तेज़ होती राजनीतिक गतिविधियां
पंजाब में विगत लम्बी अवधि से राजनीतिक गतिविधियां चलती आ रही हैं, परन्तु अब चुनाव का समय नज़दीक आने के कारण इसने अधिक तेज़ी पकड़ ली है। विगत समय हुए स्थानीय निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी के अलग-अलग स्तरों पर अधिकतर प्रतिनिधियों ने जीत प्राप्त की थी, जिससे शासन कर रही इस पार्टी का हौसला और भी बढ़ा हुआ दिखाई देता है। बठिंडा में इस जीत के संबंध में निकाली गई रैली के बाद आयोजित समारोह में सम्बोधित करते हुए पार्टी संयोजक अरविन्द केजरीवाल ने कुछ ऐसी बातें कहीं हैं, जिनसे राजनीति और भी गरमा गई है। केजरीवाल ने स्पष्ट रूप में दो बातों का ज़िक्र किया है। उन्होंने यह सम्भावना व्यक्त की है कि चुनाव अपने निर्धारित समय के कुछ माह पहले नवम्बर में हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में अब तैयारियों के लिए कुछ माह का समय ही शेष है।
उन्होंने स्पष्ट रूप में यह भी कहा है कि पार्टी की ओर से आगामी मुख्यमंत्री भगवंत मान ही होंगे। अपने तीन दिवसीय पंजाब दौरे में वह जालन्धर और लुधियाना भी जा रहे हैं। उन्होंने पार्टी को तैयारियां तेज़ करने का संदेश देते हुए यह भी कहा है कि मतदाताओं से नीचले स्तर तक सम्पर्क बनाया जाना बेहद ज़रूरी है। पार्टी की ओर से चुनाव तैयारी की रूप-रेखा भी तैयार कर ली गई है। पिछले साढ़े 4 वर्ष में सरकार द्वारा की गईं उपलब्धियों के विवरण भी गिनाए जाने लगे हैं। इन उपलब्धियों को आधार बना कर ही सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा चुनाव प्रचार तेज़ किया जाएगा। इसी क्रम में भाजपा की सक्रियता को देखा जा सकता है। केवल सिंह ढिल्लों को अध्यक्ष बनाने की घोषणा का चाहे पार्टी के भीतर मिला-जुला प्रभाव देखा जा सकता है, परन्तु जिस दृढ़ता और स्पष्ट दृष्टि से यह घोषणा की गई है, उससे मौजूदा समय में भाजपा का प्रभाव बढ़ा दिखाई देता है। विगत दिवस दिल्ली में पंजाब भाजपा के नेताओं की केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं के साथ हुई बैठक से बने प्रभाव से यह ज़रूर कहा जा सकता है कि भाजपा अपनी पूरी शक्ति के साथ पंजाब के चुनाव मैदान में उतर रही है। इसके लिए उसकी ओर से तैयारियां तो विगत लम्बी अवधि से की जा रही थीं, परन्तु पश्चिम बंगाल के चुनाव में जीत के बाद वह पूरे हौसले में आ गई है और इसने आगामी पंजाब चुनाव जीतने के दावे भी करने शुरू कर दिए हैं, क्योंकि भाजपा ने पिछले वर्षों में समय-समय पर हुए प्रत्येक स्तर के चुनाव में अपने मत प्रतिशत में भारी वृद्धि की है। कांग्रेस का पंजाब में बड़ा प्रभाव और निम्न स्तर पर ताना-बाना हुआ है, परन्तु अभी तक पार्टी द्वारा इन आगामी चुनाव के लिए अपनाई जाने वाली कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई। यह प्रभाव भी मिलता रहा है कि प्रदेश के नेतृत्व के पुनर्गठन संबंधी भी पार्टी द्वारा अभी तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया जा सका। इसी कारण अभी तक यह प्रदेश के राजनीतिक दृश्य पर उतरी दिखाई नहीं दे रही।
प्रदेश में अकाली दल का भी बड़ा प्रभाव बना रहा है। इसकी ओर से लम्बे अवधि तक शासन किया जाता रहा है परन्तु विगत लम्बी अवधि से अलग-अलग तरह के चुनाव के दौरान हुई निराशाजनक हार ने इसके प्रभाव को बड़ी सीमा तक कमज़ोर किया है। इसके अतिरिक्त आज पार्टी में उभरी गुटबंदी के कारण इसमें बड़ी दरार पड़ी दिखाई दे रही है। आज अस्तित्व में आए कई अकाली दल अलग-अलग स्तर पर अपनी ज़ोर-आजमाइश करने के लिए तैयारियां कर रहे हैं। पड़ी इन दरारों ने अकाली दल की राजनीति को बड़ी सीमा तक कमज़ोर कर दिया है। आगामी समय के लिए भी यह अलग-अलग दल कोई परिपक्व और ठोस नीति अपनाकर आगे बढ़ सकेंगे, इस संबंध में अभी कुछ कहा जाना कठिन प्रतीत होता है। आगामी समय में पंजाब के राजनीतिक मंच पर तस्वीर और स्पष्ट हो जाएगी। पंजाब के लिए आने वाले दिन इस कारण भी महत्त्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इन गतिविधियों से ही प्रदेश में आगामी सरकार की रूप-रेखा उभरेगी। लोगों की इच्छा है कि आगे कोई ऐसी सरकार हो, जो अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे प्रदेश में विकास की गति को और तेज़ कर सके और अमन-कानून की स्थिति में भी बड़ा सुधार ला सके।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

