मेहनत, जज़्बे और इन्सानियत की मिसाल क्रिस्टियानो रोनाल्डो
फुटबाल शब्द और रोनाल्डो आज की जवानी के लिए एक-दूसरे के पूरक हैं। सिक्के का एक पहलू यदि फुटबाल है तो दूसरा पहलू रोनाल्डो है। आज जब 2026 का फीफा वर्ल्ड कप 11 जून से 19 जुलाई के बीच खेला जा रहा है तो विश्व-भर के फुटबाल प्रेमी यह भी जानते हैं कि यह वर्ल्ड कप लोकप्रिय फुटबाल खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो की ज़िंदगी का अंतिम वर्ल्ड कप है। भाव 41 वर्ष के होने जा रहे क्रिस्टियानो रोनाल्डो निकट भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल से संन्यास लेने जा रहे हैं। यहां यह भी वर्णनीय है कि साऊदी अरब के फुटबाल क्लब अल-नासर के साथ क्रिस्टियानो रोनाल्डो का करार जून 2027 तक का है। इसके अलावा अब तक 970 से अधिक गोल करने वाले रोनाल्डो का लक्ष्य अपने करियर में 1000 गोल पूरे करने का है।
पुर्तगाल में मदीरा टापू के फंचल में अत्यन्त गरीबी से प्रतिदिन जूझ रहे परिवार में मां मारिया डोलोरेस दोस सैंटोस अवेरो और पिता जोसे डिनिस अवेरो के घर जन्मे क्रिस्टियानो रोनाल्डो अपने भाई हूगो और बहनें ऐलमां और लिलीयाना कैटिया से छोटा है। 5 फरवरी, 1985 को जन्मे 41 वर्ष के क्रिस्टियानो रोनाल्डो आज दुनिया के सबसे महंगे खिलाड़ी हैं। रोनाल्डो की मां ने एक रसोईये और सफाई सेविका के रूप में काम करते हुए और पिता ने फंचल की नगरपालिका में एक माली के रूप में और फंचल (मदीरा) के फुटबाल क्लब एैंडोरिनहा के किट्ट-मैन (खिलाड़ियों के कपड़े और सामान संभालने वाला) के तौर पर मेहनत करते हुए अपने इन चार बच्चों का टीन की छत वाले एक छोटे से कमरे में पालन-पोषण किया।
क्रिस्टियानो रोनाल्डो के पिता ने अपने इस लाडले पुत्र का नाम अमरीका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के नाम पर रखा। परन्तु रोनाल्डो का बचपन इतना मुसीबतों से भरा था कि रोनाल्डो और उसके बहन-भाई अपना पेट भरने के लिए अक्सर मैकडोनाल्ड के बाहर खड़े रहते थे और वहां की हैडना नामक एक कर्मचारी रात को उनकी भूख मिटाने के लिए बर्गरों के बचे हुए टुकड़े दे दिया करती थी।
रोनाल्डो की मां ने अपनी किताब रूशह्लद्धद्गह्म् ष्टशह्वह्म्ड्डद्दद्ग में बेबाक लिखा है कि उसने क्रिस्टियानो रोनाल्डो को जन्म देने से पहले घर की गरीबी और अपने पति जोसे डिनिस अवेरो की प्रतिदिन की शराब के नशे में टल्ली रहने वाली बुरी आदत से तंग आकर गर्भपात करने का मन बना लिया था। यह गर्भपात करने के लिए उसने कई घरेलू ढंग तरीके अपनाए भी परन्तु वह कामयाब नहीं हो सकी। थक हारकर मां ने इस गर्भ को गिराने के लिए डाक्टर तक पहुंच की, परन्तु डाक्टर मां की शारीरिक कमजोरी के कारण ऐसा करने के लिए सहमत न हुए। रोनाल्डो के पिता की 2005 में लगातार शराब पीने से लिवर की बीमारी के कारण मौत हो गई और मुसीबतों के घिरे इस परिवार के पालन-पोषण की सारी जिम्मेदारी रोनाल्डो की मां पर आ गई।
