सूखी बर्फ क्या होती है ?
बच्चो आप बर्फ की दो किस्मों के बारे में जानते ही हो। एक जो फ्रिज या फैक्टरियों में पानी को जमा कर बनाई जाती है और दूसरी वह जो ओलावृष्टि के रूप में या पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर प्राकृतिक रूप में गिरती है। बर्फ की ये दोनों किस्में गिली होती हैं परन्तु क्या आप जानते हो कि बर्फ की एक ऐसी किस्म भी है जो पिघलने पर भी किसी चीज़ को गिला नहीं कर सकती। यह सूखी बर्फ कहलाती है। आओ, इसके बारे में और जानते हैं। फ्रांस के एक रसायन वैज्ञानिक एड्रीन जीन थीलोरीयर ने 1835 में सूखी बर्फ की खोज की जब उसने देखा कि कार्बन डाइऑक्साइड के बड़े सिलेंडर का ढक्कन खोलने पर गैस का वाष्पीकरण हो जाता है और यह अपने पीछे बर्फ जैसा पदार्थ छोड़ जाती है।
कार्बन डाइऑक्साइड गैस के इस ठोस रूप को सूखी बर्फ कहते हैं। इसका उत्पादन करने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड गैस को आम से 5 गुणा ज्यादा दबाव दिया जाता है। यह जम जाने पर बहुत ही ज्यादा ठंडी होती है। जहां आम बर्फ का सतह तापमान 0 डिग्री सैल्सियस होता है, वहीं सूखी बर्फ का सतह तापमान -78.5 डिग्री सैल्सियस होता है, जो मानवीय सैल को जमा देने के लिए काफी होता है। सूखी बर्फ रंगहीन, गंधहीन और ज्वलनशील होती है। वायुमण्डल से सम्पर्क में आने पर यह पिघल जाती है और तरल बने बगैर ही गैस बन कर उड़ जाती है और अपने पीछे धुएं जैसा गुब्बार छोड़ती है परन्तु कपड़े को गिला नहीं करती।
यह आम बर्फ की तरह ठंडक पैदा करके तापमान कम कर देती है। इस कारण ही इसको सूखी बर्फ कहते हैं। इसको मीट और आइसक्रीम जैसे जल्द खराब हो जाने वाले पदार्थों को लम्बी दूरी तक लेकर जाने के लिए प्रयोग करते हैं। वैज्ञानिक अपनी खोज के समय कम तापमान पैदा करने के लिए इसका प्रयोग करते हैं। डरावनी फिल्मों में धुएं को पैदा करते के लिए भी सूखी बर्फ को पानी में मिलाकर प्रयोग किया जाता है।
-लैक्चरार कैमिस्ट्री, स.स.स.स. गग्गोबुआ, तरनतारन




