डीज़ल की आपूर्ति सुनिश्चित करे सरकार

भारत सरकार द्वारा डीज़ल की कीमतों में की गई वृद्धि और फिर इसकी आपूर्ति सीमित करने हेतु लगाये गये अंकुश ने राष्ट्र-व्यापी चिन्ताओं का पिटारा खोल दिया है। सरकारी निर्देश के अनुसार अब एक ओर जहां प्रत्येक वाहन को दिन में एक ही बार 200 लीटर तक डीज़ल उपलब्ध कराया जाएगा, वहीं व्यवसायिक, औद्योगिक एवं संस्थागत उपभोक्ताओं द्वारा बड़ी मात्रा में पेट्रोल पम्पों से खरीद किये जाने पर रोक लगा दी गई है। इन्हें भविष्य में अपनी आपूर्ति थोक डिपुओं से हासिल करनी पड़ेगी। नि:संदेह इस आदेश से एक ओर व्यवसायिक एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों में सनसनीपूर्ण स्थितियां  पैदा हुई हैं, वहीं कृषि क्षेत्र के भी विपरीत ढंग से प्रभावित होने की आशंकाएं दिखाई दी हैं। बेशक ये पाबंदियां फिलहाल 90 दिन के लिए लागू की गई हैं, किन्तु इनकी समयावधि बढ़ाई भी जा सकती है। तथापि इतने ही समय में उपजने वाली विपरीत स्थितियों से उद्योग एवं कृषि क्षेत्र को जिस प्रकार की हानि होने का अनुमान लगाया गया है, उसकी आपूर्ति होने में काफी समय लग सकता है।
डीज़ल की आपूर्ति पर लगाये गये इस अंकुश से विशेषकर पंजाब के कृषि क्षेत्र पर हानि की दोहरी मार पड़ने की भी सम्भावना है। क्योंकि पंजाब में धान की बुआई का मौसम शुरू हो चुका है। इस काल में कृषि क्षेत्र में डीज़ल और बिजली की मांग बड़ी तेज़ी से बढ़ती है। देश में अभी कुछ ही दिन पूर्व पेट्रोल एवं डीज़ल की कीमतों में वृद्धि की गई है। इस वृद्धि से एक ओर जहां कृषि लागत बढ़ी है, वहीं कृषि उपकरणों तथा खाद-बीज की कीमतों में भी भारी इज़ाफा हुआ है। पेट्रोल एवं डीज़ल की कमी और इनके दामों में हुई वृद्धि के कारण आवागमन और माल-भाड़े में भी पिछले दिनों वृद्धि दर्ज की गई है। इस कारण भी कृषि वस्तुओं के दाम प्रभावित हुए हैं। इसी प्रकार व्यापारिक एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर भी तेल-डीज़ल की कीमतों में वृद्धि का असर पड़ा है। इस कारण देश के कई राज्यों जिनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली आदि भी शामिल हैं,में इस पदार्थ को लेकर काफी चिन्ताजनक स्थिति उत्पन्न हुई है। औद्योगिक क्रांति वाले और कृषि केन्द्रित राज्यों में इस फैसले से काफी विपरीत स्थितियां उपजने की आशंका है।
यह स्थिति इसलिए भी गम्भीर हुई है क्योंकि खाड़ी युद्ध के कारण एक ओर जहां पेट्रोल-डीज़ल की सप्लाई विपरीत रूप से प्रभावित हुई है, वहीं थोक एवं व्यवसायिक उपभोक्ताओं द्वारा लघु शहरी पेट्रोल पम्पों से बड़े स्तर पर डीज़ल खरीद किये जाने से नकारात्मक प्रभाव में और वृद्धि हुई है। इस कारण पेट्रोल पम्पों के भण्डारण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है। इससे देश के कुछ प्रांतों में डीज़ल की आपूर्ति पर संकट के बादल घिर आये दिखाई देने लगे हैं। दो ही दिन पूर्व पेट्रोल एवं डीज़ल की कीमतों में हुई वृद्धि के कारण भी स्थितियों पर विपरीत प्रभाव पड़ा। खाड़ी क्षेत्र में अमरीका और ईरान के बीच बेशक युद्ध के समाप्त हो जाने की घोषणा हो गई है, किन्तु इस दौरान युद्ध के संदर्भ में राष्ट्रपति ट्रम्प के विरोधाभासी ब्यानों के संताप से भी देश में इन पदार्थों के नियमितीकरण हेतु उठाए गये पगों से अनिश्चितता  बनी है। कृषि तथा व्यापारिक प्रतिष्ठानों द्वारा बड़ी मात्रा में खरीद किए जाने से भी पेट्रोल पम्पों पर दबाव बढ़ा है जिस कारण सरकार को डीज़ल की  खरीद हेतु ये अंकुश लगाना पड़ा हो। थोक डिपो की कीमतों और परचून बिक्री के पेट्रोल पम्पों पर डीज़ल की कीमतें भी इस अंकुश के लिए उत्तरदायी बनीं। बड़े कारोबारियों और बड़े ज़मींदारों द्वारा डीज़ल का भण्डार किये जाने से भी स्थिति खराब हुई।
हम समझते हैं कि नि:संदेह यह स्थिति पंजाब जैसे कृषि-आधारित राज्यों के लिए कदापि उचित नहीं है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश तथा बिहार आदि राज्यों में इस समय धान की बुआई का मौसम है। इस दौरान बुआई हेतु बिजली और डीज़ल की मांग अतिशय रूप से बढ़ती है। छोटे पेट्रोल पम्पों पर सप्लाई का दबाव बढ़ने और केन्द्र सरकार के इस निर्देश से कृषि क्षेत्र को भारी हानि होने की बड़ी आशंका है। किसान मोर्चा के प्रमुख नेता बलबीर सिंह राजेवाल एवं कृषि से सम्बद्ध विभिन्न यूनियनों के नेताओं ने इस अंकुश की तीव्र निंदा की है। अधिकतर किसान नेताओं ने केन्द्र सरकार द्वारा खाद, बीजों और अब डीज़ल की पर्याप्त आपूर्ति न किये जाने को पंजाब के हितों के विपरीत पग करार दिया है। केन्द्र सरकार ने बेशक इस हेतु कुछ देशों की विपरीत भू-राजनीतिक स्थिति को ज़िम्मेदार ठहराया है, किन्तु हम समझते हैं कि धान की बुआई का मौसम सिर पर होने के कारण केन्द्र सरकार को देश के कृषि-प्रधान राज्यों विशेषकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में डीज़ल की पर्याप्त उपलब्धता एवं आपूर्ति को हर हाल में सुनिश्चित बनाना होगा।

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