प्राइमरी की पढ़ाई के दौरान दरपेश मुश्किलों के कारण पूरी तरह से चिड़चिड़े हो चुके रोनाल्डो ने अपने एक अध्यापक द्वारा उसके घरेलू हालात और उसके बोलने के तरीके का मज़ाक उड़ाने पर उसको कुर्सी उठाकर मारी, जिसके परिणामस्वरूप उनको पढ़ाई छोड़नी पड़ी। सड़क पर झाडू लगाकर पैसे जोड़ने वाले रोनाल्डो जब अपने लिए एक नया फुटबाल भी न खरीद सके तो वह कपड़े की गेंद बनाकर या सड़क किनारे पड़ी प्लास्टिक की बोतलों को किक मारकर अपना फुटबाल खेलने का सपना पूरा करते रहते। उस समय के समझदार लोग रोनाल्डो का यह कह कर मज़ाक उड़ाते कि तेरे सिर पर फुटबाल खेलने का यह जो जुनून-सवार हुआ रहता है, देखेंगे यह तुझे कैसे रोटी देता है।
क्रिस्टियानो रोनाल्डो के सिर पर सवार फुटबाल खेलने का जुनून उनको सात वर्ष की आयु में फुटबाल के मैदान की ओर ले गया। 1992 में रोनाल्डो ने अपने मदीरा टापू के शहर फंचल में एैंडोरिनहा (ष्टस्न ्नठ्ठस्रशह्म्द्बठ्ठद्धड्ड) नामक क्लब (जहां इसके पिता किट मैन थे) के लिए फुटबाल खेलने से रफुटबाल की दुनिया में पहला कदम रखा। अपने पिता की मदद से इस क्लब के लिए खेले गए मैच दौरान रोनाल्डो फुटबाल के इर्द-गिर्द इस कदर मंडराते नज़र आए कि उनके स्थानीय दोस्तों ने छेड़ के तौर पर उनका नाम अबलिनहा (छोटी मधू मक्खी) रख लिया। इसी तरह रोनाल्डो ने जब अपने क्लब की ओर से कमाचा क्लब के साथ फुटबाल खेलते हुए मैच के पहले हॉफ तक खुद को बुरी तरह हारते देखा तो वह फुटबाल के मैदान में इस कदर रोये कि उनकी हालत टूर्नामैंट का अगला हॉफ खेलने योग्य भी न रही। ऊपर से उनके दोस्तों ने उनको चोराओं-चोराओं (रोता हुआ बच्चा) कह-कह कर इतना ज्यादा चिड़ाया कि बाल रोनाल्डो बुरी तरह से टूट गए। अपने कोचों द्वारा समझाने पर रोनाल्डो ने कमाचा क्लब के खिलाफ गोल करने की ऐसी आंधी लाई कि आखिर उनके एैंडोरिनहा क्लब की शानदार जीत हुई।
जब रोनाल्डो दस वर्ष के हुए तो उनके फुटबाल खेलने के जुनून को देखते हुए मदीरा टापू के सबसे बड़े क्लबों में से एक नैशनल (ष्टष्ठ हृड्डह्लद्बशठ्ठड्डद्य) ने उनको साइन कर लिया। वहां वह अनेक छोटे-बड़े अवार्ड जीतते हुए पूरे मदीरा टापू के नौजवानों में सबसे लोकप्रिय खिलाड़ी बन गए। अपनी 12 वर्ष की आयु में रोनाल्डो को फुटबाल के क्षेत्र में अपने भविष्य के लिए अपनी रिहायश मदीरा टापू छोड़कर पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन आना पड़ा। स्पोर्टिंग लिस्बन (स्ह्वश्चश्चशह्म्ह्लद्बठ्ठद्द ष्ट.क्क.) क्लब में रोनाल्डो का तीन दिन ट्रायल चला। इन तीन दिनों में क्लब के कोच हैरान थे कि रोनाल्डो फुटबाल के साथ कैसे करतब करते हैं। रोनाल्डो के फुटबाल पर कंट्रोल और उनकी बे-मिसाल रफ्तार ने कोचों की टीम को हिलाकर रख दिया। परिणामस्वरूप स्पोर्टिंग लिस्बन ने रोनाल्डो को 1500 पौंड के बदले साइन कर लिया जो उस समय के बारह-तेरह साल के रोनाल्डो के लिए बहुत बड़ी रकम थी। यह वह समय था जब क्रिस्टियानो रोनाल्डो पहली बार अपने घर से दूर रहने के लिए मज़बूर हुए थे। उधर मां ने भी उनके अंदर छिपी प्रतिभा की पहचान करते हुए अपने दिल पर पत्थर रखकर रोनाल्डो को पूरी तरह फुटबाल के हवाले कर दिया। रोनाल्डो 15 वर्ष के हुए तो परिवार पर नई परेशानी आ गई, जब उसको पता चला कि रोनाल्डो के दिल की धड़कन नार्मल नहीं है और फुटबाल के मैदान में पैर रखना उनके लिए कभी भी जानलेवा साबित हो सकता है। परन्तु परिवार डरा नहीं। रोनाल्डो के दिल का आप्रेशन करवाया गया और स्वस्थ होते ही रोनाल्डो फुटबाल के मैदान में फिर आ गया।




