चिंगारी क्यों भड़काती हो
यूं तो पत्नी जी का मिजाज तीन सौ बीस दिन पचास डिग्री के टेंपरेचर पर रहता है, लेकिन जैसे ही मायके जाने का दिन नजदीक आता जाता है। वो ए.सी. मोड में चली आती हैं। अब उनके मिजाज में दिखने लगती है एतरावट। बोली में दिखाई देखने लगती है मिलावट। कड़कना, गरजना अब होने लगा है कम। लगता है आ गया है मायके जाने का मौसम। वो पुरानी बातों के लिए मांगतीं हैं माफी। ये अचानक से क्यों बदला-बदला है मौसम। क्यों दिखने लगी है मुझे इस गर्मी में हरियाली। कहीं मुझे हुई तो नहीं है रतौंधी की बीमारी। श्रीमती जी की इसमें कोई चाल है। जो नाक पर बैठने ना दे मक्खी। वो क्यों कर रही है मेरी मुंह झक्खी। वो मांगती हैं ए.टी.एम. कार्ड और स्कूटी की चाभी। ताकि निकाल लाएं एटीएम से कैश। और मायके जाकर करें वो मेरे पैसों पर ऐश। अब नहीं दिखती उनके चेहरे पर कोई थकावट। वो करने लगतीं हैं अब अपनी सजावट। मैचिंग के झुमके, मैचिंग की साड़ी। श्रीमती जी जाने वाली हैं, अपने बाडी। अब चिपकी रहती है चेहरे पर हमेशा मुस्कान। नहीं दिखती चेहरे पर सालों भर रहने वाली थकान।
मैं जानता हूँ उनकी खुशी का राज। चूल्हे-चौके से मिलेगा उनको निजात। बर्तन घिसने से मिलेगी आजादी। कपड़ों पर अब नहीं फेरना पड़ेगा हाथ। बार-बार चाय बनाने से मिलेगी मुक्ति। इसीलिए मायके जाने की लाईं हैं वो युक्ति। झाड़-पोंछकर वो निकालतीं हैं बैग। सहेजतीं हैं साड़ी, बिंदी, ब्लाऊज और सलवार। क्योंकि उनको छुड़ाना है मेरा बुखार। साल भर की जो कमाई थी अब जाएगी लूट। गहनों पर निकली है भारी छूट। वो मलतीं है चेहरे पर ढ़ाई-सौ-ग्राम पाऊडर। लगतीं हैं अपने आंखों में पच्चीस ग्राम काजल। अब वो चालीस की नहीं अट्ठारह की दिखाई देने लगतीं हैं। पार्लर जाकर मैनीक्योर-पैडीक्योर करवातीं हैं। मायके जाने से पहले उनकी नज़र मेरे बालों पर अचानक से पड़ जाती है। साल के बस इसी महीने में वो मेरे बालों में रंग देती हैं। बाल जो मेरे झड़ चुके हैं, लेकिन मेरे कुछ बालों में लगातीं हैं खिजाब। जब लगता है बालों में मेरे खिजाब। तो सचमुच में मुझे अक्षय खन्ना होने की फीलिंग आती है। मैं श्रीमती से पूछता हूँ। तुम हर बार मायके जाने से पहले मेरे बालों में रंग क्यों भर जाती हो। खाम-खां सो, हुए अरमानों की राख में चिंगारी क्यों भड़काती हो। श्रीमती जी समझातीं हैं। तुम्हें नहीं, तुम्हारे बालों में मुझे है खिजाब की ज़रूरत। ताकि तुम ना लगो बदसूरत। जब लेने आओ मुझे वापस। पड़ोसी ना कहने लगे कि ये लड़की का बाप है या किसी जन्म का श्राप है। मन-ही-मन मैं भजने लगता हूँ चालीसा। टलने वाली है बला। सूखे गले को मिलने वाली है तरावट। जाकर लाऊंगा अभी चिल्ड बियर। दोस्तों के साथ होगी दारू की पार्टी। श्रीमती जी के जाते ही चलाऊंगा डी.जे.। श्रीमती जी लगाती हैं होंठों पर किलो लिपस्टिक। आंखों पर लगातीं हैं रे-बेन का गोगल। फिर ओला कि टैक्सी में होतीं है सवार। कहतीं हैं जल्दी ही लौटती हूँ। इधर-उधर की कुछ सोचना भी मत नहीं तो आते-आते उतार दूंगीं तुम्हारा बुखार।
-मेघदूत मार्केट फुसरो
बोकारो झारखंड
पिन 829144



