एक और खिताब लेकर लौटेंगी बेटियां
महिला टी-20 विश्व कप
आईसीसी महिला टी-20 विश्व कप 12 जून 2026 से इंग्लैंड में खेला जायेगा। प्रबल संभावनाएं हैं कि इस बार भारत की बेटियां इस फॉर्मेट में अपनी पहली खिताबी जीत दर्ज कर पायेंगी। यह विश्वास भरा अनुमान अकारण नहीं है। सबसे पहली बात तो यह है कि पिछले साल नवम्बर में 50-ओवर विश्व कप में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व वाली टीम का मनोबल ज़बरदस्त है और हौसले बुलंद हैं। इस समय टीम का फॉर्म शानदार है, टॉप आर्डर सेटल हो चुका है, मध्यक्रम में गहराई है और गेंदबाज़ अपनी लय में हैं- जैसा कि ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलिया पर टी-20 में 2-1 की ऐतिहासिक श्रृंखला जीत से स्पष्ट है। गौरतलब है कि भारत ने पिछले साल इंग्लैंड में भी इंग्लैंड को पहली बार इस फॉर्मेट में 3-2 से पराजित किया था। चूंकि विश्व कप इंग्लैंड में ही खेला जायेगा, इसलिए यह कहना शायद गलत न होगा कि भारतीय लड़कियां वहां की स्थितियों से परिचित हैं और जानती हैं कि किस मैदान पर किस कॉम्बिनेशन के साथ कैसा खेलना है?
भारत अपना पहला मैच 14 जून 2026 को पाकिस्तान के विरुद्ध खेलेगा। भारत को ग्रुप 1 में रखा गया है, जहां उसके साथ पाकिस्तान के अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश और नीदरलैंड्स भी हैं, जिससे यह ग्रुप काफी प्रतिस्पर्धी हो जाता है, विशेषकर इसलिए कि हर ग्रुप में से टॉप दो टीमें ही सीधे सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। दूसरे ग्रुप में भी छह टीमें हैं। ग्रुप 1 में से सेमीफाइनल में पहुंचने की दौड़ मुख्यत: भारत, दक्षिण अफ्रीका व ऑस्ट्रेलिया के बीच ही रहेगी, जबकि ग्रुप 2 में गत विजेता न्यूज़ीलैंड, इंग्लैंड व वेस्टइंडीज में सेमीफाइनल में पहुंचने का कड़ा मुकाबला रहेगा। एमिली कर का दावा है कि उनकी टीम न्यूज़ीलैंड अपने खिताब का बचाव करने में कामयाब रहेगी। यह दावा कितना खरा है, यह तो मैदान में मुकाबलों के बाद ही मालूम होगा, लेकिन इतना तय है कि मैच बहुत टक्कर के होने जा रहे हैं; क्योंकि महिला क्रिकेट में ज़बरदस्त सुधार आया है। आजकल जो महिला क्रिकेट में ़गज़ब के शॉट्स और अकल्पनीय फील्डिंग देखने को मिल रही है, वह अक्सर पुरुष क्रिकेट को भी फीका कर देती है।
हां, महिला क्रिकेट में गेंदबाज़ी का स्तर अब भी बहुत कमज़ोर है, विशेषकर तेज़ गेंदबाज़ी का। अभी तक सिर्फ दक्षिण अफ्रीका की शबनम इस्माइल ही 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गेंद फेंकने में कामयाब हुई हैं, लेकिन वह भी अब रिटायर हो चुकी हैं। एक बार चोट से उबरने के बाद मुहम्मद शमी गेंदबाज़ी की प्रैक्टिस कर रहे थे और पास में ही हमारी महिला टीम नेट्स कर रही थी। कोच ने शमी से कहा कि वह दो-चार कदम से महिला बैटर्स को गेंदबाज़ी करें ताकि वह रिद्म में आ सकें। शमी ने चार कदम के रनअप से स्मृति मंधाना को गेंद की, जो स्मृति की जांघ में इतनी ज़ोर से लगी कि उन्हें कई सप्ताह तक क्रिकेट से दूर रहना पड़ा। इससे महिला व पुरुष क्रिकेट के स्तर में अंतर का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। बहरहाल, भारत की महिला टीम को जो हाल में जो सफलताएं मिली हैं, उससे वह सभी फोर्र्मेट्स में एक मज़बूत फोर्स बनकर उभरी है। भारतीय टीम की घोषणा से बहुत पहले ही टी-20 विश्व कप के लिए तैयारी शुरू हो गई थी।
नवम्बर 2025 में ओडीआई विश्व कप जीतने के बाद टीम ने दिसम्बर 2025 में श्रीलंका के साथ टी-20 श्रृंखला घर पर खेली और उसे 5-0 से जीता। यहीं से टी-20 विश्व कप की यात्रा आरंभ हो गई। इसके बाद भारत ने दो और टी-20 श्रृखंलाएं खेलीं- ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में 2-1 से पराजित किया, लेकिन दुर्भाग्य से दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ यह स्कोर लाइन 1-4 से पलट गई थी, जिसके बारे में जेमिमा रोड्रिग्स का कहना है, ‘कभी कभी असफलता आपको निरंतर जीत की तुलना में अधिक सबक देती है। इसने हमें रियलिटी चेक दिया। टीम इसे राइट स्पिरिट में ले रही है और सही से तैयारी करते हुए कड़ी मेहनत कर रही है। हम मज़बूत वापसी करेंगी।’ इसके बावजूद टीम इस बात से विश्वास अर्जित कर सकती है कि पिछले साल इंग्लैंड में उसने इंग्लैंड को पहली बार टी-20 श्रृंखला में 3-2 से पराजित किया था, जहां आगामी टी-20 विश्व कप खेला जाना है और इंग्लैंड में ही पहली बार युवा तेज़ गेंदबाज़ क्रांति गौड़ ने सबको अपनी लाइन-लेंथ से प्रभावित किया था। पूर्व तेज़ गेंदबाज़ झूलन गोस्वामी का कहना है कि खिलाड़ियों ने चैंपियनशिप सफलता का स्वाद चख लिया है, अब वह जीत को आदत बनाना चाहती हैं, इसलिए उत्साहित व प्रेरित हैं अपना पहला टी-20 विश्व कप खिताब जीतने के लिए।
भारत की बल्लेबाज़ी बहुत अधिक स्मृति, शेफाली वर्मा व जेमिमा रोड्रिग्स के बल्ले के चलने पर निर्भर करती है। गेंदबाज़ी स्पिन-आधारित है और दीप्ति शर्मा व राधा यादव के भरोसे है। गौरतलब है कि पिछले टी-20 विश्व कप में हमारी टीम दुर्भाग्य से अपने स्तर के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पायी थी। क्या इस बार उसकी भरपाई हो पायेगी? हरमनप्रीत कौर के अनुसार, ‘उसे ध्यान में रखते हुए हम तब से कड़ी मेहनत व तैयारी कर रही हैं। हां, हम पर दबाव होगा और थोड़ी सी हताशा भी, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि बड़ी प्रतियोगिता के लिए हम मानसिक रूप से अपने आप को किस तरह से तैयार करती हैं। जो कुछ हो चुका वह इतिहास है। अब हमें सही चीज़ें करनी हैं और उन्हें बार-बार करते रहना हैं।’ इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि टीम में अनुभव है, आत्मविश्वास है। अब सिर्फ यही शेष रह गया है कि टीम एकजुट होकर अच्छा खेले और एक अन्य ट्राफी अपने नाम करके भारत के खेल प्रेमियों का दिल बाग-बाग कर दे।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर





