को गहराई से समझ सकेंगे।
पुस्तक आधुनिक वास्तुकला की आत्मा को बहुत ही सुंदर ढंग से पेश करती है। बड़े सोच-विचार से चुनी गई तस्वीरों द्वारा यह पुस्तक ऐतिहासिक निवास के संभाले हुए अंदरूनी भाग को दर्शाती है, जहां दर्शकों का स्वागत पियरे जैनरेट द्वारा डिज़ाइन किया असली सागवान का फर्नीचर, भवन निर्माण के रेखाचित्र, हाथ से बने नक्शे, निजी पत्र, ऐतिहासिक तस्वीरें और उनके उपयोग वाली वस्तुएं करती हैं। पुस्तक में दर्ज प्रत्येक दृश्य दर्शक और उस महान दूरदर्शी व्यक्ति के बीच एक अंतरंग विचार पैदा करती है, जिसने अपनी ज़िंदगी के कई महत्वरपूर्ण वर्ष चंडीगढ़ की वास्तुकला पहचान को निर्माण करने के लिए समर्पित किए। यह पुस्तक म्यूज़ियम के प्रसिद्ध गलियारों, घुमावदार सीड़ियों, असली रेखाचित्रों, विशेष फर्नीचर और विरासती स्थानों को एक संभाली हुए धरोहर के तौर पर पेश करती है, जो चंडीगढ़ के भवन निर्माण कला के विकास और 1950 के दशक की अच्छी जीवनशैली की एक अनोखी झलक है। 
यह चित्रात्मक पुस्तक म्यूज़ियम की एक और विलक्षण विशेषता को भी जीवंत ढंग से उभारती है कि वास्तुकला सिर्फ इमारतों के निर्माण तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन जीने की एक दार्शनिक सोच बन जाती है। पियरे जैनरेट का विश्वास ऐसे स्थान तैयार करने में था जो मौसम, कुदरती रोशनी और मानवीय आराम से साझ पैदा करे। पुस्तक में उनके विश्व प्रसिद्ध फर्नीचर डिज़ाइनों को दर्शाया गया है, जो वास्तव में चंडीगढ़ की सरकारी इमारतों और रिहाइशी घरों के लिए तैयार किए गये थे और आज मिड-सैंचुरी माडर्निज़्म की शाहकार कलाकृतियों के तौर पर विश्वभर में प्रसिद्ध है। अपनी सादगी और कारीगरी के कारण यह डिज़ाइन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेष मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। इन दृश्यमयी कहानियों द्वारा यह पुस्तक म्यूज़ियम को सिर्फ एक ऐतिहासिक अभिलेख नहीं, बल्कि विश्व भर के वास्तुकारों, डिज़ाइनरों, विद्यार्थियों, अनुसंधानों, पर्यटकों तथा सभ्याचारक रुचि रखने वालों के लिए प्रेरणा के स्थायी केन्द्र के तौर पर स्थापित करती है।
यह चित्रात्मक पुस्तक पियरे जैनरेट म्यूज़ियम को आज़ादी के बाद भारत की भवन निर्माण कला की इच्छाओं और आधुनिक शहरी दृष्टिकोण की आत्मा को संभालने वाले एक महत्वपूर्ण सभ्याचारक प्रतीक के तौर पर भी पेश करती है। यह प्रकाशन सिर्फ वस्तुओं और स्थानों की दस्तावेजीकरण नहीं, बल्कि योजनाबद्ध शहरी विकास, रचनात्मक उत्कृष्टता और विरासत संरक्षण की जीवंत विचारधारा को भी दर्शाता है। आज के तेज़ी के साथ बढ़ रहे शहरीकरण के युग में जब ऐतिहासिक पहचान संभालना अकसर नज़रअंदाज हो जाता है, यह पुस्तक बहुत ही संवेदनशील ढंग से उन रचनात्मक विरासतों को संभालने की महत्ता उजागर करती है, जो हमारी साझी सभ्याचारक पहचान का निर्माण करती है। म्यूज़ियम के शांतमयी कुदरती दृश्य और चंडीगढ़ के पहले बने घर से नज़र आते मनमोहक उगते सूर्य के दृश्य भी इसमें बड़ी सुंदरता से दर्शाए गये हैं, जो भवन निर्माण कला ऐतिहासिक और कुदरत के अनोखे मिलाप को पेश करते हैं। अपनी रंगीन तस्वीरों और गहरे विश्लेषण द्वारा यह चित्रात्मक पुस्तक पियरे जैनरेट म्यूज़ियम को सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ की एक सच्ची जीवंत और अद्भुत निशानी के तौर पर पेश करती है।
माननीय राज्यपाल पंजाब श्री गुलाब चंद कटारिया की नेतृत्व में पंजाब के राज्य सूचना कमिश्नर श्री हरप्रीत संधू द्वारा लिखित यह पुस्तक पियरे जैनरेट म्यूज़ियम को चंडीगढ़ शहर की सच्ची जीवंत भवन निर्माण कला और अद्भुत निशानी को दर्शाती है।

-राज्य सूचना कमिश्नर पंजाब
 

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